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मौसम ने साथ दिया तो एक माह में पिघल सकेगी बर्फ
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रुद्रप्रयाग। अगर, मौसम ने साथ दिया तो केदारनाथ में जमी बर्फ एक माह में पिघल सकेगी। ऐसा न हुआ तो अगामी यात्रा तैयारियों में प्रशासन, विभाग और कार्यदायी संस्थाओं को खासी मुश्किलें हो सकती हैं। धाम में साढ़े नौ फीट बर्फ मौजूद है। रविवार को यहां दिनभर मौसम सुहावना रहा और धूप खिली रही। इस दौरान अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम माइनस 9.9 डिग्री सेल्सियश दर्ज किया गया।
बीते 21 जनवरी के बाद से 15 फरवरी की रात तक केदारनाथ में 6 बार तेज बर्फबारी हो चुकी है। वर्तमान में यहां मंदिर परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र में साढ़े नौ से 11 फीट तक बर्फ जमा है। केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच भी पैदल मार्ग पर रामबाड़ा तक 5 से 7 फीट बर्फ है, जिस पर आवाजाही करना भी मुश्किल है। पूरे मार्ग पर ग्लेशियर जोन सक्रिय है। लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट तक 6 स्थानों पर 50 फीट से अधिक लंबाई और 30 फीट से अधिक चौड़ाई के ग्लेशियर पसरे हुए हैं। केदारनाथ में मौजूद कार्यदायी संस्था वुड स्टोन के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि जिस तरह के हालात अभी हैं, उनसे पार पाना आसान नहीं है। सभी कार्य स्थल बर्फ से ढके हुए हैं। अगर, मौसम साफ रहा तो एक माह में बर्फ पिघल सकती है। साथ ही मजदूरों की संख्या बढ़ाकर बर्फ को साफ करने में 25 दिन से अधिक लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते 28 दिन से धाम में बाहरी पुनर्निर्माण कार्य ठप है। जबकि बिजली के अभाव में तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के अंदर फिनिशिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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बीते 21 जनवरी के बाद से 15 फरवरी की रात तक केदारनाथ में 6 बार तेज बर्फबारी हो चुकी है। वर्तमान में यहां मंदिर परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र में साढ़े नौ से 11 फीट तक बर्फ जमा है। केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच भी पैदल मार्ग पर रामबाड़ा तक 5 से 7 फीट बर्फ है, जिस पर आवाजाही करना भी मुश्किल है। पूरे मार्ग पर ग्लेशियर जोन सक्रिय है। लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट तक 6 स्थानों पर 50 फीट से अधिक लंबाई और 30 फीट से अधिक चौड़ाई के ग्लेशियर पसरे हुए हैं। केदारनाथ में मौजूद कार्यदायी संस्था वुड स्टोन के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि जिस तरह के हालात अभी हैं, उनसे पार पाना आसान नहीं है। सभी कार्य स्थल बर्फ से ढके हुए हैं। अगर, मौसम साफ रहा तो एक माह में बर्फ पिघल सकती है। साथ ही मजदूरों की संख्या बढ़ाकर बर्फ को साफ करने में 25 दिन से अधिक लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते 28 दिन से धाम में बाहरी पुनर्निर्माण कार्य ठप है। जबकि बिजली के अभाव में तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के अंदर फिनिशिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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