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धरातल पर नहीं उतर पाई हरीश रावत की सोच
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:11 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : file photo
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रुड़की। रुड़की को टूरिस्ट सर्किट के रूप विकसित करने की अपदस्थ मुख्यमंत्री हरीश रावत की सोच धरातल पर नहीं उतर पाई। करीब एक साल पहले उन्होंने रुड़की की गंगनहर को वाटर स्पोर्ट्स लेन में तब्दील करने तथा पुरानी गंगनहर को झील के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी।
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साथ ही रुड़की को टूरिस्ट सर्किट बनाते हुए इसमें भगवानपुर क्षेत्र के सिकरोढ़ा स्थित नवाब के हूजरे और महल को तथा लंढौरा के ऐतिहासिक किले को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने का खाका तैयार कराया गया था। लेकिन इस दरम्यिान एक भी योजना को साकार रूप नहीं मिल सका। इसके अलावा शहर में कूड़े से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट और भगवानपुर क्षेत्र में मेडिकल कालेज स्थापित किए जाने की योजना भी धरातल पर नहीं उतर सकीं।
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यहां है वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन की तमाम खूबियां
रुड़की। शहर के बीचोबीच से गुजरती गंगनहर में वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन के लिहाज से कई खूबियां है। 50 मीटर चौड़ी गंगनहर में आसानी से राष्ट्रीय स्तर की क्याकिंग कैनोइंग प्रतियोगिताओं का आयोजन हो चुका है। वहीं यह गंगनहर हरिद्वार तीर्थ स्थल से निकलकर विश्व प्रसिद्ध पिरान कलियर होते हुए रुड़की पहुंचती है। जिसके चलते इसके किनारे से होकर हर साल लाखों जायरीन दरगाह पहुंचते हैं। ऐसे में गंगनहर को पर्यटन और खेल के लिहाज से संवारा जाए तो यह काफी मुनाफे का सौदा साबित होगा।
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पर्यटन और वाटर स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाओं को साकार करने के लिए विगत छह सालों से प्रयास हो रहे हैं। तत्कालीन पर्यटन मंत्री मदन कौशिक ने भी इसके लिए दस करोड़ की योजना की घोषणा की थी लेकिन यूपी सरकार का अड़ंगा लगा तो योजना अटक गई। यहां पुलिस वाटर स्पोर्ट्स आल इंडिया मीट चैंपियनशिप सहित दर्जनों राष्ट्रीय स्तर की कैनोइंग क्याकिंग प्रतियोगिताएं संपन्न हो चुकी है।
50 मीटर चौड़ी जीवनदायिनी गंगनहर के विश्वप्रसिद्ध पिरान कलियर से होकर गुजरने के कारण भी यह पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पर्यटन विशेषज्ञों की माने तो गंगनहर के दोनों ओर के किनारों को दर्शकदीर्घा के रूप में विकसित कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। सीएम रावत ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने की घोषणा की तो आस जगी लेकिन योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी।
महल और हूजरा में जिंदा है नवाब की यादें
रुड़की। यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि भगवानपुर के सिकरोढ़ा गांव में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले नवाब मोहम्मद अली खां का 136 साल पुराना महल और हूजरा यानी स्मृति स्थल आज भी खड़ा है। इसकी बेजोड़ नक्काशी आज भी ध्यान खींचती है। रुड़की टूरिस्ट सर्किट के तहत इसको भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की योजना थी। लेकिन इस पर अभी तक कोई काम नहीं हो सका।
नवाब मोहम्मद अली खां का महल और हूजरा सिकरोढा गांव के ग्रामीणों के लिए गौरव की बात है। 1880 में नवाब के रुतबे से डरकर अंग्रेजों ने उनकी धोखे से जान ले ली थी। बताया जाता है कि नवाब के महल पर लगा झंडा देखकर अंग्रेजों को उनसे खतरा लगने लगा था। गांव में कहीं क्रांति का बीज न पनप जाए इस डर से अंग्रेज उन्हें धोखे से अपने साथ ले गए। कई दिनों बाद गांव में उनका ताबूत ही आया। जिसे गांव में ही दफना दिया गया।
उनकी शहादत से कहीं फिर से आंदोलन न खड़ा हो जाए। इस डर से अंग्रेज सैनिकों ने कई दिनों तक गांवों को घेरे रखा। बताया जाता है कि इस दौरन नवाब के परिवार को दूसरे गांवों में शरण लेनी पड़ी। सिकरोढा के ग्रामीणों की नजर में नवाब मोहम्मद अली खां का हूजरा पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान का प्रतीक है। इसमें की गई कारीगिरी और नक्काशी को देखकर आज भी आश्चर्य होता है। लोग इसे देखकर नवाब की शहादत को भी सलाम करते हैं।
कूड़े से बिजली बनाने की योजना नहीं हुई साकार
रुड़की। तेजी से काम होता तो पूरे देश में कूड़े से बिजली बनाने का अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट रुड़की में शुरू हो गया होता। लेकिन नगर निगम और विधायक के बीच चली खींचतान के कारण शासन स्तर से भी इसमें कोई तेजी नहीं लाई जा सकी।
जर्मन गैसीफिकेशन तकनीक से लगने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए सालियर स्थित नगर निगम की भूमि में इस प्रोजेक्ट के लिए पैमाइश तो की गई। लेकिन इस प्रोजेक्ट को छह माह पहले शासन की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद भी इस पर अब तक काम तक शुरू नहीं हो पाया। अब जबकि राष्ट्रपति शासन लग चुका है तो काम शुरू हो पाएगा या नहीं यह कह पाना भी काफी मुश्किल है।
भगवानपुर में मेडिकल कालेज का सपना भी अधूरा
भगवानपुर। भगवानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने करीब डेढ़ साल पहले क्षेत्र में एक मेडिकल कालेज खोले जाने की घोषणा की थी। इसके लिए हसनपुर मदनपुर के समीप करीब सौ बीघा भूमि पैमाइश भी की गई। लेकिन इसके बाद से न तो भूमि के चयन को अंतिम रूप मिल सका और न ही बजट का आवंटन हो सका।
इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश के कार्यकाल में भगवानपुर में टेलीफोन एक्सचेंज के पास प्रस्तावित रोडवेज बस स्टैंड निर्माण का बजट भी अधर में हैं। बस अड्डा नहीं होने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।