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टिकट पाने के लिए सेटिंग-गेटिंग रही योग्यता
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Sat, 28 Jan 2017 11:15 PM IST
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राजनीतिक पार्टियों में प्रत्याशियों के चयन का कोई निश्चित पैमाना नहीं रह गया है। यह बात विधानसभा चुनाव में पार्टियों की ओर से किए गए प्रत्याशियों के चयन में साफ हो गई है। टिकट हासिल करने में प्रत्याशियों की सेटिंग गेटिंग सबसे बड़ी योग्यता रही।
विधानसभा चुनाव के लिए घोषित प्रत्याशियों से कई नाम चौंकाने वाले हैं। आचार संहिता से पहले पार्टियों की ओर से तीन-तीन दावेदारों के पैनल मांगे गए थे। कांग्रेस में तो प्रदेश अध्यक्ष की ओर से प्रत्येक बूथ से पांच लोगों के नामों की सूची लाकर देने वाले दावेदारों को टिकट आवंटित करने की घोषणा की थी। लेकिन, जब दिल्ली में टिकटों की सूची फाइनल हुई तो सारे नियम धरे के धरे रह गए। यही कारण है कि अधिकतर सीटों पर बगावत के सुर पनप रहे हैं। रुड़की सीट पर ऐन मौके पर कांग्रेसियों को दरकिनार कर भाजपा के बागी सुरेश चंद जैन को टिकट दिया गया।
सुल्तानपुर में कांग्रेस नेताओं की बजाय बसपा के बागी तसलीम को टिकट दिया गया। भाजपा में पिरान कलियर और मंगलौर सीट पर कुछ इसी तरह टिकट दिए गए। कलियर में जयभगवान सैनी को भाजपा ने टिकट दिया। मंगलौर में ऋषिपाल बालियान को भाजपा से टिकट मिला तो सभी के गणित फेल हो गए। भाजपा और कांग्रेस में टिकट आवंटन की स्थिति को देखा जाए तो साफ पता चलता है कि किसी की सेटिंग सीधे मुख्यमंत्री से थी तो किसी ने सांसद निशंक के सहारे हाईकमान से टिकट हासिल करने में कामयाबी पाई है।
विधानसभा चुनाव के लिए घोषित प्रत्याशियों से कई नाम चौंकाने वाले हैं। आचार संहिता से पहले पार्टियों की ओर से तीन-तीन दावेदारों के पैनल मांगे गए थे। कांग्रेस में तो प्रदेश अध्यक्ष की ओर से प्रत्येक बूथ से पांच लोगों के नामों की सूची लाकर देने वाले दावेदारों को टिकट आवंटित करने की घोषणा की थी। लेकिन, जब दिल्ली में टिकटों की सूची फाइनल हुई तो सारे नियम धरे के धरे रह गए। यही कारण है कि अधिकतर सीटों पर बगावत के सुर पनप रहे हैं। रुड़की सीट पर ऐन मौके पर कांग्रेसियों को दरकिनार कर भाजपा के बागी सुरेश चंद जैन को टिकट दिया गया।
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सुल्तानपुर में कांग्रेस नेताओं की बजाय बसपा के बागी तसलीम को टिकट दिया गया। भाजपा में पिरान कलियर और मंगलौर सीट पर कुछ इसी तरह टिकट दिए गए। कलियर में जयभगवान सैनी को भाजपा ने टिकट दिया। मंगलौर में ऋषिपाल बालियान को भाजपा से टिकट मिला तो सभी के गणित फेल हो गए। भाजपा और कांग्रेस में टिकट आवंटन की स्थिति को देखा जाए तो साफ पता चलता है कि किसी की सेटिंग सीधे मुख्यमंत्री से थी तो किसी ने सांसद निशंक के सहारे हाईकमान से टिकट हासिल करने में कामयाबी पाई है।
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