{"_id":"5dbdd0cd8ebc3e93d0286fd5","slug":"chhath-puja-by-offering-argh-sun-roorkee-news-drn3247647175","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्त सूर्य को अर्घ्य देकर की छठ पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्त सूर्य को अर्घ्य देकर की छठ पूजा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुड़की/लक्सर।
महिला व पुरुषों ने शनिवार को निर्जला व्रत रखकर अंधेरे को दूर करने की मंगलकामना के साथ अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की। रविवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास का पारणा किया जाएगा।
शनिवार की शाम गंगनहर किनारे बने घाटों पर बड़ी संख्या में महिला व पुरुष जमा हुए। इस दौरान महिला व पुरुषों ने छठ पर्व की एक-दूसरे की बधाई दी। इस दौरान पूजा से पहले गंगहनर किनारे बने घाटों को सुंदरता की तरह सजाया गया। इसके बाद महिला व पुरुषों ने गंगनहर किनारे घाटें पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की। जबकि रविवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास खोलेंगे। वहीं, लक्सर क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिला व पुरुषों ने छठ का पर्व मनाया। छठ पर्व पर चीन मिल में सौंदर्यीकरण कर पूजा की गई। छठ पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ रही। रुड़की आईआईटी स्थित श्री सरस्वती मंदिर के पूजारी आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया व्रत में चावल और गुड़ की खीर बनाने की परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य की कृपा से ही फसल होती है। इसलिए सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण करना चाहिए। छठ पर्व के समय चावल और गन्ना तैयार होकर घर आता है। इसलिए गन्ने से तैयार गुड़ और नए धान के चावल का प्रसाद सूर्य देव को भेंट किया जाता है।
---------
विज्ञापन
महिला व पुरुषों ने शनिवार को निर्जला व्रत रखकर अंधेरे को दूर करने की मंगलकामना के साथ अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की। रविवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास का पारणा किया जाएगा।
शनिवार की शाम गंगनहर किनारे बने घाटों पर बड़ी संख्या में महिला व पुरुष जमा हुए। इस दौरान महिला व पुरुषों ने छठ पर्व की एक-दूसरे की बधाई दी। इस दौरान पूजा से पहले गंगहनर किनारे बने घाटों को सुंदरता की तरह सजाया गया। इसके बाद महिला व पुरुषों ने गंगनहर किनारे घाटें पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा की। जबकि रविवार की सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर उपवास खोलेंगे। वहीं, लक्सर क्षेत्र में बड़ी संख्या में महिला व पुरुषों ने छठ का पर्व मनाया। छठ पर्व पर चीन मिल में सौंदर्यीकरण कर पूजा की गई। छठ पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ रही। रुड़की आईआईटी स्थित श्री सरस्वती मंदिर के पूजारी आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया व्रत में चावल और गुड़ की खीर बनाने की परंपरा के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण है। शास्त्रों के अनुसार सूर्य की कृपा से ही फसल होती है। इसलिए सूर्य को सबसे पहले नई फसल का प्रसाद अर्पण करना चाहिए। छठ पर्व के समय चावल और गन्ना तैयार होकर घर आता है। इसलिए गन्ने से तैयार गुड़ और नए धान के चावल का प्रसाद सूर्य देव को भेंट किया जाता है।
विज्ञापन
---------