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फर्जी आय प्रमाणपत्र मामले की अब पुलिस करेगी जांच
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मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने के लिए लगाए गए फर्जी आय प्रमाणपत्रों की जांच अब पुलिस करेगी। विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर पुलिस को शिकायत के साथ सौंप दी है। जिले में सभी ब्लॉकों से 200 से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र पकड़े गए थे।
मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना शुुरू की गई है। इसके तहत 10वीं में उत्तीर्ण छात्राओं को 60 फीसदी से ज्यादा अंक मिलने पर 10 से 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसमें वे छात्राएं आवेदन कर सकतीं हैं जिनका या तो बीपीएल कार्ड बना हो या फिर उनके अभिभावकों की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 81 हजार और शहरी क्षेत्र में एक लाख रुपये हो।
योजना के लाभ के लिए जिले में 1400 से अधिक छात्राओं ने आवेदन किया था। जब भगवानपुर ब्लॉक ने सिकरोढ़ा से आए आवेदनों के साथ लगे आय प्रमाणपत्रों की जांच की तो 14 प्रमाणपत्र फर्जी मिले। मामला जिले में पहुंचने पर अधिकारियों ने हर ब्लॉक से आए प्रमाणपत्रों की जांच करवाई तो पूरे जिले में 200 से अधिक प्रमाणपत्र फर्जी मिले। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
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विभाग ने मामले की जांच के लिए निदेशालय को भी पत्र भेज दिया था। साथ ही अब आगे की जांच के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। अब इस फर्जी आय प्रमाणपत्रों के मामले की जांच पुलिस करेगी। महिला कल्याण विभाग के डीपीओ अविनाश सिंह भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपने स्तर से जांच पूरी कर ली है। साथ ही आगे की जांच के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
योजना में फर्जीवाड़े का पुराना नाता
योजना का लाभ लेने के लिए पहले भी फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं। करीब दो साल पहले लक्सर ब्लॉक में ये फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस समय मार्कशीट में हेरफेर की बात सामने आई थी। इस दौरान सामने आया था कि योजना का लाभ लेने के लिए 60 प्रतिशत अंक की बाध्यता थी। ऐसे में कई बच्चों ने 60 से 80 फीसदी अंकों तक की फर्जी मार्कशीट बनवा ली थी।
पात्र लाभार्थियों की राशि पर भी लटकी तलवार
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत हर साल 1300 से 1500 छात्राएं आवेदन करती हैं। इसका लाभ उन्हें मिलता भी जरूर है। इस बार भी करीब 1400 छात्राओं ने आवेदन किया है। इसमें से 200 से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र मिलने के बाद विभाग ने राशि जारी नहीं की है। ऐसे में पात्रों को भी लाभ नहीं पा रहा है।
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मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना शुुरू की गई है। इसके तहत 10वीं में उत्तीर्ण छात्राओं को 60 फीसदी से ज्यादा अंक मिलने पर 10 से 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसमें वे छात्राएं आवेदन कर सकतीं हैं जिनका या तो बीपीएल कार्ड बना हो या फिर उनके अभिभावकों की वार्षिक आय ग्रामीण क्षेत्र में 81 हजार और शहरी क्षेत्र में एक लाख रुपये हो।
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योजना के लाभ के लिए जिले में 1400 से अधिक छात्राओं ने आवेदन किया था। जब भगवानपुर ब्लॉक ने सिकरोढ़ा से आए आवेदनों के साथ लगे आय प्रमाणपत्रों की जांच की तो 14 प्रमाणपत्र फर्जी मिले। मामला जिले में पहुंचने पर अधिकारियों ने हर ब्लॉक से आए प्रमाणपत्रों की जांच करवाई तो पूरे जिले में 200 से अधिक प्रमाणपत्र फर्जी मिले। इसके बाद विभाग में हड़कंप मच गया।
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विभाग ने मामले की जांच के लिए निदेशालय को भी पत्र भेज दिया था। साथ ही अब आगे की जांच के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। अब इस फर्जी आय प्रमाणपत्रों के मामले की जांच पुलिस करेगी। महिला कल्याण विभाग के डीपीओ अविनाश सिंह भदौरिया ने बताया कि विभाग ने अपने स्तर से जांच पूरी कर ली है। साथ ही आगे की जांच के लिए पुलिस को पत्र लिखा गया है। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
योजना में फर्जीवाड़े का पुराना नाता
योजना का लाभ लेने के लिए पहले भी फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं। करीब दो साल पहले लक्सर ब्लॉक में ये फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था। उस समय मार्कशीट में हेरफेर की बात सामने आई थी। इस दौरान सामने आया था कि योजना का लाभ लेने के लिए 60 प्रतिशत अंक की बाध्यता थी। ऐसे में कई बच्चों ने 60 से 80 फीसदी अंकों तक की फर्जी मार्कशीट बनवा ली थी।
पात्र लाभार्थियों की राशि पर भी लटकी तलवार
मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत हर साल 1300 से 1500 छात्राएं आवेदन करती हैं। इसका लाभ उन्हें मिलता भी जरूर है। इस बार भी करीब 1400 छात्राओं ने आवेदन किया है। इसमें से 200 से अधिक फर्जी प्रमाणपत्र मिलने के बाद विभाग ने राशि जारी नहीं की है। ऐसे में पात्रों को भी लाभ नहीं पा रहा है।