{"_id":"614627ad8ebc3e916c208e3f","slug":"extinct-animal-species-roorkee-news-drn3908175184","type":"story","status":"publish","title_hn":"विलुप्त होती जा रही है जीव जंतुओं की प्रजातियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विलुप्त होती जा रही है जीव जंतुओं की प्रजातियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खानपुर/लक्सर। रायसी के हर्ष विद्या मंदिर पीजी कॉलेज में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं तकनीकी परिषद देहरादून की ओर से ‘जैव विविधता मानव सेवा में’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने जैव विविधता का मानव पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी प्रकाश डाला।
शनिवार को राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का शुभारंभ प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह और मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं तकनीकी परिषद के संयुक्त निदेशक डॉ. देवी प्रसाद उनियाल ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. मंजू रानी ने कहा कि जैव विविधता को उसके वास्तविक रूप में लाने के लिए हम सबको प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाकर प्रयास करना होगा। संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से आए वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रयागराज से आई वैज्ञानिक डॉ. अनीता तोमर ने कहा कि मानव क्रियाकलापों के चलते जीव जंतुओं और वनस्पति की बहुत सी प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। हमें जैव विविधता को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अपने आसपास से ही शुरुआत करनी होगी। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक डॉ. गोविंद सिंह रजवार ने हिमालय क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण पर बल दिया। प्राचार्य डॉ. राजेश चंद्र पालीवाल ने प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मृति कुकशाल, डॉ. सारिका महेश्वरी और डॉ. प्रीति गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. डीके उप्रेती, डॉ. प्रियंका, डॉ. परीक्षित कुमार, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. राहुल कौशिक, डॉ. अतुल कुमार दुबे, डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. इकराम, डॉ. विकास तायल, हरीश राम, अक्षय गौतम, डॉ. अलका हरित, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. रश्मि नौटियाल और डॉ. प्रशांत कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
शनिवार को राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी का शुभारंभ प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. केपी सिंह और मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं तकनीकी परिषद के संयुक्त निदेशक डॉ. देवी प्रसाद उनियाल ने संयुक्त रूप से किया। संगोष्ठी की संयोजिका डॉ. मंजू रानी ने कहा कि जैव विविधता को उसके वास्तविक रूप में लाने के लिए हम सबको प्रकृति के साथ सामंजस्य बैठाकर प्रयास करना होगा। संगोष्ठी में विभिन्न प्रदेशों से आए वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। प्रयागराज से आई वैज्ञानिक डॉ. अनीता तोमर ने कहा कि मानव क्रियाकलापों के चलते जीव जंतुओं और वनस्पति की बहुत सी प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। हमें जैव विविधता को स्वस्थ बनाए रखने के लिए अपने आसपास से ही शुरुआत करनी होगी। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा निदेशालय के पूर्व उपनिदेशक डॉ. गोविंद सिंह रजवार ने हिमालय क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण पर बल दिया। प्राचार्य डॉ. राजेश चंद्र पालीवाल ने प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मृति कुकशाल, डॉ. सारिका महेश्वरी और डॉ. प्रीति गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. डीके उप्रेती, डॉ. प्रियंका, डॉ. परीक्षित कुमार, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. राहुल कौशिक, डॉ. अतुल कुमार दुबे, डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. इकराम, डॉ. विकास तायल, हरीश राम, अक्षय गौतम, डॉ. अलका हरित, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. नेहा सिंह, डॉ. रश्मि नौटियाल और डॉ. प्रशांत कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन