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ड्रोन से लैंड सर्वे करने में सैन्य अधिकारियों को दक्ष करेगा आईआईटी
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देश के सैन्य अधिकार क्षेत्र में आने वाली भूमि का ड्रोन आधारित आधुनिक तकनीक से सर्वे करने में सेना के अधिकारियों को दक्ष करने का जिम्मा आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों को मिला है। इसके तहत प्रारंभिक तौर पर दिल्ली में 15 सैन्य अधिकारियों के पहले बैच को ड्रोन उड़ाने से लेकर फोटोग्रेमटरी, जीपीएस और जीआईएस के जरिए भूमि का सर्वे करने व डिजिटल नक्शा तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया है। यह कवायद देश में उन सैन्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी जहां सेना और आम नागरिकों के बीच भूमि का विवाद तनाव का कारण बनता रहा है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एस्टेट्स मैनेजमेंट (एनआईडीईएम) में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सर्वे टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया है। इसका उद्देश्य इस केंद्र को लैंड सर्वे के नॉलेज हब के रूप में विकसित करना भी है। इसके लिए एनआईडीईएम ने आईआईटी रुड़की को नॉलेज पार्टनर के रूप में चुना है। इसी दौरान एनआईडीईएम के निदेशक सी. रविंद्र की ओर से आईआईटी रुड़की के सिविल डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक प्रोफेसर कमल जैन से केंद्र की स्थापना के लिए तकनीकी सहयोग मांगा। प्रो. कमल जैन को सैन्य अधिकारियों को लैंड सर्वे की ट्रेनिंग देने के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार करना था। साथ ही अधिकारियों की शंकाओं के सापेक्ष उन्हें सैद्धांतिक और व्यवहारिक समाधान भी प्रस्तुत करना था। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने को आईआईटी के सिविल विभाग के वैज्ञानिक डॉ. कमल जैन ने चुनौती के रूप में लिया और पूरा खाका तैयार किया। इसके बाद दिल्ली स्थित कैंट बोर्ड के हेड आफिस में डॉ. जैन के साथ डॉ. पीके गर्ग और डॉ. जेके घोष द्वारा 28 फरवरी से 04 मार्च तक 15 अधिकारियों के पहले बैच को सफलतापूर्वक ड्रोन के जरिए लैंड सर्वे करना व इसे डिजिटल रूप में तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई। इसके तहत अधिकारियों को नक्शा तैयार करने के लिए ड्रोन को उड़ाने से लेकर इससे फोटोग्रामेटरी के जरिए इमेज हासिल करना और जीपीएस, जीआईसी के इस्तेमाल की बारीकी से जानकारी दी गई। अब नए बैच में अधिकारियों को यह प्रशिक्षण हासिल होगा।
कई बार सेना और सिविलियन के बीच हो चुका है तनाव
रुड़की में भी कई बार सीमा और भूमि विवाद को लेकर सिविलियन व सेना के लोगों में तनाव की स्थिति पैदा हो चुकी है। इसमें दोनों ओर के लोग घायल भी हुए। इस दौरान पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा। कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत अन्य छावनी में भूमि एवं सीमाओं का विवाद सिविलियन के बीच विवादों के चलते पुख्ता जमीनी सर्वे समय की मांग बन चुकी है। ऐसे में ड्रोन तकनीक के जरिए लैंड सर्वे में दिखाई जा रही दिलचस्पी आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉ. कमल जैन का कहना है कि ड्रोन तकनीक के जरिए एक्यूरेसी के साथ डिजिटल फार्म में नक्शा प्राप्त होने के बाद भूमि संबंधी विवादों एवं प्रकरणों का तेजी के साथ और आसानी से निस्तारण हो सकेगा।
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यह भी बनी राय
डॉ. जैन ने बताया कि सर्वे के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम का सैन्य अधिकारियों से जो फीडबैक मिला है, उसके अनुसार यह पाठ्यक्रम काफी उपयोगी रहा। सभी ने इसकी न केवल सराहना की बल्कि इस पर भी सहमति जताई कि सर्वे में लगे अन्य एजेंसियों के इंजीनियरों को भी पाठ्यक्रम के अनुरूप ट्रेनिंग प्रदान कराई जाएगी।
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस एस्टेट्स मैनेजमेंट (एनआईडीईएम) में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन सर्वे टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया है। इसका उद्देश्य इस केंद्र को लैंड सर्वे के नॉलेज हब के रूप में विकसित करना भी है। इसके लिए एनआईडीईएम ने आईआईटी रुड़की को नॉलेज पार्टनर के रूप में चुना है। इसी दौरान एनआईडीईएम के निदेशक सी. रविंद्र की ओर से आईआईटी रुड़की के सिविल डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक प्रोफेसर कमल जैन से केंद्र की स्थापना के लिए तकनीकी सहयोग मांगा। प्रो. कमल जैन को सैन्य अधिकारियों को लैंड सर्वे की ट्रेनिंग देने के लिए पाठ्यक्रम भी तैयार करना था। साथ ही अधिकारियों की शंकाओं के सापेक्ष उन्हें सैद्धांतिक और व्यवहारिक समाधान भी प्रस्तुत करना था। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने को आईआईटी के सिविल विभाग के वैज्ञानिक डॉ. कमल जैन ने चुनौती के रूप में लिया और पूरा खाका तैयार किया। इसके बाद दिल्ली स्थित कैंट बोर्ड के हेड आफिस में डॉ. जैन के साथ डॉ. पीके गर्ग और डॉ. जेके घोष द्वारा 28 फरवरी से 04 मार्च तक 15 अधिकारियों के पहले बैच को सफलतापूर्वक ड्रोन के जरिए लैंड सर्वे करना व इसे डिजिटल रूप में तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई। इसके तहत अधिकारियों को नक्शा तैयार करने के लिए ड्रोन को उड़ाने से लेकर इससे फोटोग्रामेटरी के जरिए इमेज हासिल करना और जीपीएस, जीआईसी के इस्तेमाल की बारीकी से जानकारी दी गई। अब नए बैच में अधिकारियों को यह प्रशिक्षण हासिल होगा।
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कई बार सेना और सिविलियन के बीच हो चुका है तनाव
रुड़की में भी कई बार सीमा और भूमि विवाद को लेकर सिविलियन व सेना के लोगों में तनाव की स्थिति पैदा हो चुकी है। इसमें दोनों ओर के लोग घायल भी हुए। इस दौरान पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालना पड़ा। कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत अन्य छावनी में भूमि एवं सीमाओं का विवाद सिविलियन के बीच विवादों के चलते पुख्ता जमीनी सर्वे समय की मांग बन चुकी है। ऐसे में ड्रोन तकनीक के जरिए लैंड सर्वे में दिखाई जा रही दिलचस्पी आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। डॉ. कमल जैन का कहना है कि ड्रोन तकनीक के जरिए एक्यूरेसी के साथ डिजिटल फार्म में नक्शा प्राप्त होने के बाद भूमि संबंधी विवादों एवं प्रकरणों का तेजी के साथ और आसानी से निस्तारण हो सकेगा।
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यह भी बनी राय
डॉ. जैन ने बताया कि सर्वे के लिए तैयार किए गए पाठ्यक्रम का सैन्य अधिकारियों से जो फीडबैक मिला है, उसके अनुसार यह पाठ्यक्रम काफी उपयोगी रहा। सभी ने इसकी न केवल सराहना की बल्कि इस पर भी सहमति जताई कि सर्वे में लगे अन्य एजेंसियों के इंजीनियरों को भी पाठ्यक्रम के अनुरूप ट्रेनिंग प्रदान कराई जाएगी।