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राइस मिल का गोदाम और मकान सील
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:29 PM IST
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प्रशासन की टीम राशन के बोरों को बरामद करते हुए।
- फोटो : amarujala
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राशन की कालाबाजारी रुकने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की टीम ने सस्ते गल्ले की दुकानों से लाए जा रहे सरकारी राशन(चावल) के 115 बोरे पकड़ लिए जिन्हें प्रशासन ने अपने कब्जे में लेकर राइस मिल का गोदाम और मकान सील कर दिया।
बृहस्पतिवार को भी राशन डीलरों से लाकर राइस मिल में पहुंचाया जा रहा सररकारी राशन के 115 बोरे पकड़ लिए गए। दरअसल, एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान को सूचना मिली कि एक राइस मिल में सरकारी राशन पहुंचाया जा रहा है। सूचना मिलने पर एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने प्रशासन की टीम के साथ नन्हेड़ा के पास सरकारी राशन के 50 बोरों से भरी मैक्स को घेरकर पकड़ लिया। मैक्स चालक ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह नन्हेड़ा के मकान में राशन ले जा रहा था। इसके बाद यहां से राशन को एक राइस मिल के गोदाम में भेजा जाता है जिस पर एएसडीएम के साथ चालक की ओर से बताए गए मकान पर छापा मारा गया तो वहां एक मकान में 65 बोरे राशन का भंडारण किया हुआ मिला। मौके पर पुलिस को बुलवाकर मकान के राशन से भरे कमरे को सील कर दिया गया। यहां कार्रवाई करने के बाद एएसडीएम टीम के साथ किशनपुर स्थित राइस मिल पर पहुंचे। उन्होंने यहां जांच की तो गोदाम में बड़ी संख्या में सरकारी राशन के बोरे पड़े मिलेे। एसडीएम ने तहसीलदार मंजीत सिंह गिल को भेजकर मिल के गोदाम को भी सील कर दिया। पकड़ी गई मैक्स को पुलिस की सुपुर्दगी और राशन को एसएमआई के गोदाम में रखवा दिया गया। एएसडीएम का कहना है कि अब खाद्य आपूर्ति विभाग को जांच दी गई है। जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी पकड़े गए मामले
ऐसा नहीं कि राशन की कालाबाजारी का यह कोई पहला मामला है। इससे पहले भी अनेक मामले पकड़े गए हैं, लेकिन आज तक एक भी मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। जिससे यह नहीं मालूम चल सका कि राशन का असल माफिया कौन है। शहर में ही पिछले महीनों सिविल लाइंस में डीलर की दुकान से ही राशन की कालाबाजारी का मामला पकड़ा गया था। इससे पहले नगला कोयल के राशन डीलर की ओर से सरकारी राशन को मंगलौर क्षेत्र में कालाबाजारी होते हुए पकड़ लिया गया था। भगवानपुर के सिकंदरपुर गांव में भी एक वाहन से सरकारी राशन पकड़ा गया था। लक्सर में भी कई मामले राशन की कालाबाजरी के पकड़े जा चुके हैं, लेकिन गंभीर बात तो यह है कि प्रशासन एवं खाद्य आपूर्ति विभाग मुकदमा दर्ज कराकर एक तरफ हो जाता है।
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गोदामों से ही शुरू हो जाती है कालाबाजारी
राशन की कालाजारी गोदामों से ही शुरू हो जाती है, जो दुकानों तक पहुंच जाती है। इस खेल को माफिया एवं डीलर बड़े शातिराने अंदाज में खेलते हैं। डीलर गोदाम से वाहन में राशन लादकर अलग रूट से निकल जाते हैं और चालक को माफिया के पास भेज देते हैं। इस दौरान होने वाली कार्रवाई से बचने के लिए डीलर की ओर से टेंपो चालक को रूट चार्ट एवं गोदाम का गेट पास भी नहीं दिया जाता है। डीलर इन दस्तावेजों को अपने साथ लेकर निकल जाते हैं जिससे वाहन में पकड़ा गया सरकारी राशन किसका है, यह एक पहेली ही बनकर रह जाता है।
कालाबाजारी में सुर्खियों में रहता है नन्हेड़ा
राशन की कालाबाजारी के मामले में नन्हेड़ा गांव शुरू से ही सुर्खियों में रहता है। यहां एक नहीं कई मामले राशन के पकड़े जाते रहे। दरअसल, बताया जाता है कि आसपास के गांवों से घोड़ा बोगियों से राशन इकट्ठा कर लिया जाता है। बाद में बोरियां बदलकर बड़े गोदामों में भेज दिया जाता है जिससे अनेक मामले यहां पकड़े जा चुके हैं।
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बृहस्पतिवार को भी राशन डीलरों से लाकर राइस मिल में पहुंचाया जा रहा सररकारी राशन के 115 बोरे पकड़ लिए गए। दरअसल, एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान को सूचना मिली कि एक राइस मिल में सरकारी राशन पहुंचाया जा रहा है। सूचना मिलने पर एएसडीएम गोपाल सिंह चौहान ने प्रशासन की टीम के साथ नन्हेड़ा के पास सरकारी राशन के 50 बोरों से भरी मैक्स को घेरकर पकड़ लिया। मैक्स चालक ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह नन्हेड़ा के मकान में राशन ले जा रहा था। इसके बाद यहां से राशन को एक राइस मिल के गोदाम में भेजा जाता है जिस पर एएसडीएम के साथ चालक की ओर से बताए गए मकान पर छापा मारा गया तो वहां एक मकान में 65 बोरे राशन का भंडारण किया हुआ मिला। मौके पर पुलिस को बुलवाकर मकान के राशन से भरे कमरे को सील कर दिया गया। यहां कार्रवाई करने के बाद एएसडीएम टीम के साथ किशनपुर स्थित राइस मिल पर पहुंचे। उन्होंने यहां जांच की तो गोदाम में बड़ी संख्या में सरकारी राशन के बोरे पड़े मिलेे। एसडीएम ने तहसीलदार मंजीत सिंह गिल को भेजकर मिल के गोदाम को भी सील कर दिया। पकड़ी गई मैक्स को पुलिस की सुपुर्दगी और राशन को एसएमआई के गोदाम में रखवा दिया गया। एएसडीएम का कहना है कि अब खाद्य आपूर्ति विभाग को जांच दी गई है। जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पहले भी पकड़े गए मामले
ऐसा नहीं कि राशन की कालाबाजारी का यह कोई पहला मामला है। इससे पहले भी अनेक मामले पकड़े गए हैं, लेकिन आज तक एक भी मामले का खुलासा नहीं हो पाया है। जिससे यह नहीं मालूम चल सका कि राशन का असल माफिया कौन है। शहर में ही पिछले महीनों सिविल लाइंस में डीलर की दुकान से ही राशन की कालाबाजारी का मामला पकड़ा गया था। इससे पहले नगला कोयल के राशन डीलर की ओर से सरकारी राशन को मंगलौर क्षेत्र में कालाबाजारी होते हुए पकड़ लिया गया था। भगवानपुर के सिकंदरपुर गांव में भी एक वाहन से सरकारी राशन पकड़ा गया था। लक्सर में भी कई मामले राशन की कालाबाजरी के पकड़े जा चुके हैं, लेकिन गंभीर बात तो यह है कि प्रशासन एवं खाद्य आपूर्ति विभाग मुकदमा दर्ज कराकर एक तरफ हो जाता है।
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गोदामों से ही शुरू हो जाती है कालाबाजारी
राशन की कालाजारी गोदामों से ही शुरू हो जाती है, जो दुकानों तक पहुंच जाती है। इस खेल को माफिया एवं डीलर बड़े शातिराने अंदाज में खेलते हैं। डीलर गोदाम से वाहन में राशन लादकर अलग रूट से निकल जाते हैं और चालक को माफिया के पास भेज देते हैं। इस दौरान होने वाली कार्रवाई से बचने के लिए डीलर की ओर से टेंपो चालक को रूट चार्ट एवं गोदाम का गेट पास भी नहीं दिया जाता है। डीलर इन दस्तावेजों को अपने साथ लेकर निकल जाते हैं जिससे वाहन में पकड़ा गया सरकारी राशन किसका है, यह एक पहेली ही बनकर रह जाता है।
कालाबाजारी में सुर्खियों में रहता है नन्हेड़ा
राशन की कालाबाजारी के मामले में नन्हेड़ा गांव शुरू से ही सुर्खियों में रहता है। यहां एक नहीं कई मामले राशन के पकड़े जाते रहे। दरअसल, बताया जाता है कि आसपास के गांवों से घोड़ा बोगियों से राशन इकट्ठा कर लिया जाता है। बाद में बोरियां बदलकर बड़े गोदामों में भेज दिया जाता है जिससे अनेक मामले यहां पकड़े जा चुके हैं।