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विधायक बन रही नगर पंचायत के कार्यों में बाधा: सुबोध
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भगवानपुर में पत्रकारों से वार्ता करते जिला पंचायत सदस्य सुबोध राकेश व अन्य।
- फोटो : ROORKEE
जिला पंचायत सदस्य एवं नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुबोध राकेश ने नगर पंचायत कार्यालय पर प्रेसवार्ता कर विधायक पर नगर पंचायत के कार्यों में बाधा बनने का आरोप लगाया है। कहा कि विधायक को दूसरों के काम में अड़चन डालने के बजाय स्वयं को क्षेत्र में साबित करना चाहिए। क्षेत्र का जलभराव लोगों के लिए नासूर बन गया है, लेकिन विधायक का इधर कोई ध्यान नहीं है। बोर्ड बैठक की बाबत उनका कहना था कि बैठक में सभी नियमों का पालन किया गया था, मामले में वह डीएम से मिलेंगे।
राकेश परिवार के बीच सियासी कलह एक बार फिर बढ़ गई है। एक दिन पहले ही विधायक ममता राकेश ने प्रेसवार्ता कर नगर पंचायत अध्यक्ष पर विकास कार्यों में मनमानी का आरोप लगाया था। उन्होंने नगर पंचायत की बोर्ड बैठक को घर पर किए जाने की शिकायत डीएम से की थी। उनका कहना था कि वह नगर पंचायत की पदेन सदस्य हैं। इस लिहाज से उन्हें बैठक में शामिल होना था, लेकिन बैठक घर पर होने के चलते वह शामिल नहीं हो पाईं। उनकी बैठक रद्द किए जाने की मांग पर डीएम से बैठक रद्द करने के निर्देश दे दिए थे। वहीं अगले ही दिन पलटवार करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुबोध राकेश ने विधायक पर आरोप लगाया है कि वह नगर पंचायत के काम में बाधा बन रही हैं। कहा कि 23 जुुलाई को हुई बोर्ड बैठक सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए की गई है। बैठक से पहले ही सभी सभासदों को एजेंडे के साथ ही नोटिस जारी कर दिया गया था। यदि विधायक सहित अन्य किसी सदस्य को बैठक पर आपत्ति थी तो पहले ही बतानी चाहिए थी। इससे पहले भी दो बोर्ड बैठक नगर पंचायत कार्यालय में आयोजित हुई हैं। इनमें विधायक ने आना जरूरी नहीं समझा। कहा कि डीएम ने बोर्ड बैठक रद्द करने के निर्देश हैं, इसको लेकर डीएम से मिलकर वार्ता की जाएगी। कहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष सहेती देवी पर विधायक ने बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। इनका विधायक को जवाब देना होगा। कहा कि क्षेत्र में जलभराव की सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा सड़कें भी टूटी पड़ी हैं। इन पांच सालों में करीब 20 करोड़ की विधायक निधि आती है, लेकिन देहात के मोहितपुर, किशनपुर, सिसोना आदि गांवों में जलभराव की समस्या को लेकर कोई कार्य नहीं किया गया है।
विस चुनाव तो नहीं कलह का कारण
विधायक ममता राकेश और उनके देवर जिला पंचायत सदस्य सुबोध के बीच पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान रार खड़ी हो गई थी। उस दौरान ममता राकेश ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत लिया था और भाजपा के टिकट पर लड़े सुबोध राकेश चुनाव हार गए थे। उस दौरान से ही दोनों के बीच सियासी रार छिड़ी हुई है। हालांकि चुनाव के बाद मामला एकदम शांत हो गया था। अब करीब साढ़े चार साल बाद एक बार फिर दोनों में विवाद गहराने लगा है। दोनों में चल रही खींचतान को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
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राकेश परिवार के बीच सियासी कलह एक बार फिर बढ़ गई है। एक दिन पहले ही विधायक ममता राकेश ने प्रेसवार्ता कर नगर पंचायत अध्यक्ष पर विकास कार्यों में मनमानी का आरोप लगाया था। उन्होंने नगर पंचायत की बोर्ड बैठक को घर पर किए जाने की शिकायत डीएम से की थी। उनका कहना था कि वह नगर पंचायत की पदेन सदस्य हैं। इस लिहाज से उन्हें बैठक में शामिल होना था, लेकिन बैठक घर पर होने के चलते वह शामिल नहीं हो पाईं। उनकी बैठक रद्द किए जाने की मांग पर डीएम से बैठक रद्द करने के निर्देश दे दिए थे। वहीं अगले ही दिन पलटवार करते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि सुबोध राकेश ने विधायक पर आरोप लगाया है कि वह नगर पंचायत के काम में बाधा बन रही हैं। कहा कि 23 जुुलाई को हुई बोर्ड बैठक सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए की गई है। बैठक से पहले ही सभी सभासदों को एजेंडे के साथ ही नोटिस जारी कर दिया गया था। यदि विधायक सहित अन्य किसी सदस्य को बैठक पर आपत्ति थी तो पहले ही बतानी चाहिए थी। इससे पहले भी दो बोर्ड बैठक नगर पंचायत कार्यालय में आयोजित हुई हैं। इनमें विधायक ने आना जरूरी नहीं समझा। कहा कि डीएम ने बोर्ड बैठक रद्द करने के निर्देश हैं, इसको लेकर डीएम से मिलकर वार्ता की जाएगी। कहा कि नगर पंचायत अध्यक्ष सहेती देवी पर विधायक ने बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। इनका विधायक को जवाब देना होगा। कहा कि क्षेत्र में जलभराव की सबसे बड़ी समस्या है। इसके अलावा सड़कें भी टूटी पड़ी हैं। इन पांच सालों में करीब 20 करोड़ की विधायक निधि आती है, लेकिन देहात के मोहितपुर, किशनपुर, सिसोना आदि गांवों में जलभराव की समस्या को लेकर कोई कार्य नहीं किया गया है।
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विस चुनाव तो नहीं कलह का कारण
विधायक ममता राकेश और उनके देवर जिला पंचायत सदस्य सुबोध के बीच पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान रार खड़ी हो गई थी। उस दौरान ममता राकेश ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत लिया था और भाजपा के टिकट पर लड़े सुबोध राकेश चुनाव हार गए थे। उस दौरान से ही दोनों के बीच सियासी रार छिड़ी हुई है। हालांकि चुनाव के बाद मामला एकदम शांत हो गया था। अब करीब साढ़े चार साल बाद एक बार फिर दोनों में विवाद गहराने लगा है। दोनों में चल रही खींचतान को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
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