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कंपनी के प्रबंधक से चौथ मांगने में दो धर गए
अमर उजाला ब्यूरो मंगलौर
Updated Wed, 22 Mar 2017 09:34 PM IST
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पुलिस ने उजाला कंपनी के प्रबंधक से चौथ मांगने के मामले में नामजद दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी कर पुलिस ने घटना का खुलासा कर दिया है। धरे गए दोनों आरोपियों ने पटियाला जेल में बंद कुख्यात अमित भूरा के नाम से 50 लाख रुपये की चौथ मांगी थी। पीड़ित की तहरीर के बाद से केस दर्ज कर पुलिस मामले की जांच पड़ताल कर रही थी। मामले का सूत्रधार यूपी का एक बदमाश विश्वास उर्फ विशू को बताया जो रहा है। पुलिस ने अमित भूरा और विश्वास को आरोपी बनाया है। पकड़े गए आरोपियों से दो तमंचे, पांच कारतूस, एक खोखा, मोटरसाइकिल, आईटेन कार और मोबाइल भी बरामद किए गए हैं।
मंगलौर कोतवाली में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि पटियाला जेल में बंद कुख्यात अमित मलिक उर्फ भूरा के नाम से मुुड़ियाकी क्षेत्र स्थित उजाला नील फैक्टरी के प्रबंधक से 50 लाख रुपये रंगदारी मांगी गई थी। बाद में मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने प्रबंधक को धमकाया और आतंकित करने के लिए हवाई फायरिंग भी की। प्रबंधक साबू जॉन ने लिटिल और आशीष नामक दो बदमाशों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद एसपी देहात ने पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। पुलिस ने मोहम्मदपुर झाल से दो बदमाशों मोहम्मदपुर जट निवासी करण उर्फ लिटिल तथा दहियाकी निवासी आशीष पुत्र अशोक को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से तीन मोबाइल, एक बाइक और घटना में प्रयुक्त कार बरामद की गई है। बकौल एसपी देहात दोनों बदमाशों ने यूपी के कुख्यात विश्वास उर्फ विशू के कहने पर प्रबंधक से अमित उर्फ भूरा के नाम पर चौथ मांगी थी तथा प्रबंधक के बात नहीं मानने पर उसे धमकाने के लिए फायरिंग की थी। एसपी का कहना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस मामले में अमित मलिक उर्फ भूरा और विश्वास उर्फ विशू की भूमिका की जांच कर रही है। दोनों आरोपी फिलहाल अलग अलग जेलों में बंद हैं। पत्रकारवार्ता के दौरान सीओ परीक्षित कुमार, एसएचओ जवाहर लाल मौजूद थे।
ये है बदमाशों को पकड़ने वाली पुलिस टीम
एसएचओ जवाहर लाल, सीआईयू के रणवीर चौहान, एसआई सुखपाल मान, बाबू खां, हरबीर, संदीप, सुधीर, पकंज, अरुण, विनोद, मनवीर, शेखर, रविन्द्र, महिपाल, नितिन, व लाल सिंह।
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अपराधियों के लिए मुफीद बनीं उत्तराखंड की जेलें
उत्तराखंड की जेल कुख्यात अपराधियों के लिए मुफीद साबित हो रही हैं। जेल में रहकर आसानी से वो मोबाइल और सोशल मीडिया से अपना गिरोह संचालित कर रहे हैं। ताजातरीन मामला अल्मोड़ा जेल में बंद यूपी के कुख्यात विश्वास उर्फ विशू से जुड़ा है। उसने लिटिल और आशीष के साथ रुड़की जेल में रहने के दौरान नील कंपनी उजाला के प्रबंधक से चौथ मांगने की योजना बनाई थी। विश्वास ने ही 19 मार्च को अल्मोड़ा जेल से फोन कर दोनों को चौथ मांगने के लिए प्रबंधक के पास भेजा था, जिसमें अमित भूरा का नाम भी आ रहा है। पुलिस दोनों ही कुख्यातों की भूमिका की जांच कर रही है। विश्वास पर हत्या, लूट, डकैती और हत्या के प्रयास के चार मुकदमे दर्ज है, जबकि कुख्यात अमित उर्फ भूरा पर 47 मुकदमे हैं।
बदमाशों के गठजोड़ के सामने जेल प्रशासन और पुलिस अधिकारी बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। नील कंपनी उजाला के प्रबंधक साबू जॉन से चौथ मांगने की योजना भी जेल में ही तैयार हुई। वर्ष 2014 में करण उर्फ लिटिल और आशीष मारपीट व हत्या के प्रयास के एक मामले में रुड़की जेल में बंद थे, जहां उनकी मुलाकात मंसूरपुर मुजफ्फरनगर निवासी अपराधी विश्वास उर्फ विशू पुत्र देवेंद्र सिंह से हुई। विश्वास लिटिल के पिता अविनाश की मुहंबोली मौसी का पुत्र है। इस रिश्तेदारी के अलावा विश्वास ने अविनाश के साथ मिलकर वर्ष 2012 में मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में एक ग्रामीण की हत्या भी की थी।
रुड़की जेल में विश्वास ने लिटिल व आशीष को प्रबंधक से चौथ मांगनें के लिए राजी किया था। जेल से छूटने पर भी लिटिल मोबाइल से विश्वास के संपर्क में रहा। लिटिल का साथी आशीष उजाला कंपनी को सामान सप्लाई करने वाली एक कंपनी से जुड़ा हुआ है। इससे उसका उजाला कंपनी में आना जाना लगा रहता था। उसने ही प्रबंधक का फोन नंबर बदमाशों को उपलब्ध कराया और कई जानकारियां भी दीं। पुलिस के मुताबिक 19 मार्च को अल्मोड़ा जेल से विश्वास ने फोन कर दोनों को प्रबंधक से चौथ मांगने के लिए भेजा था। गौरतलब है कि पकड़े गए लिटिल का पिता अविनाश उर्फ मुन्नू खुद अपराधी रह चुका है। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा का कहना है कि पुलिस विश्वास व अमित उर्फ भूरा के कनेक्शन खंगाल रही है।
मंगलौर कोतवाली में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी देहात मणिकांत मिश्रा ने बताया कि पटियाला जेल में बंद कुख्यात अमित मलिक उर्फ भूरा के नाम से मुुड़ियाकी क्षेत्र स्थित उजाला नील फैक्टरी के प्रबंधक से 50 लाख रुपये रंगदारी मांगी गई थी। बाद में मोटरसाइकिल सवार दो बदमाशों ने प्रबंधक को धमकाया और आतंकित करने के लिए हवाई फायरिंग भी की। प्रबंधक साबू जॉन ने लिटिल और आशीष नामक दो बदमाशों को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद एसपी देहात ने पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। पुलिस ने मोहम्मदपुर झाल से दो बदमाशों मोहम्मदपुर जट निवासी करण उर्फ लिटिल तथा दहियाकी निवासी आशीष पुत्र अशोक को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से तीन मोबाइल, एक बाइक और घटना में प्रयुक्त कार बरामद की गई है। बकौल एसपी देहात दोनों बदमाशों ने यूपी के कुख्यात विश्वास उर्फ विशू के कहने पर प्रबंधक से अमित उर्फ भूरा के नाम पर चौथ मांगी थी तथा प्रबंधक के बात नहीं मानने पर उसे धमकाने के लिए फायरिंग की थी। एसपी का कहना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस मामले में अमित मलिक उर्फ भूरा और विश्वास उर्फ विशू की भूमिका की जांच कर रही है। दोनों आरोपी फिलहाल अलग अलग जेलों में बंद हैं। पत्रकारवार्ता के दौरान सीओ परीक्षित कुमार, एसएचओ जवाहर लाल मौजूद थे।
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ये है बदमाशों को पकड़ने वाली पुलिस टीम
एसएचओ जवाहर लाल, सीआईयू के रणवीर चौहान, एसआई सुखपाल मान, बाबू खां, हरबीर, संदीप, सुधीर, पकंज, अरुण, विनोद, मनवीर, शेखर, रविन्द्र, महिपाल, नितिन, व लाल सिंह।
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उत्तराखंड की जेल कुख्यात अपराधियों के लिए मुफीद साबित हो रही हैं। जेल में रहकर आसानी से वो मोबाइल और सोशल मीडिया से अपना गिरोह संचालित कर रहे हैं। ताजातरीन मामला अल्मोड़ा जेल में बंद यूपी के कुख्यात विश्वास उर्फ विशू से जुड़ा है। उसने लिटिल और आशीष के साथ रुड़की जेल में रहने के दौरान नील कंपनी उजाला के प्रबंधक से चौथ मांगने की योजना बनाई थी। विश्वास ने ही 19 मार्च को अल्मोड़ा जेल से फोन कर दोनों को चौथ मांगने के लिए प्रबंधक के पास भेजा था, जिसमें अमित भूरा का नाम भी आ रहा है। पुलिस दोनों ही कुख्यातों की भूमिका की जांच कर रही है। विश्वास पर हत्या, लूट, डकैती और हत्या के प्रयास के चार मुकदमे दर्ज है, जबकि कुख्यात अमित उर्फ भूरा पर 47 मुकदमे हैं।
बदमाशों के गठजोड़ के सामने जेल प्रशासन और पुलिस अधिकारी बेबस और लाचार नजर आ रहे हैं। नील कंपनी उजाला के प्रबंधक साबू जॉन से चौथ मांगने की योजना भी जेल में ही तैयार हुई। वर्ष 2014 में करण उर्फ लिटिल और आशीष मारपीट व हत्या के प्रयास के एक मामले में रुड़की जेल में बंद थे, जहां उनकी मुलाकात मंसूरपुर मुजफ्फरनगर निवासी अपराधी विश्वास उर्फ विशू पुत्र देवेंद्र सिंह से हुई। विश्वास लिटिल के पिता अविनाश की मुहंबोली मौसी का पुत्र है। इस रिश्तेदारी के अलावा विश्वास ने अविनाश के साथ मिलकर वर्ष 2012 में मंगलौर कोतवाली क्षेत्र में एक ग्रामीण की हत्या भी की थी।
रुड़की जेल में विश्वास ने लिटिल व आशीष को प्रबंधक से चौथ मांगनें के लिए राजी किया था। जेल से छूटने पर भी लिटिल मोबाइल से विश्वास के संपर्क में रहा। लिटिल का साथी आशीष उजाला कंपनी को सामान सप्लाई करने वाली एक कंपनी से जुड़ा हुआ है। इससे उसका उजाला कंपनी में आना जाना लगा रहता था। उसने ही प्रबंधक का फोन नंबर बदमाशों को उपलब्ध कराया और कई जानकारियां भी दीं। पुलिस के मुताबिक 19 मार्च को अल्मोड़ा जेल से विश्वास ने फोन कर दोनों को प्रबंधक से चौथ मांगने के लिए भेजा था। गौरतलब है कि पकड़े गए लिटिल का पिता अविनाश उर्फ मुन्नू खुद अपराधी रह चुका है। एसपी देहात मणिकांत मिश्रा का कहना है कि पुलिस विश्वास व अमित उर्फ भूरा के कनेक्शन खंगाल रही है।