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अब खाली पड़ी भूमि में फ्लैट बनाकर किराये पर दे सकेंगे विभाग
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रुड़की गणेशपुर रेलवे रोड पर वेंडिंग जोन बनाने के लिए पैमाइश करने पहुंची नगर निगम की टीम।
- फोटो : ROORKEE
अब सरकारी विभाग भी अपनी खाली जमीन पर फ्लैट आदि बनाकर उसे किराये पर दे सकेंगे। हालांकि विभाग सरकारी दरों पर तय किराया ही वसूल सकेगा। इससे प्रवासी मजदूरों, बेघरों, सरकारी और गैरसरकारी नौकरी पेशा लोगों और बाहर से आकर पढ़ाई कर रहे या किसी प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे छात्रों को सस्ती दरों पर आशियाना मिल सकेगा। केंद्र सरकार की ओर से लॉकडाउन के बाद लांच की गई इस योजना पर रुड़की नगर निगम ने काम शुरू कर दिया है। इसके लिए विभिन्न सरकारी विभागों को पत्र भेजकर खाली जमीन के बाबत जानकारी मांगी गई है।
खासतौर पर शहरों में पढ़ने के लिए आने वाले छात्रों, विभिन्न सरकारी और प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने के लिए अन्य प्रदेशों से पहुंच रहे लोगों के सामने सस्ती दर पर किराये का मकान ढूंढना बड़ी चुनौती होती है। साथ ही साथ जो भवन किराये पर मिलते भी हैं, उनकी शर्तें भी बड़ी अजीबोगरीब होती है। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए सस्ते मकान तलाशने की सबसे बड़ी समस्या होती है। लॉकडाउन के बाद से समस्या और ज्यादा गंभीर हो गई है। वहीं अब केंद्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एक योजना लांच की है। इस योजना को लागू करने में नगर निगम अगर दिलचस्पी दिखाता है तो आने वाले दिनों में हजारों लोगों को सस्ते मकान आसानी पर किराये पर उपलब्ध हो जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से करीब दो माह पूर्व लांच की गई इस योजना का नाम अफोर्डेबल रेटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) है। नगर निगम के शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ आशुतोष गुसाईं ने बताया कि इस योजना में ऊर्जा निगम, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सालय समेत कोई भी सरकारी विभाग सहभागिता निभा सकता है। इसके लिए दस दिन पहले सभी विभागों को पत्र भेजकर उनके यहां खाली भूमि का ब्यौरा मांगा गया है। ब्योरा मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
पीपीपी मोड़ में प्राइवेट कंपनियां कर सकेंगी भागीदारी
केंद्र सरकार की एआरएचसी योजना के तहत सरकारी विभागों की खाली पड़ी जमीनों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड़ में बिल्डिंग बनाए जाने का प्रावधान है। शर्तों के तहत प्राइवेट कंपनियां इसमें भागीदारी निभा सकती है। हालांकि अभी स्थानीय स्तर पर यह साफ नहीं है कि पीपीपी मोड़ में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी कितनी होगी। शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ आशुतोष गुसाईं ने बताया कि फिलहाल योजना शुरुआती चरण में हैं। शासन की ओर से जो भी गाइडलाइन आएगी, उसी के अनुरूप आगे की योजना तय की जाएगी।
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खाली पड़े सरकारी भवनों को भी मिलेगा किराया
केंद्र सरकार अफोर्डेबल रेटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) योजना के तहत सरकारी विभागों की खाली पड़े भवनों का भी किराये के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इन भवनों को नगर निगम जरूरतमंदों को सस्ते किराये पर देगा। विभाग अनुमति देता है तो नगर निगम इसके लिए निर्धारित किराये की दरों पर जरूरतमंदों को भवन अलॉट करेगा। इससे काफी हद तक शहरों में रह रहे लोगों को समस्या का समाधान हो सकेगा।
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खासतौर पर शहरों में पढ़ने के लिए आने वाले छात्रों, विभिन्न सरकारी और प्राइवेट कंपनियों में नौकरी करने के लिए अन्य प्रदेशों से पहुंच रहे लोगों के सामने सस्ती दर पर किराये का मकान ढूंढना बड़ी चुनौती होती है। साथ ही साथ जो भवन किराये पर मिलते भी हैं, उनकी शर्तें भी बड़ी अजीबोगरीब होती है। मध्यम वर्गीय परिवार के लिए सस्ते मकान तलाशने की सबसे बड़ी समस्या होती है। लॉकडाउन के बाद से समस्या और ज्यादा गंभीर हो गई है। वहीं अब केंद्र सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए एक योजना लांच की है। इस योजना को लागू करने में नगर निगम अगर दिलचस्पी दिखाता है तो आने वाले दिनों में हजारों लोगों को सस्ते मकान आसानी पर किराये पर उपलब्ध हो जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से करीब दो माह पूर्व लांच की गई इस योजना का नाम अफोर्डेबल रेटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) है। नगर निगम के शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ आशुतोष गुसाईं ने बताया कि इस योजना में ऊर्जा निगम, सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सालय समेत कोई भी सरकारी विभाग सहभागिता निभा सकता है। इसके लिए दस दिन पहले सभी विभागों को पत्र भेजकर उनके यहां खाली भूमि का ब्यौरा मांगा गया है। ब्योरा मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संवाद
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पीपीपी मोड़ में प्राइवेट कंपनियां कर सकेंगी भागीदारी
केंद्र सरकार की एआरएचसी योजना के तहत सरकारी विभागों की खाली पड़ी जमीनों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड़ में बिल्डिंग बनाए जाने का प्रावधान है। शर्तों के तहत प्राइवेट कंपनियां इसमें भागीदारी निभा सकती है। हालांकि अभी स्थानीय स्तर पर यह साफ नहीं है कि पीपीपी मोड़ में प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी कितनी होगी। शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ आशुतोष गुसाईं ने बताया कि फिलहाल योजना शुरुआती चरण में हैं। शासन की ओर से जो भी गाइडलाइन आएगी, उसी के अनुरूप आगे की योजना तय की जाएगी।
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खाली पड़े सरकारी भवनों को भी मिलेगा किराया
केंद्र सरकार अफोर्डेबल रेटल हाउसिंग कांप्लेक्स (एआरएचसी) योजना के तहत सरकारी विभागों की खाली पड़े भवनों का भी किराये के लिए उपयोग किया जा सकेगा। इन भवनों को नगर निगम जरूरतमंदों को सस्ते किराये पर देगा। विभाग अनुमति देता है तो नगर निगम इसके लिए निर्धारित किराये की दरों पर जरूरतमंदों को भवन अलॉट करेगा। इससे काफी हद तक शहरों में रह रहे लोगों को समस्या का समाधान हो सकेगा।