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प्रदेश में भी सुलगी जाट आरक्षण की आग
ब्यूरो/रुड़की, अमर उजाला
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:16 PM IST
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आरक्षण की मांग को लेकर जाटों के आंदोलन की आग अब उत्तराखंड में भी सुलगने लग गई है। समुदाय के लोगों ने रविवार को नारसन तिराहे पर साढ़े तीन घंटे तक प्रदर्शन कर हाईवे जाम कर हरियाणा सरकार को बर्खास्त करने की मांग उठाई। आंदोलन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके परिजनों को नौकरी और मुआवजे देने की भी मांग उठाई। चेतावनी दी यदि दो दिन के भीतर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो दोबारा राजमार्ग जाम करने का ऐलान किया।
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हरियाणा में भड़की जाट आरक्षण की आग में कई लोगों की जान जाने के बाद अब उत्तराखंड में भी इसका असर दिखने लग गया है। रविवार को एकत्रित हुए समुदाय के लोगों ने जाट आरक्षण संघर्ष समिति के बैनर तले दोपहर करीब डेढ़ बजे नारसन तिराहे पर हाईवे जाम कर दिया। इससे लोगों को विभिन्न मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सूचना पर पहुंची पुलिस को रूट डायवर्ट करना पड़ा।
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इस दौरान पुलिसकर्मियों और लोगों के बीच कई बार नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने हरियाणा में भड़की हिंसा के लिए वहां की सरकार को जिम्मेदार ठहराया और केंद्र से सरकार बर्खास्त करने की मांग उठाई। इसके अलावा आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को नौकरी और मुआवजे की मांग उठाई।
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जाम और विरोध प्रदर्शन की सूचना पर मौके पर पहुंचे स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह हटने को तैयार नहीं हुए। प्रदर्शनकारी डीएम को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। दोपहर से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन और जाम शाम पांच बजे तक चलता रहा। उसके बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम भगवानपुर मनीष कुमार सिंह ने प्रदर्शनकारियों को समझा बुझाकर शांत कराया। तब जाकर करीब पांच बजे प्रदर्शनकारी हाईवे से हटने को तैयार हुए। चेतावनी दी यदि दो दिन में उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 23 फरवरी को दुबारा से हाईवे जाम कर दिया जाएगा। प्रदर्शन करने वालों में सुरेंद्र, प्रवीन सालार, रामपाल सिंह, संजय आदि उपस्थित रहे।
पूर्व विधायक ने किया समर्थन
जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से नारसन तिराहे पर लगाए गए जाम के दौरान मंगलौर को पूर्व विधायक काजी निजीमुद्दीन ने मौके पर पहुंचकर आंदोलन का समर्थन किया। साथ ही आरक्षण और आंदोलन को उचित करार दिया। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल मामले में ठोस कार्रवाई की मांग की।