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रोडवेज के बाहर डग्गामारी, सरकारी बसों पर भारी
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रुड़की। बस अड्डे के बाहर ही निजी वाहनों की डग्गामारी परिवहन निगम पर भारी पड़ रही है। वहीं, परिवहन विभाग के अधिकारी बाइक सवारों के चालान काटने और तेज रफ्तार वाहन पकड़ने में ही व्यस्त हैं। कार्रवाई न होने का ही नतीजा है कि डग्गामार वाहन स्वामी बेखौफ हैं। वे बस अड्डा परिसर के गेट के सामने ही वाहन खड़े कर सवारियां बैठा रहे हैं। इसके चलते परिवहन निगम की लोकल बसों में सवारियों की संख्या घटती जा रही है। डग्गामारी न केवल रोडवेज को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि यात्रियों के लिए खतरनाक भी है।
रोडवेज बस अड्डे के आसपास प्राइवेट बसों और अन्य डग्गामार वाहनों में सवारियां बैठाना परिवहन निगम के नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद बस अड्डे पर डग्गामार वाहन और प्राइवेट बसों की भरमार रहती है। डग्गामारी वाहनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी एआरटीओ की है, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल बाइक सवारों के कागज और हेलमेट नहीं होने पर चालान काटने तक ही सीमित हैं। ज्यादा से ज्यादा विभाग अपनी चेकिंग में समय से टैक्स जमा नहीं करने वाले वाहनों के चालान काट देता है। बस अड्डे के पास हो रही डग्गामारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ये खेल धड़ल्ले से जारी है। अक्सर देखा जाता है कि डग्गामार वाहन चालक देहरादून, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, देवबंद, हरिद्वार की सवारियों को बहलाकर अपने वाहनों तक ले आते हैं। इसी तरह प्राइवेट बस चालक भी बाकायदा गेट पर रुककर सवारी उतारते हैं और बैठाते भी हैं।
डग्गामारी का सीधा असर रोडवेज की आय पर पड़ रहा है। प्रतिदिन छह से सात लाख कमाने वाले रुड़की डिपो की आय चार से छह लाख रुपये तक सीमित हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, बाहर जाने वाले यात्री तो रोडवेज बसों का ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लोकल यात्री बहकावे में आकर डग्गामार वाहनों में सवार हो जाते हैं। कई बार निगम की लोकल बसें खाली खड़ी रहती हैं। यही नहीं, डग्गामार वाहन यात्रियों के लिए सुरक्षित भी नहीं होते हैं। तेज रफ्तार के अलावा इनमें सीट से दोगुना सवारियों को बैठाया जाता है। कई बार ज्यादा मुनाफे के चक्कर में चालक अपनी सीट पर भी यात्री बैठाते हैं। ऐसे में ओवरलोड वाहनों के हादसे का शिकार होने की आशंका रहती है। वहीं, यदि किसी कारणवश डग्गामार वाहनों में दुर्घटना के समय यात्री गंभीर घायल हो जाता है या फिर मौत हो जाती है तो उसे विभाग से किसी तरह का क्लेम भी नहीं मिलता।
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रोडवेज बस अड्डे के बाहर डग्गामारी पर अंकुुश लगाने की जिम्मेदारी एआरटीओ विभाग की है। एआरटीओ से कई बार इस मामले में शिकायत भी की गई है, लेकिन डग्गामारी होने से डिपो की आय पर असर पड़ता है।
-आलोक बेनवाल, एआरएम, रुड़की रोडवेज डिपो
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रुड़की रोडवेज बस अड्डे के बाहर डग्गामारी की शिकायत मिली है। जल्द ही अधीनस्थों को निर्देश दिए जाएंगे कि डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
-ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ
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रोडवेज बस अड्डे के आसपास प्राइवेट बसों और अन्य डग्गामार वाहनों में सवारियां बैठाना परिवहन निगम के नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद बस अड्डे पर डग्गामार वाहन और प्राइवेट बसों की भरमार रहती है। डग्गामारी वाहनों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी एआरटीओ की है, लेकिन विभागीय अधिकारी केवल बाइक सवारों के कागज और हेलमेट नहीं होने पर चालान काटने तक ही सीमित हैं। ज्यादा से ज्यादा विभाग अपनी चेकिंग में समय से टैक्स जमा नहीं करने वाले वाहनों के चालान काट देता है। बस अड्डे के पास हो रही डग्गामारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से ये खेल धड़ल्ले से जारी है। अक्सर देखा जाता है कि डग्गामार वाहन चालक देहरादून, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, देवबंद, हरिद्वार की सवारियों को बहलाकर अपने वाहनों तक ले आते हैं। इसी तरह प्राइवेट बस चालक भी बाकायदा गेट पर रुककर सवारी उतारते हैं और बैठाते भी हैं।
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डग्गामारी का सीधा असर रोडवेज की आय पर पड़ रहा है। प्रतिदिन छह से सात लाख कमाने वाले रुड़की डिपो की आय चार से छह लाख रुपये तक सीमित हो गई है। अधिकारियों के मुताबिक, बाहर जाने वाले यात्री तो रोडवेज बसों का ही इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लोकल यात्री बहकावे में आकर डग्गामार वाहनों में सवार हो जाते हैं। कई बार निगम की लोकल बसें खाली खड़ी रहती हैं। यही नहीं, डग्गामार वाहन यात्रियों के लिए सुरक्षित भी नहीं होते हैं। तेज रफ्तार के अलावा इनमें सीट से दोगुना सवारियों को बैठाया जाता है। कई बार ज्यादा मुनाफे के चक्कर में चालक अपनी सीट पर भी यात्री बैठाते हैं। ऐसे में ओवरलोड वाहनों के हादसे का शिकार होने की आशंका रहती है। वहीं, यदि किसी कारणवश डग्गामार वाहनों में दुर्घटना के समय यात्री गंभीर घायल हो जाता है या फिर मौत हो जाती है तो उसे विभाग से किसी तरह का क्लेम भी नहीं मिलता।
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रोडवेज बस अड्डे के बाहर डग्गामारी पर अंकुुश लगाने की जिम्मेदारी एआरटीओ विभाग की है। एआरटीओ से कई बार इस मामले में शिकायत भी की गई है, लेकिन डग्गामारी होने से डिपो की आय पर असर पड़ता है।
-आलोक बेनवाल, एआरएम, रुड़की रोडवेज डिपो
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रुड़की रोडवेज बस अड्डे के बाहर डग्गामारी की शिकायत मिली है। जल्द ही अधीनस्थों को निर्देश दिए जाएंगे कि डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
-ज्योति शंकर मिश्रा, एआरटीओ