{"_id":"610ec57c8ebc3e74ac57229a","slug":"salary-of-five-employees-found-absent-withheld-roorkee-news-drn3868516108","type":"story","status":"publish","title_hn":"समिति में गैरहाजिर मिले पांच कर्मचारी, वेतन रोका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समिति में गैरहाजिर मिले पांच कर्मचारी, वेतन रोका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लक्सर/खानपुर। लक्सर गन्ना समिति की ओर से किसान को ऋण सीमा से अधिक खाद देने के मामले की जांच करने पहुंचे डीसीओ को पांच कर्मचारी गैरहाजिर मिले। डीसीओ ने पांचों का वेतन रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब किया है। वहीं, किसान का ऋण मंजूर करने वाले कर्मचारियों पर भी विभाग कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
लक्सर गन्ना समिति सदस्य किसानों को उनके गन्ने के बेसिक कोटे के आधार पर खाद का ऋण देती है। आरोप है कि वर्ष 2014 से 2017 तक समिति के तत्कालीन सुपरवाइजर और सचिव ने मोहनावाला के एक किसान को पांच लाख की खाद उधार दी थी जबकि किसान के ऋण की अधिकतम सीमा 80 हजार रुपये थी। बताया जाता है कि वर्ष 2017 के बाद किसान ने समिति के माध्यम से चीनी मिल को गन्ने की आपूर्ति भी बंद कर दी। इसके चलते समिति किसान से अभी तक ऋण की रकम भी वसूल नहीं कर सकी है। शिकायत पर डीसीओ शैलेंद्र सिंह शुक्रवार को जांच करने समिति कार्यालय पहुंचे। उन्होंने हाजिरी रजिस्टर देखा तो लिपिक परीक्षित, विजय, दिनेश, पवन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रीता गैरहाजिर मिले। डीसीओ ने रजिस्टर में पांचों कर्मचारियों की गैरहाजिरी दर्ज कर 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। स्पष्टीकरण मिलने तक समिति सचिव को पांचों कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। डीसीओ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जांच में किसान को सीमा से अधिक ऋण देने की पुष्टि हुई है। उस समय किस सुपरवाइजर ने ऋण की सिफारिश की थी और किस अधिकारी ने ऋण पास किया था, इसकी जानकारी समिति सचिव से मांगी गई है। जानकारी मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। यदि किसान से वसूली नहीं होती है तो इसकी रिकवरी तत्कालीन सुपरवाइजर और समिति सचिव से की जाएगी।
विज्ञापन
लक्सर गन्ना समिति सदस्य किसानों को उनके गन्ने के बेसिक कोटे के आधार पर खाद का ऋण देती है। आरोप है कि वर्ष 2014 से 2017 तक समिति के तत्कालीन सुपरवाइजर और सचिव ने मोहनावाला के एक किसान को पांच लाख की खाद उधार दी थी जबकि किसान के ऋण की अधिकतम सीमा 80 हजार रुपये थी। बताया जाता है कि वर्ष 2017 के बाद किसान ने समिति के माध्यम से चीनी मिल को गन्ने की आपूर्ति भी बंद कर दी। इसके चलते समिति किसान से अभी तक ऋण की रकम भी वसूल नहीं कर सकी है। शिकायत पर डीसीओ शैलेंद्र सिंह शुक्रवार को जांच करने समिति कार्यालय पहुंचे। उन्होंने हाजिरी रजिस्टर देखा तो लिपिक परीक्षित, विजय, दिनेश, पवन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रीता गैरहाजिर मिले। डीसीओ ने रजिस्टर में पांचों कर्मचारियों की गैरहाजिरी दर्ज कर 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण तलब किया है। स्पष्टीकरण मिलने तक समिति सचिव को पांचों कर्मचारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। डीसीओ शैलेंद्र सिंह ने बताया कि जांच में किसान को सीमा से अधिक ऋण देने की पुष्टि हुई है। उस समय किस सुपरवाइजर ने ऋण की सिफारिश की थी और किस अधिकारी ने ऋण पास किया था, इसकी जानकारी समिति सचिव से मांगी गई है। जानकारी मिलने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। यदि किसान से वसूली नहीं होती है तो इसकी रिकवरी तत्कालीन सुपरवाइजर और समिति सचिव से की जाएगी।
विज्ञापन