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नहाय-खाय के साथ कल से होगी छठ पूजा

Mon, 16 Nov 2020 11:30 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2020 11:30 PM IST
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Chhath Puja will be held from tomorrow with a bath
रुड़की। पूर्वांचल का प्रसिद्ध त्योहार छठ पूजा नहाय-खाय के साथ बुधवार से शुरू हो जाएगी। इसके लिए तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। सोमवार को श्रद्धालुओं ने गंगनहर के घाटों पर पहुंचकर पूजा अर्चना के लिए अपने-अपने स्थानों को चूने से लाइन खींचकर चिह्नित किया।
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रुड़की और आसपास के इलाकों में पूर्वांचल के बीस हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। पूर्वांचल के लिए छठ पूजा का विशेष महत्व है। 18 नवंबर से शुरू हो रही छठ पूजा के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह है, लेकिन कोरोना के चलते इस बार बड़े और सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा। प्रशासन की गाइडलाइन को मानते हुए श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत रूप से ही पूजा अर्चना करने का निर्णय लिया। पूर्वांचल एकता समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय और उपाध्यक्ष कृष्णा निगम ने बताया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से समिति के पदाधिकारियों की बैठक हुई है। इसमें व्यक्तिगत रूप से पूजा अर्चना करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, दूसरी ओर श्रद्धालुओं ने सोमवार को गंगनहर किनारे पूजा के लिए स्थानों को आरक्षित कर लिया है। मंगलवार की रात सभी तैयारियां पूरी करने के बाद 18 नवंबर की सुबह नहाय-खाय के साथ निर्जल व्रत रखकर पूजा अर्चना शुरू हो जाएगी जो कि 21 नवंबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो जाएगी।
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खीर और लौकी, चने की दाल से होगा व्रत पूरा
18 नवंबर की सुबह स्नान एवं निर्जल व्रत के संकल्प के साथ ही नहाय-खाय की प्रक्रिया के साथ छठ पूजा का शुभारंभ होगा। श्रद्धालु गंगनहर के किनारे सूर्य देव की पूजा अर्चना करेंगे। शाम के समय खीर और चावल की रोटी से व्रत खोला जाएगा। इसके बाद 19 नवंबर को पूरे दिन निर्जल व्रत रखने के बाद शाम के समय देशी घी में बनी लौकी चने की दाल और चावल की रोटी से व्रत खोला जाएगा। 20 नवंबर को दिनभर निर्जल व्रत रखने के बाद शाम को ढलते सूरज को अर्घ्य दिया जाएगा। इसमें खासतौर पर आटे और देशी घी से बने खस्ता का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद 21 नवंबर को उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही पर्व का समापन होगा।
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