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स्वच्छ गंगा मिशन पूर्ण करना चुनौती: चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो रुड़की
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:49 PM IST
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प्रत्येक वर्ष आईआईटी में होने वाला तीन दिवसीय काग्निजेंस महोत्सव इस बार 24, 25 और 26 मार्च को होने जा रहा है। इसमें विभिन्न तकनीकी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सोमवार को ‘अविरल गंगा कार्यक्रम’ में संस्थान निदेशक ने इसकी घोषणा करते हुए स्वच्छ गंगा के मिशन को पूरा करना बड़ी चुनौती बताया। साथ ही पर्यावरण एवं गंगा को स्वच्छ बनाने की दिशा में काम कर रहे पांच समाजसेवियों को पुरस्कृत किया।
आईआईटी में आयोजित होने वाले काग्निजेंस-2017 की थीम को ‘यूरेका 2.0’ नाम दिया गया है। इसे महान आविष्कार आर्किमिडीज के सिद्धांत से जोड़कर देखा जाता है। 24 से 26 मार्च तक चलने वाले महोत्सव के कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों में पर्यावरण एवं अविरल गंगा, मेंटर इलनेस और कैशलेस इकॉनोमी को शामिल किया गया है। पहली श्रेणी पर्यावरण एवं अविरल गंगा कार्यक्रम का आयोजन सोमवार को संस्थान के मल्टी एक्टिविटी सेंटर में आयोजित हुआ। इसमें गंगा को बचाने में जुटे चार समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने कहा कि गंगा को बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना होगा कि वह क्या योगदान कर सकता है। उन्होंने छात्रों से गंगा को स्वच्छ बनाने में तकनीकी योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान पीपुल रिसर्च इंस्टीट्यूट दिल्ली के संस्थापक डा. रवि चोपड़ा, इंडिया वाटर फाउंडेशन के चेयरपर्सन डा. अरविंद कुमार और आईआईटी कानपुर के प्रो. विनोद तारे ने अविरल स्वच्छ गंगा एवं पर्यावरण को बचाने की हिमायत की। इन्होंने विज्ञान और मानवीय प्रयासों के जरिये प्रदूषित और संकरी हो रही गंगा को बचाने का आह्वान किया। इस मौके पर कॉग्निजेंस के कन्वीनर डा. संजय अग्रवाल, डा. स्मिता झा आदि मौजूद रहे।
इन समाजसेवियों को किया सम्मानित
-गंगा संरक्षण की दिशा में काम कर रहे पांच समाजसेवियों को पुरस्कृत किया गया। इसमें गंगा बचाओ आंदोलन 2000 को शुरू करने वाले विकास चंद्रा, हिमालय चिपको फाउंडेशन के संस्थापक जयप्रकाश डबराल, ओमनी प्रजेंट रोबोट टेक के संस्थापक आकाश सिन्हा, हेल्प अस ग्रीन के सह संस्थापक अंकित अग्रवाल और वेडीटम गंगा के सह संस्थापक सिद्धांत अग्रवाल को पुरस्कृत किया गया। इनमें ओमनी प्रजेंट रोबोट टेक के संस्थापक आकाश सिन्हा ने एक ऐसा रोबोट बनाया है, जो ड्रोन की तरह पानी के ऊपर सतह पर गंगा के भीतर की गंदगी का विश्लेषण कर जानकारी देगा।
आईआईटी में आयोजित होने वाले काग्निजेंस-2017 की थीम को ‘यूरेका 2.0’ नाम दिया गया है। इसे महान आविष्कार आर्किमिडीज के सिद्धांत से जोड़कर देखा जाता है। 24 से 26 मार्च तक चलने वाले महोत्सव के कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इन श्रेणियों में पर्यावरण एवं अविरल गंगा, मेंटर इलनेस और कैशलेस इकॉनोमी को शामिल किया गया है। पहली श्रेणी पर्यावरण एवं अविरल गंगा कार्यक्रम का आयोजन सोमवार को संस्थान के मल्टी एक्टिविटी सेंटर में आयोजित हुआ। इसमें गंगा को बचाने में जुटे चार समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने कहा कि गंगा को बचाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना होगा कि वह क्या योगदान कर सकता है। उन्होंने छात्रों से गंगा को स्वच्छ बनाने में तकनीकी योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान पीपुल रिसर्च इंस्टीट्यूट दिल्ली के संस्थापक डा. रवि चोपड़ा, इंडिया वाटर फाउंडेशन के चेयरपर्सन डा. अरविंद कुमार और आईआईटी कानपुर के प्रो. विनोद तारे ने अविरल स्वच्छ गंगा एवं पर्यावरण को बचाने की हिमायत की। इन्होंने विज्ञान और मानवीय प्रयासों के जरिये प्रदूषित और संकरी हो रही गंगा को बचाने का आह्वान किया। इस मौके पर कॉग्निजेंस के कन्वीनर डा. संजय अग्रवाल, डा. स्मिता झा आदि मौजूद रहे।
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इन समाजसेवियों को किया सम्मानित
-गंगा संरक्षण की दिशा में काम कर रहे पांच समाजसेवियों को पुरस्कृत किया गया। इसमें गंगा बचाओ आंदोलन 2000 को शुरू करने वाले विकास चंद्रा, हिमालय चिपको फाउंडेशन के संस्थापक जयप्रकाश डबराल, ओमनी प्रजेंट रोबोट टेक के संस्थापक आकाश सिन्हा, हेल्प अस ग्रीन के सह संस्थापक अंकित अग्रवाल और वेडीटम गंगा के सह संस्थापक सिद्धांत अग्रवाल को पुरस्कृत किया गया। इनमें ओमनी प्रजेंट रोबोट टेक के संस्थापक आकाश सिन्हा ने एक ऐसा रोबोट बनाया है, जो ड्रोन की तरह पानी के ऊपर सतह पर गंगा के भीतर की गंदगी का विश्लेषण कर जानकारी देगा।
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