राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की के 43वें स्थापना दिवस पर आयोजित गोष्ठी में पानी को जीवन का आधार बताकर उसके संरक्षण पर जोर दिया गया। साथ ही पानी, मिट्टी और हवा पर अध्ययन करने वाली संस्थान से अपेक्षा की गई कि वह समय समय पर जीवन के इन तीनों अमूल्य रत्नों को आने वाली पीढ़ी के लिए संजोकर रखेंगी।
बुधवार को गोष्ठी में जाने माने पर्यावरणविद एवं हेस्को के संस्थापक पद्मश्री पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी समारोह के मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के सोसायटी कक्ष में दीप जलाकर किया गया। इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन कुमार गोयल ने संस्थान के गौरवमयी 42 वर्षों के इतिहास को एक प्रजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया। समारोह में संस्थान में 25 वर्षों की सेवा पूरी करने वाले पदाधिकारियों को स्मृति चिह्न से सम्मानित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. जोशी ने कहा कि इस संस्थान से हमारी बहुत अपेक्षाएं हैं। हवा, मिट्टी, पानी के मुद्दों पर कार्य करने वालों में संस्थान सर्वोपरि हैं। उन्होंने कहा कि पानी को पानी की तरह न देखें, समाज में इसके समग्र योगदान को देखें। तब ही पानी के प्रति हमारी समझ बढ़ेगी। पानी का कोई विकल्प नहीं है। आज हमने चाहे कितना भी विकास किया हो, मगर हमने हवा, पानी, मिट्टी, जंगल को खोया है। हमें पानी को समग्र समृद्धि के रूप में देखना है। आज प्रकृति हमसे खुश नहीं है क्योंकि हमने अपनी नदियां नष्ट कर दी हैं, समुद्र भी बर्बाद कर दिए हैं, इसलिए प्रकृति हमें कष्ट दे रही है। डॉ. जोशी ने कहा कि हम लोग प्रकृति के उत्पादों के प्रति उदासीन हैं। अध्यक्षीय अभिभाषण में संस्थान के निदेशक डॉ. जयवीर त्यागी ने कहा कि हमें कई क्षेत्रों में विकास करना है, वाटर स्ट्रक्चर्स, डैम आदि पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हमारा संस्थान विशिष्ट शोध कार्यों के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। 42 वर्षों में संस्थान ने अपने शोध एवं विकास कार्यों के बल पर देश विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान हमारी नदियों और वाटर बॉडीज की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। हम आने वाले समय में जल एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में और भी बेहतर कार्य करने के लिए पूर्णरूप से प्रतिबद्ध हैं। इस मौके पर डॉ. एसडी खोब्रागडे, अंजली डॉ. एसके जैन, डॉ. एनजी पांडेय, डॉ. सुरजीत सिंह, डॉ. मुकेश शर्मा, डॉ. एमके जोस, डॉ. पीके सिंह, डॉ. मनीष नेमा, डॉ. गोपाल कृष्ण, डॉ. रवि गलकटे, डॉ. प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।