फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Roorkee News ›   Ever received the award for cleaning, today the dirty mix

कभी सफाई के लिए मिला पुरस्कार, आज गंदगी का अंबार

Thu, 27 Apr 2017 10:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की Updated Thu, 27 Apr 2017 10:15 PM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
हरिद्वार जिले में 59 गांवों को निर्मल ग्राम के रूप में चयनित किया गया था, जिसे राष्ट्रपति की ओर से स्वच्छता के लिए पुरस्कृत भी किया गया, लेकिन आज निर्मल गांव में स्वच्छता का हाल बेहाल है। स्थिति यह है कि निर्मल गांवों में न तो नियमित साफ-सफाई की कोई व्यवस्था है और न ही सौ प्रतिशत शौचालय बने हुए हैं। यही नहीं सड़क, शुद्ध पानी और स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।

रुड़की ब्लाक के छह गांवों को निर्मल गांव पुरस्कार से नवाजा गया है। इसमें खंजरपुर, पाडली गुज्जर, शफीपुर, रहीमपुर, सलेमपुर राजपूताना शामिल हैं। इसमें से रहीमपुर गांव को छोड़कर अन्य को नगर निगम में शामिल कर लिया गया । इसके बावजूद निर्मल गांवों में कुछ भी निर्मल नहीं है। अधिकांश गांवों में टूटी सड़कें, बदहाल सफाई व्यवस्था, दूषित पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव निर्मल गांवों के दावे को मुंह चिढ़ाते नजर आ रहे हैं। शहर से लगे सलेमपुर राजपुताना गांव में दूषित पेयजल आपूर्ति से लोग परेशान हैं। गांव के बीचो बीच स्थित तालाब में भी गंदगी की भरमार है, जिसमें ग्रामीण कूड़ा कचरे के अलावा सीवर और मरे हुए जानवर भी डालते हैं। तालाब की गंदगी के कारण जलस्तर भी दूषित हो चुका है। हाल ही में क्षेत्रीय सांसद रमेश पोखरियाल ने समस्या समाधान के लिए पांच लाख रुपये देने की घोषणा की है, लेकिन तालाब की सफाई के लिए यह रकम नाकाफी बताई जा रही है। अन्य गांवों की भी कमोबेश यही स्थिति है। ऐसे में स्वच्छता के लिए भले ही निर्मल गांवों के प्रधानों को राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत किया गया था, लेकिन यहां स्वच्छता के नाम पर कुछ भी नहीं है।
विज्ञापन


दो अक्टूबर 2014 से खत्म हुए निर्मल गांव
केंद्र सरकार की ओर से 2014 से पहले जिले के 59 गांव को निर्मल ग्राम के रूप में चयनित किया गया था। इन्हें न सिर्फ राष्ट्रपति की ओर से पुरस्कृत किया गया था, बल्कि ग्राम पंचायतों में साफ-सफाई और स्वच्छता के लिए ढाई लाख रुपये भी दिए जाते थे। दो अक्टूबर 2014 के बाद निर्मल गांवों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद कर दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकारियों की सुनिए .....
वर्ष-2014 से पहले स्वच्छता और सौ प्रतिशत शौचालय की उपलब्धता के आधार पर केंद्र की ओर से निर्मल गांवों का चयन किया गया था, लेकिन दो अक्टूबर 2014 के बाद निर्मल गांव को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद हो गई।
-सोमनाथ सैनी, परियोजना प्रबंधक स्वजल हरिद्वार

- निर्मल गांव में साफ सफाई और स्वच्छता के लिए कोई अतिरिक्त बजट जारी नहीं दिया जाता है। फिलहाल सरकार की ओर से सभी ग्राम पंचायतों को सौ प्रतिशत शौचालय उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रमेशचंद त्रिपाठी, जिला पंचायतराज अधिकारी

हैंडपंपों से आ रही पीला पानी
निर्मल गांवों में शामिल सलेमपुर राजपूताना में आज भी ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्थिति यह है कि हैंडपंप और घरों में आ रहा पानी थोड़ी देर में ही पीला पड़ जाता है। सैंपल में फेल होने के बावजूद आज भी लोग पीला पानी ही पीने को मजबूर हैं।
बरसात में जलभराव से ग्रामीणों की मुसीबत
गांव के बीच में तालाब के कारण बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या आम हो चुकी हैं। बारिश के दिनों में लोगों का घरों से निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार ग्रामीण विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।

हरचंदपुर के प्रवेश द्वार पर ही गंदगी का भंडार
रचंदपुर को निर्मल गांव में शुमार किया गया है, लेकिन गांव के प्रवेश द्वार पर ही गंदगी के ढेर लगे हैं। कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने से नालियां चोक हो जाती हैं। वहीं गांव में नियमित साफ सफाई की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ब्लॉक नारसन में शेरपुर खेलमऊ, थिथकी और हरचंदपुर को निर्मल गांव घोषित किया गया है। इनमें से हरचंदपुर गांव की स्थिति सबसे खराब है। सामाजिक कार्यकर्ता राहुल सैनी का कहना है कि नालियां चोक होने से अक्सर पानी सड़क पर आ जाता है। तालाब के पास गंदगी है, जिसमें मच्छरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। गांव के बाहर सड़क के दोनों ओर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। एडीओ पंचायत एनडी जोशी का कहना है कि गांव में सफाई के लिए हर परिवार से दस रुपये लेने का प्रस्ताव ग्राम सभा की ओर से हुआ है। अभी बजट नहीं मिला हैं। बजट आने पर गांव में मच्छरों को भगाने के लिए फागिंग कराई जायेगी। साथ ही नियमित सफाई के लिए भी प्रयास किया जाएगा।

खानपुर में टायलेट का टोटा
 खानपुर विकासखण्ड की तीन ग्राम पंचायतों को भले ही राष्ट्रपति की ओर से निर्मल ग्राम पुरस्कार मिल चुका हो, लेकिन पंचायतों में सुविधाओं का अभाव है। स्थिति यह है कि आज भी ग्रामीणों को शौचालय नहीं होने से खुले में शौच जाना पड़ रहा है। वहीं ग्राम पंचायतों में पेयजल का भी टोटा बना हुआ है।
खानपुर विकासखंड में कुल 23 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से तीन ग्राम पंचायत गोवर्धनपुर, बालावाली और शेरपुर बेला  को निर्मल ग्राम घोषित कर राष्ट्रपति की ओर से पुुरस्कृत किया गया है। बालावाली और शेरपुर बेला ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के घरों में शत प्रतिशत शौचालयों का निर्माण भी नहीं हो पाया है। साथ ही दोनों ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों को हैडपंपों का ही पानी पीना पड़ रहा है, जबकि दोनों ग्राम पंचायतों में बरसात के दिनों में गंगा नदी में आने वाली बाढ़ से पीड़ित रहते हैं। बाढ़ के चलते दोनों ही ग्राम पंचायतों के हैडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। यह स्थिति तब है जबकि गोवर्धनपुर ग्राम पंचायत को हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक की ओर से आदर्श सांसद ग्राम के तहत गोद लिया गया है।


लक्सर में भी 23 निर्मल गांव, गंदगी की भरमार
लक्सर ब्लाक के 23 गांव को शौचालय व स्वच्छता के आधार पर निर्मल गांव घोषित किया गया है, लेकिन गांवों में गंदगी की भरमार है।
अधिकारियों के अनुसार निर्मल गांव में 2011 की जनसंख्या के अनुसार सौ प्रतिशत शौचालय होने चाहिए। साथ ही गांव साफ सुथरा और स्वच्छ होना चाहिए। लक्सर ब्लाक के अधिकारियों ने मानकों के आधार पर अलावलपुर, बाकरपुर, भोगपुर, बाडीढीप, डोसनी, फतवा, हुसैनपुर, इस्मालपुर, खानपुर, महाराजपुर कलां, मुबारिकपुर, मुंडाखेड़ा कलां, नगला खिताब, निहंदपुर सुठारी, निरंजनपुर, रामपुर रायघटी, सेठपुर, सुभाषगढ़, सुल्तानपुर, खेड़ी खुर्द, खेड़ी मुबारिकपुर, कुआखेड़ा व लादपुर को निर्मल गांव घोषित कर रखा है। अधिकारियों के अनुसार इन गांव में 100 प्रतिशत शौचालय के साथ स्वच्छता भी है, लेकिन मामले को लेकर जब सुल्तानपुर व नगला खिताब गांव की जांच पड़ताल की गई तो नगला खिताब गांव में एक सड़क के करीब पचास मीटर के टुकड़े ने तो सड़क पर ही तालाब का रूप ले लिया है। घरों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं सुल्तानपुर में भी नालियां आदि की सफाई न होने के कारण बुरा हाल है, जिसके चलते विभागीय अधिकारी मामले को लेकर संवेदनशील नजर नहीं आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed