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वैक्सीन नहीं लगवाने वालों को देंगे होंगे सवालों के जवाब
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कोरोना वैक्सीन नहीं लगवाने वाले लोगों को अब स्वास्थ्य विभाग के सवालों के जवाब देने होंगे। हर घर दस्तक अभियान के तहत आशाएं घर-घर जाकर ऐसे लोगों को चिह्नित करेंगी, जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है। उनसे वैक्सीन नहीं लगवाने के कारण भी पूछे जाएंगे।
कोरोना महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 18 वर्ष से अधिक उम्र वालों का टीकाकरण शुरू किया था। बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को वैैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बावजूद शहर से लेकर देहात तक अब भी कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें वैक्सीन नहीं लग पाई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे लोगों को चिह्नित करने के लिए हर घर दस्तक अभियान शुरू किया है। इसके तहत विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को ड्यूूटी पर लगाया है। आशाएं हर घर जाकर दस्तक देंगी और परिवार के सदस्यों से विभाग की ओर से मिला एक प्रपत्र भरवाएंगी।
इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, महिला-पुरुष की संख्या, 18 वर्ष से ज्यादा के लोगों की संख्या, घर में यदि गर्भवती महिला है तो उसकी जानकारी, बच्चों की संख्या और उन्हें लगाए गए टीकों की जानकारी पूछी जाएगी। साथ ही घर में पात्र लोगों ने कोरोना की कौन सी वैक्सीन लगवाई है। पहली डोज लगी है या दूसरी भी लग चुकी है। यदि वैक्सीन नहीं लगवाई है तो इसका कारण भी बताना होगा। सेशन साइट इंचार्ज रामकेश गुप्ता ने बताया कि हर घर दस्तक सर्वेक्षण कोरोना वैक्सीनेशन की स्थिति जानने के लिए किया जा रहा है। साथ ही यदि कोई किन्हीं कारणों से वैक्सीन लगवाने से रह गया हो तो उसे वैक्सीन लग जाए। इसके अलावा ऐसे कारणों को भी पता करना है, जिनकी वजह से लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं।
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बच्चों के टीकाकरण की स्थिति भी होगी स्पष्ट
स्वास्थ्य विभाग के हर घर दस्तक अभियान के तहत जीरो से एक वर्ष वाले बच्चों की संख्या और एक से दो साल वाले बच्चों की संख्या भी पूछी जानी है। साथ ही बच्चों को बीसीजी, पेंटा-एक, पेंटा-दो, पेंटा-तीन एमआर-एक और एमआर बूस्टर इंजेक्शन लगने के बारे में पूछा जाएगा। ऐसे में इस सर्वेक्षण से जहां कोरोना वैक्सीनेशन की जानकारी मिलेगी तो छोटे बच्चों को लगने वाले टीकों की भी स्थिति स्पष्ट होगी।
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कोरोना महामारी पर नियंत्रण पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 18 वर्ष से अधिक उम्र वालों का टीकाकरण शुरू किया था। बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को वैैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके बावजूद शहर से लेकर देहात तक अब भी कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें वैक्सीन नहीं लग पाई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे लोगों को चिह्नित करने के लिए हर घर दस्तक अभियान शुरू किया है। इसके तहत विभाग ने आशा कार्यकर्ताओं को ड्यूूटी पर लगाया है। आशाएं हर घर जाकर दस्तक देंगी और परिवार के सदस्यों से विभाग की ओर से मिला एक प्रपत्र भरवाएंगी।
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इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, महिला-पुरुष की संख्या, 18 वर्ष से ज्यादा के लोगों की संख्या, घर में यदि गर्भवती महिला है तो उसकी जानकारी, बच्चों की संख्या और उन्हें लगाए गए टीकों की जानकारी पूछी जाएगी। साथ ही घर में पात्र लोगों ने कोरोना की कौन सी वैक्सीन लगवाई है। पहली डोज लगी है या दूसरी भी लग चुकी है। यदि वैक्सीन नहीं लगवाई है तो इसका कारण भी बताना होगा। सेशन साइट इंचार्ज रामकेश गुप्ता ने बताया कि हर घर दस्तक सर्वेक्षण कोरोना वैक्सीनेशन की स्थिति जानने के लिए किया जा रहा है। साथ ही यदि कोई किन्हीं कारणों से वैक्सीन लगवाने से रह गया हो तो उसे वैक्सीन लग जाए। इसके अलावा ऐसे कारणों को भी पता करना है, जिनकी वजह से लोग वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं।
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बच्चों के टीकाकरण की स्थिति भी होगी स्पष्ट
स्वास्थ्य विभाग के हर घर दस्तक अभियान के तहत जीरो से एक वर्ष वाले बच्चों की संख्या और एक से दो साल वाले बच्चों की संख्या भी पूछी जानी है। साथ ही बच्चों को बीसीजी, पेंटा-एक, पेंटा-दो, पेंटा-तीन एमआर-एक और एमआर बूस्टर इंजेक्शन लगने के बारे में पूछा जाएगा। ऐसे में इस सर्वेक्षण से जहां कोरोना वैक्सीनेशन की जानकारी मिलेगी तो छोटे बच्चों को लगने वाले टीकों की भी स्थिति स्पष्ट होगी।