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भाईचारे से बजती थी राम नाम की तान और गूंजती थी अजान

Tue, 19 Apr 2022 08:12 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 19 Apr 2022 08:12 PM IST
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Ram's name used to ring with brotherhood and Ajan used to resonate
डाडा जलालपुर में बवाल के बाद भले ही सौहार्द और आपसी भाईचारे के बीच लकीर खिंच गई है लेकिन संभावित चिंताओं से इतर बुजुर्ग भी मन बना बैठे हैं कि वह क्षणों में बदले सदियों के रिश्ते पर कलंक नहीं लगने देंगे। दोनों समुदायों के बुजुर्गों के दिलों में बवाल से पहले और आज भी भाईचारे की राम नाम की तान व अजान की गूंज, गूंज रही है।
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डाडा जलालपुर गांव में शनिवार रात हनुमान जयंती की शोभायात्रा के दौरान हुए बवाल के बाद क्षणों में तब्दील हुए सदियों के भाईचारे की नब्ज भांपने मंगलवार को अमर उजाला की टीम गांव में सौहार्द की गलियां छानने पहुंची। वक्त करीब दो बजे। डाडा जलालपुर में काफी हद तक सन्नाटा पसरा था। गांव के प्रवेश द्वार से लेकर गांव में चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिसकर्मी देख एक बारगी लगा कि गांव में हुए बवाल से भाईचारे की दीवार दरक गई है। खैर मन में उमड़ते-घुमड़ते इन सवालों के बीच कदम गांव की गलियों में बढ़ने लगे।
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हिंदू-मुस्लिम की मिश्रित आबादी वाले गांव में एक खासियत देखने को मिली। वह थी एक दुकान पर बैठे बुजुर्ग। बस यही लगा कि इससे बेहतर स्थान क्या होगा, डाडा जलालपुर का दिल टटोलने के लिए। दुकान पर बैठे बुजुर्ग चर्चा में व्यस्त थे। अमर उजाला की टीम को देखकर वह कुछ देर के लिए खामोश हो गए। हालांकि परिचय दिया तो उन्होंने खड़े होकर अपनी कुर्सी छोड़ दी और बैठने की बात कही। बुजुर्गों के दिए सम्मान ने एक बात तो साफ जाहिर कर दी कि उनके बीच आज भी भाईचारे और सौहार्द की नींव नहीं हिली है। इसके बाद बुजुर्गों से गांव में हुए बवाल और माहौल पर बातों का सिलसिला शुरू हुआ।
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बुजुर्ग प्रेमचंद सैनी ने कहा कि मैं 75 साल का हो गया हूं। मुझे उस समय का समाज याद है तब गांव में आपसी भाईचारा बहुत बढ़िया था। जाति व धर्म हावी नहीं था। हर आदमी एक-दूसरे से प्रेम करता था लेकिन बवाल से चिंता इस बात की है कि इससे वर्षों पुराने भाईचारे में जहर घुल गया है। रमेशचंद कहते हैं कि हमारे समय में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही त्योहार एक साथ मिलकर मनाते थे। चाहे वह होली, दीवाली हो या ईद। नकली राम कहते हैं कि पहले अगर गांव में कोई लड़ाई या नाराज हो जाता था तो उसे सभी लोग मिलकर मना लेते थे। समय इतनी तेजी से बदल गया है कि युवा पीढ़ी इस तरफ ध्यान नहीं दे रही है।

ऋषिपाल कहते हैं कि पहले चौपाल सजती थी और हिंदू-मुस्लिम एक चौपाल पर बैठकर अपना सुखदुख एक-दूसरे से बांटते थे। नाथीराम कहते हैं कि बवाल ने युवा पीढ़ी के बीच एक गहरी खाई खोद दी है लेकिन अब इसे फिर से पाटने का काम किया जाएगा। भविष्य में ऐसा फिर न हो इसके लिए सभी को एकजुट करेंगे। लिहाजा, लंबी खिंच रही चर्चा से छिटककर टीम आगे गली में पहुंची। यहां पर रास्ते में बुजुर्ग गय्यूर अहमद से मुलाकात हुई। गय्यूर अहमद से बवाल और गांव के माहौल पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने होश संभाला है तब से गांव में भाईचारा कायम था। पहले कभी ऐसा विवाद नहीं हुआ था। बवाल ने युवा पीढ़ी कि दिलों में दूरी बढ़ा दी है। गांव के बुजुर्ग युवा पीढ़ी में भाईचारे की मिठास फिर से घोलने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। युवा पीढ़ी को गांव की गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखने के लिए समझाया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो।
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