{"_id":"dfef9a4488c2b888c15962e9e0826d5f","slug":"do-not-ignore-the-standards-infrastructure-of-bridges-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलों के आधारभूत ढांचे में न हो मानकों की अनदेखी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलों के आधारभूत ढांचे में न हो मानकों की अनदेखी
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 18 Dec 2015 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुड़की। आईआईटी के सिविल डिपार्टमेंट की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस हाइड्रो-2015 के तकनीकी सत्र में व्याख्यान देते हुए दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एसके मजूमदार ने कहा कि पुल, बैराज और रेगुलेटर आदि जल परियोजनाओं के आधारभूत ढांचे में मानकों के साथ अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नदी की प्रकृति के अनुसार नींव की गहराई और इसकी मजबूती के लिए तकनीकी मानदंड लागू किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विज्ञापन
संस्थान के ओपी जैन सभागार में आयोजित कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रो. मजूमदार ने पुलों के स्तंभ बनाते समय इसकी नींव को इंडियन रोड कांग्रेस, इंडियन स्टैंडर्ड और रेलवे विभाग के स्टैंडर्ड को ध्यान में रखकर जरूरी उपाय अमल में लाने चाहिए। कहा कि नदियों में यदि पुलों के स्तंभ की गहराई मानकों के अनुरूप नहीं होगी तो नदियों की गहराई में अंतर आने के चलते स्तंभ की मजबूती भी खत्म हो जाएगी। इस दौरान जर्मन वैज्ञानिक मार्कस डिस्से ने चाइना की तरिम नदी पर अध्ययन प्रस्तुत करते हुए कहा कि किसी भी नदी का उसके समग्र रूप में अध्ययन होना चाहिए और फिर पानी की उपलब्धता के हिसाब से प्रबंधन किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
इस दौरान उन्होंने ड्रिप इरीगेशन के जरिए फसलों को जड़ों से सिंचित किए जाने की विधि बताई। कहा कि इस विधि से विदेशों में पानी की कम मात्रा में ज्यादा से ज्यादा फसलों की सिंचाई की जा रही है। इसके अलावा कांफ्रेंस में टेक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रो. वीपी सिंह ने जल परियोजनाओं में एंट्रोपी बेस्ड तकनीकी के इस्तेमाल की जानकारी दी। शोधार्थी ज्योति चौबे ने सोर्स आफ आइडेंटिटी मॉडल के जरिए प्रदूषण के लिए जिम्मेदार संस्थान की नदी से दूरी ज्ञात करने की तकनीक बताई। इस दौरान कांफ्रेंस के आयोजक सचिव प्रो. जुल्फिकार अहमद, प्रो. दीपक कश्यप आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन