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हादसे के साढ़े चार माह बाद भी नहीं मिले कुमड़ी के प्रधान
Updated Wed, 22 Nov 2017 10:54 PM IST
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तिलवाड़ा। जखोली ब्लाक के अंतर्गत सिलगढ़ पट्टी की ग्राम पंचायत कुमेड़ी पिछले साढ़े चार माह से भगवान भरोसे संचालित हो रही है। विगत जुलाई माह में वाहन दुर्घटना के बाद से ग्राम प्रधान के लापता होने के बाद से ग्राम पंचायत में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन सहित मनरेगा कार्य ठप पड़े हैं, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
रुद्रप्रयाग बाईपास पर विगत सात जुलाई को वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर अलकनंदा नदी में गिर गया था। हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि छह लोग वाहन के साथ नदी में बह गए थे, जिसमें ग्राम पंचायत कुमेड़ी के ग्राम प्रधान इंद्र लाल भी शामिल थे। दुर्घटना के करीब एक हफ्ते बाद श्रीनगर क्षेत्र में तीन लोगों के शव बरामद हो गए थे, जिनकी शिनाख्त हो गई थी, लेकिन ग्राम प्रधान, चालक और एक महिला का साढ़े चार माह बीत जाने के बाद भी कोई पता नहीं लग पाया है। प्रशासन और पुलिस कानूनी नियमों के तहत इन लोगों को मृतक नहीं मान रही है, ऐसे में जहां प्रभावितों के परिवार परेशान हैं, वहीं ग्राम पंचायत कुमड़ी में कामकाज ठप पड़ा है। जुलाई माह से यहां पर मनरेगा कार्यों की मानीटरिंग नहीं हो रही है और न मजदूरों को भुगतान। ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल, आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र सहित पंचायत स्तरीय अन्य कार्यों के लिए दिक्कत हो रही है। ग्रामीण सुरेंद्र सिंह रावत, प्रेम सिंह, किशन सिंह, विनोद लाल आदि का कहना है कि दुर्घटना के बाद से ग्राम पंचायत की सुध नहीं ली जा रही है। पीड़ित परिवार सहित अन्य ग्रामीण परेशान हैं। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी विद्या सागर ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया जाएगा कि हादसे के बाद से लापता ग्राम प्रधान को मृतक माना जाए। इसके बाद ही ग्राम पंचायत कुमड़ी के उपप्रधान को प्रधान का चार्ज सौंपा जाएगा।
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रुद्रप्रयाग बाईपास पर विगत सात जुलाई को वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर अलकनंदा नदी में गिर गया था। हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि छह लोग वाहन के साथ नदी में बह गए थे, जिसमें ग्राम पंचायत कुमेड़ी के ग्राम प्रधान इंद्र लाल भी शामिल थे। दुर्घटना के करीब एक हफ्ते बाद श्रीनगर क्षेत्र में तीन लोगों के शव बरामद हो गए थे, जिनकी शिनाख्त हो गई थी, लेकिन ग्राम प्रधान, चालक और एक महिला का साढ़े चार माह बीत जाने के बाद भी कोई पता नहीं लग पाया है। प्रशासन और पुलिस कानूनी नियमों के तहत इन लोगों को मृतक नहीं मान रही है, ऐसे में जहां प्रभावितों के परिवार परेशान हैं, वहीं ग्राम पंचायत कुमड़ी में कामकाज ठप पड़ा है। जुलाई माह से यहां पर मनरेगा कार्यों की मानीटरिंग नहीं हो रही है और न मजदूरों को भुगतान। ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल, आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र सहित पंचायत स्तरीय अन्य कार्यों के लिए दिक्कत हो रही है। ग्रामीण सुरेंद्र सिंह रावत, प्रेम सिंह, किशन सिंह, विनोद लाल आदि का कहना है कि दुर्घटना के बाद से ग्राम पंचायत की सुध नहीं ली जा रही है। पीड़ित परिवार सहित अन्य ग्रामीण परेशान हैं। इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी विद्या सागर ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा यह प्रस्ताव तैयार किया जाएगा कि हादसे के बाद से लापता ग्राम प्रधान को मृतक माना जाए। इसके बाद ही ग्राम पंचायत कुमड़ी के उपप्रधान को प्रधान का चार्ज सौंपा जाएगा।
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