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सिविल अस्पातल में उमड़ी मरीजों की भीड़
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रुड़की सिविल अस्पताल में पर्चा बनवाने के लिए लगी लोगों की लाइन।
- फोटो : ROORKEE
सिविल अस्पताल में सप्ताह के पहले दिन मरीजों की भारी भीड़ उमड़ी। इस समय जहां आए दिन अस्पताल में 250 से 300 की ओपीडी हो रही है तो वहीं सोमवार को करीब 400 मरीज अस्पताल पहुंचे। कुछ मरीजों को एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते निराश भी लौटना पड़ा।
सिविल अस्पताल में रुड़की के अलावा मंगलौर, भगवानपुर, सालियर, नारसन, कलियर, झबरेड़ा आदि कस्बों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां आए दिन सामान्य तौर पर 600 से 800 तक की ओपीडी होती है। अब जबकि हेल्दी सीजन चल रहा है तो यहां ओपीडी सिमटकर करीब 200 तक पहुंच गई है। वहीं, सप्ताह के पहले दिन सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रहती है। इसलिए सोमवार को अस्पताल में भारी भीड़ देखने को मिली और करीब 400 तक की ओपीडी हुई। इसमें अधिकतर मरीज खांसी, बुखार और जुकाम के शामिल थे। करीब 100 मरीज हड्डी रोगों से संबंधित थे।
वहीं, सोमवार को बहुत से मरीजों को बिना इलाज के निराश भी लौटना पड़ा। क्योंकि, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते डीईआईसी यूनिट के साथ ही किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, पैथोलॉजी लैब और लेबर रूम के अधिकतर काम ठप पड़े हैं। हालांकि, अस्पताल में एक प्राइवेट लैब खुले होने के चलते खून आदि के सैंपल देने में लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं आई। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि हड़ताल का मरीजों पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। कुछ जगह मरीजों को दिक्कत आ रही है। वहां के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है। सोमवार को अक्सर भीड़ ज्यादा देखने को मिलती है।
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सिविल अस्पताल में रुड़की के अलावा मंगलौर, भगवानपुर, सालियर, नारसन, कलियर, झबरेड़ा आदि कस्बों से भी मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां आए दिन सामान्य तौर पर 600 से 800 तक की ओपीडी होती है। अब जबकि हेल्दी सीजन चल रहा है तो यहां ओपीडी सिमटकर करीब 200 तक पहुंच गई है। वहीं, सप्ताह के पहले दिन सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ रहती है। इसलिए सोमवार को अस्पताल में भारी भीड़ देखने को मिली और करीब 400 तक की ओपीडी हुई। इसमें अधिकतर मरीज खांसी, बुखार और जुकाम के शामिल थे। करीब 100 मरीज हड्डी रोगों से संबंधित थे।
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वहीं, सोमवार को बहुत से मरीजों को बिना इलाज के निराश भी लौटना पड़ा। क्योंकि, एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते डीईआईसी यूनिट के साथ ही किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम, पैथोलॉजी लैब और लेबर रूम के अधिकतर काम ठप पड़े हैं। हालांकि, अस्पताल में एक प्राइवेट लैब खुले होने के चलते खून आदि के सैंपल देने में लोगों को ज्यादा दिक्कत नहीं आई। सीएमएस डॉ. संजय कंसल ने बताया कि हड़ताल का मरीजों पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है। कुछ जगह मरीजों को दिक्कत आ रही है। वहां के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है। सोमवार को अक्सर भीड़ ज्यादा देखने को मिलती है।
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