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गजब, 256.19 लाख की सामग्री खरीद के बाद भी कार्य नहीं हुआ शुरू
Updated Sun, 04 Mar 2018 10:48 PM IST
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रुद्रप्रयाग। जखोली ब्लाक के करीब 60 गांवों के लिए 2011-12 में स्वीकृत 18 किमी लंबी सिंचाई नहर का आज तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। शासन से योजना के लिए स्वीकृत 984.28 लाख धनराशि के सापेक्ष विभाग को 288.46 लाख रुपये अवमुक्त किए जा चुके हैं, जिसमें से 256.19 लाख रुपये से 3400 मीटर पाइप की खरीद हो चुकी है। इसके बाद भी योजना का कार्य आज तक शुरू नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों की इसकी शिकायत डीएम से की। डीएम ने प्रकरण की जांच के लिए एसडीएम देवमूर्ति यादव के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम गठित की है।
वर्ष 2008 में सिंचाई विभाग ने जखोली ब्लाक के बांगर, सिलगढ़, बड़मा पट्टी के 60 से अधिक गांवों की करीब 500 हेक्टेयर सिंचित भूमि के लिए पर्याप्त पानी के लिए लस्तर नदी से 18 किमी लंबी सिंचाई नहर का प्रस्ताव भेजा था। 26 मार्च 2012 को तत्कालीन सरकार ने योजना को स्वीकृति देते हुए निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग निर्माण खंड रुद्रप्रयाग को सौंपी। शासन की ओर से स्वीकृत 9 करोड़, 84 लाख 28 हजार रुपये में से निर्माणदायी संस्था को पहली किश्त के रूप में 2 करोड़, 88 लाख 46 हजार रुपये अवमुक्त किए गए। विभाग ने 17 अनुबंधों के आधार पर 2 करोड़, 56 लाख, 19 हजार रुपये से 34 सौ मीटर पाइप की खरीद की और भूमि हस्तांतरण का वन विभाग में 24 लाख, 83 हजार रुपये जमा करा दिया, लेकिन विभाग ने कार्य शुरू नहीं किया। शासन से अवमुक्त कुल राशि में से 7 लाख 44 हजार का हिसाब नहीं है। वहीं, गांवों से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी नहीं लिया गया है। विभाग ने योजना को 3 किमी विस्तार देते हुए इसे 21 किमी लंबी किया और निर्माण लागत 3032 लाख का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया, जो वर्ष 2014-15 में वापस हो चुका है। इधर, सिंचाई नहर के इंतजार में पांच वर्षों में काश्तकारों की 150 हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओपी बहुगुणा व बड़मा संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण रावत सहित दीपक रावत, रामरतन पंवार आदि ने योजना की जांच कर दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
कोट
ढाई करोड़ से अधिक की धनराशि से पाइप खरीदने के बाद भी सिंचाई नहर का निर्माण शुरू नहीं होना, बिना निर्माण के ही पुन: सर्वेक्षण कर योजना को 3 किमी विस्तार देकर पूर्व की मूल स्वीकृत राशि का 3 गुना से अधिक रिवाइज स्टीमेट भेजने सहित कई बातें सामने आ रही हैं, जो विभागीय कार्यशैली पर संदेह कर रही हैं। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। एक सप्ताह में रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।
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पाइप खरीदने के बाद 18 किमी लंबी लस्तर नहर का निर्माण क्यों नहीं हुआ, इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। दो दिन पूर्व पूरे क्षेत्र का जायजा लिया है, जिसमें नहर के सर्वेक्षण में लापरवाही बरती गई है। जांच के बाद भी पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। - पीएस पंवार, अधीक्षण अभियंता सिंचाई कार्य मंडल रुद्रप्रयाग।
वर्ष 2008 में सिंचाई विभाग ने जखोली ब्लाक के बांगर, सिलगढ़, बड़मा पट्टी के 60 से अधिक गांवों की करीब 500 हेक्टेयर सिंचित भूमि के लिए पर्याप्त पानी के लिए लस्तर नदी से 18 किमी लंबी सिंचाई नहर का प्रस्ताव भेजा था। 26 मार्च 2012 को तत्कालीन सरकार ने योजना को स्वीकृति देते हुए निर्माण की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग निर्माण खंड रुद्रप्रयाग को सौंपी। शासन की ओर से स्वीकृत 9 करोड़, 84 लाख 28 हजार रुपये में से निर्माणदायी संस्था को पहली किश्त के रूप में 2 करोड़, 88 लाख 46 हजार रुपये अवमुक्त किए गए। विभाग ने 17 अनुबंधों के आधार पर 2 करोड़, 56 लाख, 19 हजार रुपये से 34 सौ मीटर पाइप की खरीद की और भूमि हस्तांतरण का वन विभाग में 24 लाख, 83 हजार रुपये जमा करा दिया, लेकिन विभाग ने कार्य शुरू नहीं किया। शासन से अवमुक्त कुल राशि में से 7 लाख 44 हजार का हिसाब नहीं है। वहीं, गांवों से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी नहीं लिया गया है। विभाग ने योजना को 3 किमी विस्तार देते हुए इसे 21 किमी लंबी किया और निर्माण लागत 3032 लाख का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया, जो वर्ष 2014-15 में वापस हो चुका है। इधर, सिंचाई नहर के इंतजार में पांच वर्षों में काश्तकारों की 150 हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओपी बहुगुणा व बड़मा संघर्ष समिति के अध्यक्ष कालीचरण रावत सहित दीपक रावत, रामरतन पंवार आदि ने योजना की जांच कर दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
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ढाई करोड़ से अधिक की धनराशि से पाइप खरीदने के बाद भी सिंचाई नहर का निर्माण शुरू नहीं होना, बिना निर्माण के ही पुन: सर्वेक्षण कर योजना को 3 किमी विस्तार देकर पूर्व की मूल स्वीकृत राशि का 3 गुना से अधिक रिवाइज स्टीमेट भेजने सहित कई बातें सामने आ रही हैं, जो विभागीय कार्यशैली पर संदेह कर रही हैं। मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। एक सप्ताह में रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी। - मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग।
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पाइप खरीदने के बाद 18 किमी लंबी लस्तर नहर का निर्माण क्यों नहीं हुआ, इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। दो दिन पूर्व पूरे क्षेत्र का जायजा लिया है, जिसमें नहर के सर्वेक्षण में लापरवाही बरती गई है। जांच के बाद भी पूरी स्थिति साफ हो पाएगी। - पीएस पंवार, अधीक्षण अभियंता सिंचाई कार्य मंडल रुद्रप्रयाग।