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टिकट वितरण में आधी आबादी नजर अंदाज
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Thu, 19 Jan 2017 10:23 PM IST
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राजनीतिक दलों की ओर से महिला सशक्तिकरण के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन बात जब उनके अधिकारों की आती है तो नजरअंदाज कर दिया जाता है। कम से कम राजनीतिक दलों की ओर से किए जा रहे टिकट वितरण से तो यही सामने आया है। स्थिति यह है कि भाजपा ने हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से एक पर भी महिला प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। वहीं बसपा की ओर से मात्र एक सीट पर महिला प्रत्याशी घोषित किया गया है।
उत्तराखंड में पंचायतों के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इस पर महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यही कारण है कि आज जिले के छह में से चार ब्लाक में महिला प्रमुख निर्वाचित हुईं हैं। इसमें भगवानपुर, रुड़की, खानपुर और बहादराबाद शामिल हैं, लेकिन बात जब विधानसभा चुनाव की आई तो राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने से परहेज किया। भाजपा की ओर से जिले में किसी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया गया है, जबकि बसपा ने एक सीट पर महिला को उम्मीदवार घोषित कर खानापूरी की है। अब कांग्रेस की ओर से जारी की जाने वाली सूची पर सभी की नजर है, हालांकि कम ही संभावना है कि इसमें जिले से किसी महिला को स्थान मिल सके। ऐसा नहीं है कि भाजपा, बसपा और कांग्रेस से महिला दावेदारों की कमी है। भाजपा में तो रुड़की से महिला जिलाध्यक्ष होने के बाद भी उनकी दावेदारी को दरकिनार कर दिया गया, जबकि हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुरेश राठौर को प्रत्याशी बनाया गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि राजनीतिक दलों की ओर से टिकट वितरण में आधी आबादी को नजरअंदाज किया गया है।
सवाल पर रो पड़ीं कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष
महिला सशिक्तकरण और टिकट वितरण के सवाल पर कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष रश्मि चौधरी तो रो पड़ीं। उनका कहना है कि मैने रुड़की से विधानसभा के लिए टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया। सभी दलों की ओर से मातृशक्ति का केवल उपयोग किया जाता है, लेकिन टिकट के समय मुंह फेर लिया जाता है। उनका कहना है कि 70 में से कम से कम 25 सीटों पर महिला प्रत्याशी जरूर होनी चाहिए।
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भाजपा जिलाध्यक्ष की सुनिए
भाजपा एक अनुशासित और लोकतांत्रिक पार्टी है। इसमें टिकट वितरण का कार्य संसदीय बोर्ड का है। तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संसदीय बोर्ड टिकट के लिए उम्मीदवार तय करता है। संसदीय बोर्ड के निर्णय पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है। पार्टी ने जिसे भी टिकट दिया है उसे जिताना कार्यकर्ताओं का कर्तव्य और दायित्व है।
.........कल्पना सैनी, जिलाध्यक्ष भाजपा
एसडी डिग्री की पूर्व प्राचार्य बोलीं
एसडी डिग्री की पूर्व प्राचार्य मधुराका सक्सेना का कहना है कि अगर महिला शिक्षित और योग्य है तो उसे टिकट मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देखा गया है कि महिलाओं को तभी टिकट मिलता है जब आरक्षित सीट हो, लेकिन आरक्षण किसी भी क्षेत्र में उचित नहीं है, बल्कि योग्यता से पद का निर्धारण होना चाहिए।
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उत्तराखंड में पंचायतों के चुनाव में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इस पर महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। यही कारण है कि आज जिले के छह में से चार ब्लाक में महिला प्रमुख निर्वाचित हुईं हैं। इसमें भगवानपुर, रुड़की, खानपुर और बहादराबाद शामिल हैं, लेकिन बात जब विधानसभा चुनाव की आई तो राजनीतिक दलों ने महिलाओं को टिकट देने से परहेज किया। भाजपा की ओर से जिले में किसी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया गया है, जबकि बसपा ने एक सीट पर महिला को उम्मीदवार घोषित कर खानापूरी की है। अब कांग्रेस की ओर से जारी की जाने वाली सूची पर सभी की नजर है, हालांकि कम ही संभावना है कि इसमें जिले से किसी महिला को स्थान मिल सके। ऐसा नहीं है कि भाजपा, बसपा और कांग्रेस से महिला दावेदारों की कमी है। भाजपा में तो रुड़की से महिला जिलाध्यक्ष होने के बाद भी उनकी दावेदारी को दरकिनार कर दिया गया, जबकि हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुरेश राठौर को प्रत्याशी बनाया गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि राजनीतिक दलों की ओर से टिकट वितरण में आधी आबादी को नजरअंदाज किया गया है।
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सवाल पर रो पड़ीं कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष
महिला सशिक्तकरण और टिकट वितरण के सवाल पर कांग्रेस की महिला जिलाध्यक्ष रश्मि चौधरी तो रो पड़ीं। उनका कहना है कि मैने रुड़की से विधानसभा के लिए टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया। सभी दलों की ओर से मातृशक्ति का केवल उपयोग किया जाता है, लेकिन टिकट के समय मुंह फेर लिया जाता है। उनका कहना है कि 70 में से कम से कम 25 सीटों पर महिला प्रत्याशी जरूर होनी चाहिए।
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भाजपा जिलाध्यक्ष की सुनिए
भाजपा एक अनुशासित और लोकतांत्रिक पार्टी है। इसमें टिकट वितरण का कार्य संसदीय बोर्ड का है। तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए संसदीय बोर्ड टिकट के लिए उम्मीदवार तय करता है। संसदीय बोर्ड के निर्णय पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता है। पार्टी ने जिसे भी टिकट दिया है उसे जिताना कार्यकर्ताओं का कर्तव्य और दायित्व है।
.........कल्पना सैनी, जिलाध्यक्ष भाजपा
एसडी डिग्री की पूर्व प्राचार्य बोलीं
एसडी डिग्री की पूर्व प्राचार्य मधुराका सक्सेना का कहना है कि अगर महिला शिक्षित और योग्य है तो उसे टिकट मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देखा गया है कि महिलाओं को तभी टिकट मिलता है जब आरक्षित सीट हो, लेकिन आरक्षण किसी भी क्षेत्र में उचित नहीं है, बल्कि योग्यता से पद का निर्धारण होना चाहिए।