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रिलीव होने के बाद भी छुट्टी पर बताता था करोड़ीमल
ब्यूूराो/ अमर उजाला रुड़की
Updated Tue, 17 May 2016 12:00 AM IST
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रुड़की। किसानों की मेहनत की कमाई डकार कर करोड़पति बना चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार गर्ग अपने कर्मियों को भ्रमित करता था। गर्ग रिलीव होने के बाद भी कर्मियों को ट्रांसफर होने की बात न बताकर केवल छुट्टी पर होने की बात बताता था। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसे अपना तबादला रुकने की पूरी उम्मीद थी।
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चकबंदी विभाग में मंगलौर क्षेत्र के किसानों की चकबंदी करने वाला चकबंदी अधिकारी प्रदीप कुमार गर्ग करीब 18 साल से यहां तैनात था। लेकिन 18 नवंबर को गर्ग का ट्रांसफर ऊधमसिंह नगर कर दिया गया था। लेकिन अपनी पहुंच के चलते 30 मार्च तक ट्रांसफर रुकवा लिया था। लेकिन वह इसके बाद भी स्वयं ऊधमसिंह नगर नहीं गया।
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प्रदीप गर्ग का भ्रष्टाचार की काली कमाई किस कदर मुंह लग गई थी उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसे 29 अप्रैल को रिलीव करने के बावजूद वह कर्मचारियों को रिलीव होने की जानकारी न देकर छुट्टी पर होने की बात बताता था। इसके पीछे का कारण माना जा रहा है कि चकबंदी अधिकारी को उम्मीद थी कि उसका फिर से ट्रांसफर रुकने से उसे किसानों को लूटने का मौका मिल जाएगा। अन्य कर्मचारी भी चकबंदी अधिकारी की ओर से गलत जानकारी देने से खुश नहीं थे। चकबंदी अधिकारी की कोर्ट में 491 मुकदमें चल रहे हैं। रिलीव हो जाने से पिछले 17 दिनों से किसी की सुनवाई नहीं हो रही थी। किसानों को बस तारीख पर तारीख मिल रही थी।
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उधर, एसओसी डीएस नेगी का कहना है कि प्रदीप कुमार गर्ग के क्षेत्र के गांवों को अन्य अधिकारियों को जल्द डीएम की अनुमति मिलने के बाद दे दिया जाएगा। जिससे किसानों के वादों का निस्तारण एवं खेतों की चकबंदी प्रक्रिया शुरू हो सके।