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120 किलोमीटर की स्पीड पर डबल ट्रैक का ट्रायल सफल
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लक्सर में नए रेलवे ट्रैक का सुरक्षा ऑडिट करते रेलवे सुरक्षा आयुक्त।
- फोटो : ROORKEE
लक्सर रेलवे स्टेशन से एक्कड़ तक नया रेलवे ट्रैक बनकर तैयार है। डबल ट्रैक के काम के तहत इस पर ट्रायल कामयाब रहा। मंगलवार को इस ट्रैक पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड पर ट्रेन चलाकर सुरक्षा जांच की गई। रेलवे सुरक्षा आयुक्त सीआरएस की हरी झंडी के बाद अब इस ट्रैक पर जल्द ही गाड़ियां दौड़ सकेंगी।
रेलवे सुरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक ने मुरादाबाद के डीआरएम तरुण प्रकाश और विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ मंगलवार को नए ट्रैक का सेफ्टी ऑडिट किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ट्रॉली में बैठकर लक्सर के बहादरपुर बाईपास से एक्कड़ तक की लाइन की सुरक्षा को जांचा। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को ट्रैक की बारीकियों के बारे में बताया। ट्रायल के बाद नए ट्रैक पर ट्रेनों के संचालन को अपनी ओर से हरी झंडी दे दी है। उन्होंने बताया कि ट्रैक का निर्माण कार्य सुरक्षा के मानकों के अनुरूप हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ मामूली औपचारिकताओं के बाद इस ट्रैक पर ट्रेनें चलानी शुरू कर दी जाएंगी।
ट्रैक पर प्रति किलोमीटर सात करोड़ का खर्च
रेलवे सुरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक के मुताबिक रेलवे ट्रैक को तैयार करने में प्रति किलोमीटर लगभग सात करोड़ रुपए का खर्च आया है। निरीक्षण के दौरान रेल पथ यातायात, इंटरलॉकिंग, विद्युतीकरण, शिफ्टिंग और सिग्नल से संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
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रेलवे सुरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक ने मुरादाबाद के डीआरएम तरुण प्रकाश और विभाग के अन्य अधिकारियों के साथ मंगलवार को नए ट्रैक का सेफ्टी ऑडिट किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ट्रॉली में बैठकर लक्सर के बहादरपुर बाईपास से एक्कड़ तक की लाइन की सुरक्षा को जांचा। उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों को ट्रैक की बारीकियों के बारे में बताया। ट्रायल के बाद नए ट्रैक पर ट्रेनों के संचालन को अपनी ओर से हरी झंडी दे दी है। उन्होंने बताया कि ट्रैक का निर्माण कार्य सुरक्षा के मानकों के अनुरूप हुआ है। उन्होंने बताया कि कुछ मामूली औपचारिकताओं के बाद इस ट्रैक पर ट्रेनें चलानी शुरू कर दी जाएंगी।
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ट्रैक पर प्रति किलोमीटर सात करोड़ का खर्च
रेलवे सुरक्षा आयुक्त शैलेश कुमार पाठक के मुताबिक रेलवे ट्रैक को तैयार करने में प्रति किलोमीटर लगभग सात करोड़ रुपए का खर्च आया है। निरीक्षण के दौरान रेल पथ यातायात, इंटरलॉकिंग, विद्युतीकरण, शिफ्टिंग और सिग्नल से संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
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