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राजा दशरथ की आज्ञा, राम को 14 वर्ष का वनवास

Sun, 10 Oct 2021 12:01 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 12:01 AM IST
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The scene of Ram's exile stunned everyone
रुड़की सुभाष नगर स्थित गढ़वाल सभा में आयोजित रामलीला में मंचन करते कलाकार। - फोटो : ROORKEE
रुड़की। गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित श्रीराम लीला के पांचवें दिन राजा दशरथ द्वारा श्रीराम को राजतिलक देने की घोषणा और मंथरा द्वारा कैकेयी को बहका कर रानी कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश करना आदि दृश्यों का मंचन किया गया।
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राम वनवास के दृश्य ने सबको भावविभोर कर दिया
रामलीला में राजा दशरथ से दो वर मांगना, एक वर से भरत को अयोध्या का राज्य, दूसरे वर में राम को 14 वर्ष का वनवास, सीता और लक्ष्मण का राम के साथ वन गमन जाने की इच्छा व्यक्त करना और तीनों माताओं एवं राजा दशरथ से आज्ञा लेकर वन गमन का मंचन किया गया। दशरथ की भूमिका प्रेम दत्त गोदियाल, कैकेयी, कौशल्या और सुमित्रा की भूमिका विजय रावत, नंदकिशोर, आशीष रावत और राम लक्ष्मण सीता की भूमिका क्रमश: प्रेम जदली, अर्पण जोशी, प्रदीप कोटनाला और मंथरा, सुमंत की भूमिका मनोज पटवाल, तेजपाल पटवाल ने निभाई। रामलीला में मुख्य अतिथि सुरेंद्र कुमार पाल, पवन कुमार पाल, अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत, संयोजक मोहनलाल बहुगुणा, निर्देशक टीआर भट्ट, सचिव चंद्र मोहन जोशी आदि उपस्थित रहे।
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फोटो समाचार
सीता स्वयंवर के बाद किया राम बरात का स्वागत
लक्सर/खानपुर। लक्सर नगर में चल रही रामलीला में शुक्रवार को सीता के स्वयंवर में शिव का धनुष तोड़ने के बाद राजा जनक के राज्य में राम बरात का स्वागत किया गया। वहीं राजा जनक और रानी सुनैना ने सीता का कन्यादान किया।
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शुक्रवार को शाम को आयोजित मंचन में राजा जनक ने राजा दशरथ के राज्य में संदेश भेजकर राम बरात लेकर आने का न्योता भिजवाया। राजा जनक ने अपने राज्य में धूमधाम के साथ राम बरात का स्वागत किया। इसके बाद भगवान राम और सीता के फेरे हुए और बाद में नगर के जनक बने कुंवर सिंह और उनकी पत्नी धर्मवती ने सुनैना का किरदार निभाकर माता सीता का कन्यादान किया। इसके बाद राजा जनक ने छह माह तक दशरथ को अपने राज्य में ही अतिथि बनाकर सेवा करने का मंचन किया। बाद में किसी तरह दशरथ राजा जनक से विदाई लेकर विदा हुए। यहीं पर मंचन का समापन हो जाता है।
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