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नौकरी छूटने पर जल्द अमीर बनने के लिए बनाने लगे नकली नोट
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लक्सर (रुड़की)। पुलिस ने नकली नोट छापकर बाजार में चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि एक आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। पुलिस ने उनके पास से 45 हजार से अधिक के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर और पेपर भी बरामद किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो वे बेरोजगार हो गए थे। लिहाजा जल्द अमीर बनने के लालच में उन्होंने नकली नोट छापने का काम शुरू कर दिया था।
शुक्रवार को एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पुलिस ने बृहस्पतिवार को चेकिंग के दौरान जसोद्द गांव की पुलिया के पास बने प्रतीक्षालय में शोएब निवासी ग्राम सलेमपुर दादूपुर, रानीपुर, अफजाल निवासी ग्राम मुस्तफाबाद, थाना पथरी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में शोएब ने बताया कि वह मुंबई के बांद्रा में एक रेस्टोरेंट में वेटर था। रेस्टोरेंट में ही उसकी मुलाकात शारिक से हुई और दोनों की गहरी दोस्ती हो गई थी। शारिक ने बताया था कि वह नकली नोट छापता था। इस बीच लॉकडाउन हुआ तो दोनों का काम छूट गया और वह घर आ गए। बेरोजगार होने पर शोएब ने शारिक से संपर्क किया।
दोनों ने नकली नोट छापने की योजना बनाई। इस बीच उसने अफजाल से मुलाकात की। अफजाल ने सलेमपुर में मोहम्मद शारिक निवासी ग्राम महमूदनगर, जिला मुजफ्फरनगर को किराये पर कमरा दिलाया था। इसके बाद तीनों यहां नकली नोट छापने लगे। एसपी देहात ने बताया कि पुलिस ने उनकी निशानदेही पर कमरे में छापा मारकर 200 के आधे छपे नकली नोट, मुहर, पेपर, कटर, स्कैनर और नोटों में प्रयोग की जाने वाली स्याही, लैपटॉप, 45 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया जबकि फरार चल रहे आरोपी की तलाश की जा रही है।
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पुलिस टीम में ये रहे शामिल
कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान, एसएसआई नितेश शर्मा, एसआई धर्मेंद्र राठी, यशवीर सिंह नेगी, सिपाही संजय, अव्वल सिंह, सतेंद्र, सुनील, बलबीर, शहजाद, मनोज मलिक, दिनेश कुमार।
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आईबी की टीम करेगी पूछताछ
नकली नोट छापने के मामले में आईबी की टीम भी लक्सर पहुंची और आरोपियों से पूछताछ की। साथ ही जानकारी जुटाई कि वे यह सामान कहां से लाए थे और अब तक कितने नोट बाजार में चलाए हैं। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
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हूबहू करते थे नोटों की छपाई
आरोपी नकली नोटों की बड़े शातिर ढंग से छपाई करते थे। पूछताछ में बताया कि वे केवल 100 और 200 रुपये के नोट की छपाई करते थे। छपाई इस तरह करते थे कि उन्हें पहचान पाना बेहद मुश्किल था। नोट के एक भाग में दिखाई देने वाले महात्मा गांधी की फोटो नहीं छापते थे।
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शुक्रवार को एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल ने प्रेसवार्ता कर बताया कि पुलिस ने बृहस्पतिवार को चेकिंग के दौरान जसोद्द गांव की पुलिया के पास बने प्रतीक्षालय में शोएब निवासी ग्राम सलेमपुर दादूपुर, रानीपुर, अफजाल निवासी ग्राम मुस्तफाबाद, थाना पथरी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में शोएब ने बताया कि वह मुंबई के बांद्रा में एक रेस्टोरेंट में वेटर था। रेस्टोरेंट में ही उसकी मुलाकात शारिक से हुई और दोनों की गहरी दोस्ती हो गई थी। शारिक ने बताया था कि वह नकली नोट छापता था। इस बीच लॉकडाउन हुआ तो दोनों का काम छूट गया और वह घर आ गए। बेरोजगार होने पर शोएब ने शारिक से संपर्क किया।
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दोनों ने नकली नोट छापने की योजना बनाई। इस बीच उसने अफजाल से मुलाकात की। अफजाल ने सलेमपुर में मोहम्मद शारिक निवासी ग्राम महमूदनगर, जिला मुजफ्फरनगर को किराये पर कमरा दिलाया था। इसके बाद तीनों यहां नकली नोट छापने लगे। एसपी देहात ने बताया कि पुलिस ने उनकी निशानदेही पर कमरे में छापा मारकर 200 के आधे छपे नकली नोट, मुहर, पेपर, कटर, स्कैनर और नोटों में प्रयोग की जाने वाली स्याही, लैपटॉप, 45 हजार रुपये के नकली नोट बरामद किए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया जबकि फरार चल रहे आरोपी की तलाश की जा रही है।
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पुलिस टीम में ये रहे शामिल
कोतवाली प्रभारी प्रदीप चौहान, एसएसआई नितेश शर्मा, एसआई धर्मेंद्र राठी, यशवीर सिंह नेगी, सिपाही संजय, अव्वल सिंह, सतेंद्र, सुनील, बलबीर, शहजाद, मनोज मलिक, दिनेश कुमार।
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आईबी की टीम करेगी पूछताछ
नकली नोट छापने के मामले में आईबी की टीम भी लक्सर पहुंची और आरोपियों से पूछताछ की। साथ ही जानकारी जुटाई कि वे यह सामान कहां से लाए थे और अब तक कितने नोट बाजार में चलाए हैं। यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
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हूबहू करते थे नोटों की छपाई
आरोपी नकली नोटों की बड़े शातिर ढंग से छपाई करते थे। पूछताछ में बताया कि वे केवल 100 और 200 रुपये के नोट की छपाई करते थे। छपाई इस तरह करते थे कि उन्हें पहचान पाना बेहद मुश्किल था। नोट के एक भाग में दिखाई देने वाले महात्मा गांधी की फोटो नहीं छापते थे।