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इस बार सिद्ध योग में मनाई जाएगी बसंत पंचमी
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इस बार पांच फरवरी को बसंत पंचमी का त्योहार सिद्धि योग में मनाया जाएगा। खास बात यह है कि इस बार यह योग विद्यार्थियों, साधकों, अभिनय और कला व संगीत से जुड़े लोगों के लिए खास रहेगा। वहीं इस दिन पूजन के लिए शुभ समय सुबह 7:05 से दोपहर 12:40 तक रहेगा। इस दिन को सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। इस कारण इस दिन पीला कपड़ा, मिष्ठान, पीले रंग से पूजा करने से सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
शास्त्रों के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आम जनमानस के अलावा विद्यार्थी, अभिनय, कला, संगीत आदि से जुड़े लोगों को लिए भी खास होता है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा करने से वाक सिद्धि प्राप्त होती है। इस दिन माता सरस्वती का पीले पुष्प, पीले मिष्ठान, पीले वस्त्र, पीले फलों से पूजन करना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त के किए जा सकते हैं। सरस्वती के प्रकट उत्सव के कारण भी यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। आईआईटी स्थित सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि होलिका दहन के स्थल पर बसंत पंचमी के दिन ही उपले रखे जाते हैं। इस दिन से होलिका दहन के लिए लकड़ी इत्यादि का संचय किया जाता है। पूरे विधि विधान से इस दिन होलिका का ध्वज खड़ा किया जाता है।
पीली वस्तुओं का अधिक उपयोग
बसंत पंचमी पर वसंत ऋतु आरंभ होने से सरसों आदि के पीले फूलों से धरती पीली नजर आती है। साथ ही पीला रंग समृद्धि ऊर्जा और प्रकाश का भी प्रतीक होता है। पीले रंग से तनाव दूर होता है और दिमाग सक्रिय रहता है। इसलिए पीली चीजों का महत्व अधिक होता है।
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शास्त्रों के अनुसार, माघ शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन आम जनमानस के अलावा विद्यार्थी, अभिनय, कला, संगीत आदि से जुड़े लोगों को लिए भी खास होता है। इस दिन माता सरस्वती की पूजा करने से वाक सिद्धि प्राप्त होती है। इस दिन माता सरस्वती का पीले पुष्प, पीले मिष्ठान, पीले वस्त्र, पीले फलों से पूजन करना चाहिए। बसंत पंचमी के दिन मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत, विवाह आदि मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त के किए जा सकते हैं। सरस्वती के प्रकट उत्सव के कारण भी यह दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। आईआईटी स्थित सरस्वती मंदिर के आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि होलिका दहन के स्थल पर बसंत पंचमी के दिन ही उपले रखे जाते हैं। इस दिन से होलिका दहन के लिए लकड़ी इत्यादि का संचय किया जाता है। पूरे विधि विधान से इस दिन होलिका का ध्वज खड़ा किया जाता है।
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पीली वस्तुओं का अधिक उपयोग
बसंत पंचमी पर वसंत ऋतु आरंभ होने से सरसों आदि के पीले फूलों से धरती पीली नजर आती है। साथ ही पीला रंग समृद्धि ऊर्जा और प्रकाश का भी प्रतीक होता है। पीले रंग से तनाव दूर होता है और दिमाग सक्रिय रहता है। इसलिए पीली चीजों का महत्व अधिक होता है।
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