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%्रोक एंड ट्रेस% सॉफ्टवेयर रोकेगा शराब की %हेराफेरी%
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रुड़की। शराब की हेराफेरी और तस्करी रोकने के लिए पहली अप्रैल से आबकारी विभाग की ओर से ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली शुरू की जा रही है। विभाग की ओर से तैयार ट्रैक एंड ट्रेस सॉफ्टवेयर के जरिये शराब से भरे वाहनों के रास्ता बदलने से लेकर रुकने तक की पूरी जानकारी मिलेगी। अगर कहीं कोई गड़बड़ी की गई तो सॉफ्टवेयर तुरंत इसकी जानकारी विभाग को देगा। माना जा रहा है कि इस प्रणाली के लागू होने से विभाग को शराब की हेराफेरी रोकने में बड़ी मदद मिलेगी।
आबकारी विभाग की ओर से ट्रैस एंड ट्रेक प्रणाली पहली अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसको फैक्टरी से गोदाम तक शराब लाने वाले जीपीएस वाहनों से जोड़ा जाएगा। यह सॉफ्टवेयर विभाग के कंप्यूटर से भी जुड़ा होगा। इससे विभागीय अधिकारियों को ऑफिस में बैठे पता चल सकेगा कि किस समय कौन सी गाड़ी, किस कंपनी से शराब लेकर निकली है और किस रास्ते से जा रही है। अगर किसी गड़बड़ी का पता चलता है तो विभाग की टीम तुरंत मौके पर जाएगी और जांच करेगी। इसके अलावा विभाग के कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर के साथ एक क्यूआर कोड भी दर्ज किया जाएगा। शराब जब गोदाम में पहुंचेगी तो ठेकों पर भेजने से पहले हर बोतल पर एक क्यूआर कोड भी लगाया जाएगा। विभाग की ओर से शराब की दुकानों पर जांच के दौरान कोड स्कैन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि किसी दूसरी दुकान की शराब इस दुकान पर तो नहीं बिक रही है। संवाद
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ठेके संचालकों की मनमानी और हेराफेरी पर लगेगी रोक
विभाग को कई बार शिकायत की जा चुकी है कि कुछ ठेकेदार दूसरे प्रदेश की शराब उत्तराखंड के नाम से बेच रहे हैं। इन बोतलों पर उत्तराखंड लिखा हुआ होता है जबकि यह शराब बाहर की होती है। शिकायत की जाती है कि ये लोग बोतल और हॉफ में शराब की हेराफेरी करते हैं। विभाग की ओर से क्यूआर कोड लगाए जाने से ऐसे ठेकेदारों की मनमानी और हेराफेरी पर लगाम लगेगा।
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एक अप्रैल से जिलेभर में ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली शुरू हो जाएगी। यह सॉफ्टवेयर जीपीएस लगे वाहनों और विभाग के कंप्यूटर से जुड़ा होगा। इससे पता चल सकेगा कि कौन सी कंपनी से गाड़ी शराब लेकर किस समय, किस रास्ते से जा रही है और कहां रुकी है। इससे शराब तस्करी और हेराफेरी पर रोक लगेगी।
-पवन कुमार, जिला आबकारी निरीक्षक, हरिद्वार
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आबकारी विभाग की ओर से ट्रैस एंड ट्रेक प्रणाली पहली अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसको फैक्टरी से गोदाम तक शराब लाने वाले जीपीएस वाहनों से जोड़ा जाएगा। यह सॉफ्टवेयर विभाग के कंप्यूटर से भी जुड़ा होगा। इससे विभागीय अधिकारियों को ऑफिस में बैठे पता चल सकेगा कि किस समय कौन सी गाड़ी, किस कंपनी से शराब लेकर निकली है और किस रास्ते से जा रही है। अगर किसी गड़बड़ी का पता चलता है तो विभाग की टीम तुरंत मौके पर जाएगी और जांच करेगी। इसके अलावा विभाग के कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर के साथ एक क्यूआर कोड भी दर्ज किया जाएगा। शराब जब गोदाम में पहुंचेगी तो ठेकों पर भेजने से पहले हर बोतल पर एक क्यूआर कोड भी लगाया जाएगा। विभाग की ओर से शराब की दुकानों पर जांच के दौरान कोड स्कैन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि किसी दूसरी दुकान की शराब इस दुकान पर तो नहीं बिक रही है। संवाद
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ठेके संचालकों की मनमानी और हेराफेरी पर लगेगी रोक
विभाग को कई बार शिकायत की जा चुकी है कि कुछ ठेकेदार दूसरे प्रदेश की शराब उत्तराखंड के नाम से बेच रहे हैं। इन बोतलों पर उत्तराखंड लिखा हुआ होता है जबकि यह शराब बाहर की होती है। शिकायत की जाती है कि ये लोग बोतल और हॉफ में शराब की हेराफेरी करते हैं। विभाग की ओर से क्यूआर कोड लगाए जाने से ऐसे ठेकेदारों की मनमानी और हेराफेरी पर लगाम लगेगा।
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एक अप्रैल से जिलेभर में ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली शुरू हो जाएगी। यह सॉफ्टवेयर जीपीएस लगे वाहनों और विभाग के कंप्यूटर से जुड़ा होगा। इससे पता चल सकेगा कि कौन सी कंपनी से गाड़ी शराब लेकर किस समय, किस रास्ते से जा रही है और कहां रुकी है। इससे शराब तस्करी और हेराफेरी पर रोक लगेगी।
-पवन कुमार, जिला आबकारी निरीक्षक, हरिद्वार