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कांवड़ यात्रा में कुछ की भरी झोली तो रोडवेज की रही खाली
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कांवड़ यात्रा के दौरान जहां व्यापारियों से लेकर होटल स्वामियों और अन्य विभागों ने जमकर चांदी काटी, वहीं रुड़की रोडवेज को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यात्रा के दौरान निगम की आधी बसें बेडे़ में ही खड़ी रहीं, ऐसे में निगम को हर दिन दो से ढाई लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
शिवरात्रि पर महादेव के जलाभिषेक के साथ कांवड़ यात्रा संपन्न हो गई है। कांवड़ यात्रा का शुभारंभ 14 जुलाई से शुरू हो गया था। यात्रा के दो से तीन दिन बाद ही हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी थी। जैसे-जैसे हाईवे पर कांवड़ यात्री बढ़ते गए, वैसे ही रोडवेज में यात्रियों की संख्या कम होने लगी। इस दौरान कामकाज वाले व लोकल रूट पर चलने वाले यात्रियों ने ही बसों में सफर किया, जबकि सैर-सपाटा और रिश्तेदारियों में जाने वाले लोगों ने अपनी यात्रा पर ब्रेक लगा दिया था। इसका असर रोडवेज की आय पर दिखा। दरअसल, रोडवेज के बेडे़ में इस समय अनुबंधित और डिपो की 38 बसें हैं। सामान्य दिनों में इन बसों से छह से सात लाख रुपये की आय प्रतिदिन रहती है लेकिन जब से यात्रा शुरू हुई, तब से डिपो की कमाई का ग्राफ धीरे-धीरे गिरता चला गया। रोडवेज ने शुरू में 90 हजार से डेढ़ लाख रुपये का प्रतिदिन नुकसान उठाया। इसके बाद 18 जुलाई से कांवड़ चरम पर पहुंची तो रोडवेज की आय घटकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये प्रतिदिन रह गई। ऐसे में डिपो को हर दिन करीब दो से ढाई लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। रोडवेज के एआरएम आलोक बेनवाल ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान रूट डायवर्ट हो गए थे। ऐसे में यात्रियों ने सफर करना कम कर दिया था। इसके चलते डिपो आधी बसें ही चला पाया। इससे इस दौरान डिपो की आय कम हुई।
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शिवरात्रि पर महादेव के जलाभिषेक के साथ कांवड़ यात्रा संपन्न हो गई है। कांवड़ यात्रा का शुभारंभ 14 जुलाई से शुरू हो गया था। यात्रा के दो से तीन दिन बाद ही हाईवे पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी थी। जैसे-जैसे हाईवे पर कांवड़ यात्री बढ़ते गए, वैसे ही रोडवेज में यात्रियों की संख्या कम होने लगी। इस दौरान कामकाज वाले व लोकल रूट पर चलने वाले यात्रियों ने ही बसों में सफर किया, जबकि सैर-सपाटा और रिश्तेदारियों में जाने वाले लोगों ने अपनी यात्रा पर ब्रेक लगा दिया था। इसका असर रोडवेज की आय पर दिखा। दरअसल, रोडवेज के बेडे़ में इस समय अनुबंधित और डिपो की 38 बसें हैं। सामान्य दिनों में इन बसों से छह से सात लाख रुपये की आय प्रतिदिन रहती है लेकिन जब से यात्रा शुरू हुई, तब से डिपो की कमाई का ग्राफ धीरे-धीरे गिरता चला गया। रोडवेज ने शुरू में 90 हजार से डेढ़ लाख रुपये का प्रतिदिन नुकसान उठाया। इसके बाद 18 जुलाई से कांवड़ चरम पर पहुंची तो रोडवेज की आय घटकर तीन से साढ़े तीन लाख रुपये प्रतिदिन रह गई। ऐसे में डिपो को हर दिन करीब दो से ढाई लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। रोडवेज के एआरएम आलोक बेनवाल ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान रूट डायवर्ट हो गए थे। ऐसे में यात्रियों ने सफर करना कम कर दिया था। इसके चलते डिपो आधी बसें ही चला पाया। इससे इस दौरान डिपो की आय कम हुई।
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