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यहां रहना किसी सजा से कम नहीं
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रुड़की स्थित कृष्णा नगर में क्षतिग्रस्त सड़क व पानी की निकासी न होने के कारण भरा पानी।
- फोटो : ROORKEE
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सुबह उठकर यदि आपका बाहर सड़क पर घूमने का मन करे और घर से बाहर कदम रखते ही आपको एक फीट गहरे गंदे पानी में पांव रखना पड़े तो आपका पूरा दिन बदतर निकलेगा। साथ ही यही स्थिति आपकी दिनचर्या में शामिल हो जाए तो ऐसे जीवन को आप किसी सजा से कम नहीं मानेंगे। इस स्थिति से वर्तमान में शहर के पश्चिम-दक्षिण छोर में बसी कृष्णानगर, शास्त्रीनगर और शिवपुरम आदि कॉलोनियों के लोगों को आए दिन गुजरना पड़ रहा है। इन कॉलोनियों में जलभराव की दशकों पुरानी समस्या अब नासूर बन चुकी है। चुनाव और नेताओं की बात सुनकर यहां के लोग भड़क जाते हैं। कई गलियों के लोगों को पांच से सात साल बाद भी सड़क नसीब नहीं हुई है।
शहर के पश्चिम-दक्षिण छोर में बसा कृष्णानगर कभी सलेमपुर, रहीमपुर और सफीपुर गांव की बढ़ती आबादी से मिलकर बना था। धीरे-धीरे यहां अंधाधुंध प्लॉटिंग हुई तो एक साथ कई कॉलोनियां अस्तित्व में आ गईं। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोग कॉलोनियों में बसते चले गए। उस दौरान यहां पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी। हालांकि तब इस समस्या को लोगों ने दरकिनार कर मकान बनाने जारी रखे और पानी की निकासी आसपास के प्लॉटों में होती रही। धीरे-धीरे आबादी बढ़ने पर कृष्णानगर ने विस्तार रूप ले लिया और शास्त्रीनगर, सलेमपुर और शिवपुरम आदि कॉलोनियां भी विकसित हो गईं। इन कॉलोनियों में भी जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। लोगों ने भी बिना सोचे-समझे प्रॉपर्टी डीलरों से प्लाट खरीदकर मकान बनाने शुरू कर दिए। हालांकि इसी बीच यह इलाका नगर निगम में शामिल हो गया। तब लोगों को जलनिकासी और सड़कों की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद नजर आई, लेकिन हुआ कुछ नहीं। स्थिति यह है कि पानी निकासी नहीं होने से लोगों की गलियों में पानी भर गया। इस कारण आए दिन यहां लोगों के बीच मारपीट होना आम बात हो गई है।
घरों के सामने लगे हैं बोर्ड, मकान बिकाऊ है
इन कॉलोनियों में जलभराव और सड़कों की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद खो बैठे लोगों ने अब यहां से पलायन का मन बना लिया है। ऐसे में लोगों ने अपने-अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ का बोर्ड लगा दिया है। हालांकि इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि वे यहां नगर निगम अधिकारियों, विधायकों और अन्य प्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार होकर पलायन करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि शुरू में सुनहरे सपने दिखाकर नगर निगम में शामिल कराया गया। अब उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं है। ऐेसे में मकानों को बेचकर कही दूसरी जगह घर बनाएंगे।
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कॉलोनियों के लोगों ने रखी बात
शुरू में यहां जब मकान बनाया तो लोगों ने कहा था कि पानी निकासी की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी। मकान बनाने के बाद पूरी गली में जलभराव हो गया। ऐसे में दो साल से नारकीय जीवन जी रहे हैं। पानी निकासी के लिए आए दिन पड़ोसियों ने झगड़ा और मारपीट होना आम बात हो गई है।
-बंटी, कृष्णानगर
पहले यह क्षेत्र सलेमपुर गांव का हिस्सा था। तब सड़कों और पानी निकासी की व्यवस्था के लिए प्रधान को बोल दिया करते थे। वर्ष 2019 में यह क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया था। इसके बाद यहां अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने आकर नहीं देखा। सड़कों पर भरे पानी को देखकर मेहमानों को बुलाने में भी शर्म आने लगी है।
-कंवर सिंह, कृष्णानगर
जब मकान बनाया था तो उम्मीद थी कि यहां सड़कें भी जल्द ही बन जाएंगी, लेकिन मकान बनाए आज कई साल हो गए हैं। इसके बावजूद उनके घरों के सामने सड़क नहीं बनाई गई। कई गलियां ऐसी हैं, जहां सड़क का नामोनिशां तक नहीं है। जनप्रतिनिधि भी आकर उनकी हालत देखने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
-अनिल सैनी, शिवपुरम
पिछली बार चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में नेता यहां वोट मांगने आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि सत्ता में आते ही सड़क और जलनिकासी की समस्या हल कराई जाएगी। लोगों ने एकमत होकर अपने यहां से विधायक भी बनाया, लेकिन इसके बाद आज तक जनप्रतिनिधियों ने यहां आकर नहीं देखा।
- विपिन कुमार, शास्त्रीनगर
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शहर के पश्चिम-दक्षिण छोर में बसा कृष्णानगर कभी सलेमपुर, रहीमपुर और सफीपुर गांव की बढ़ती आबादी से मिलकर बना था। धीरे-धीरे यहां अंधाधुंध प्लॉटिंग हुई तो एक साथ कई कॉलोनियां अस्तित्व में आ गईं। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्र के लोग कॉलोनियों में बसते चले गए। उस दौरान यहां पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं थी। हालांकि तब इस समस्या को लोगों ने दरकिनार कर मकान बनाने जारी रखे और पानी की निकासी आसपास के प्लॉटों में होती रही। धीरे-धीरे आबादी बढ़ने पर कृष्णानगर ने विस्तार रूप ले लिया और शास्त्रीनगर, सलेमपुर और शिवपुरम आदि कॉलोनियां भी विकसित हो गईं। इन कॉलोनियों में भी जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। लोगों ने भी बिना सोचे-समझे प्रॉपर्टी डीलरों से प्लाट खरीदकर मकान बनाने शुरू कर दिए। हालांकि इसी बीच यह इलाका नगर निगम में शामिल हो गया। तब लोगों को जलनिकासी और सड़कों की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद नजर आई, लेकिन हुआ कुछ नहीं। स्थिति यह है कि पानी निकासी नहीं होने से लोगों की गलियों में पानी भर गया। इस कारण आए दिन यहां लोगों के बीच मारपीट होना आम बात हो गई है।
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घरों के सामने लगे हैं बोर्ड, मकान बिकाऊ है
इन कॉलोनियों में जलभराव और सड़कों की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद खो बैठे लोगों ने अब यहां से पलायन का मन बना लिया है। ऐसे में लोगों ने अपने-अपने घरों पर ‘मकान बिकाऊ है’ का बोर्ड लगा दिया है। हालांकि इसमें स्पष्ट लिखा हुआ है कि वे यहां नगर निगम अधिकारियों, विधायकों और अन्य प्रतिनिधियों की उपेक्षा का शिकार होकर पलायन करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि शुरू में सुनहरे सपने दिखाकर नगर निगम में शामिल कराया गया। अब उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं है। ऐेसे में मकानों को बेचकर कही दूसरी जगह घर बनाएंगे।
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कॉलोनियों के लोगों ने रखी बात
शुरू में यहां जब मकान बनाया तो लोगों ने कहा था कि पानी निकासी की समस्या जल्द ही खत्म हो जाएगी। मकान बनाने के बाद पूरी गली में जलभराव हो गया। ऐसे में दो साल से नारकीय जीवन जी रहे हैं। पानी निकासी के लिए आए दिन पड़ोसियों ने झगड़ा और मारपीट होना आम बात हो गई है।
-बंटी, कृष्णानगर
पहले यह क्षेत्र सलेमपुर गांव का हिस्सा था। तब सड़कों और पानी निकासी की व्यवस्था के लिए प्रधान को बोल दिया करते थे। वर्ष 2019 में यह क्षेत्र नगर निगम में शामिल हो गया था। इसके बाद यहां अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने आकर नहीं देखा। सड़कों पर भरे पानी को देखकर मेहमानों को बुलाने में भी शर्म आने लगी है।
-कंवर सिंह, कृष्णानगर
जब मकान बनाया था तो उम्मीद थी कि यहां सड़कें भी जल्द ही बन जाएंगी, लेकिन मकान बनाए आज कई साल हो गए हैं। इसके बावजूद उनके घरों के सामने सड़क नहीं बनाई गई। कई गलियां ऐसी हैं, जहां सड़क का नामोनिशां तक नहीं है। जनप्रतिनिधि भी आकर उनकी हालत देखने की जहमत नहीं उठा रहे हैं।
-अनिल सैनी, शिवपुरम
पिछली बार चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में नेता यहां वोट मांगने आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया था कि सत्ता में आते ही सड़क और जलनिकासी की समस्या हल कराई जाएगी। लोगों ने एकमत होकर अपने यहां से विधायक भी बनाया, लेकिन इसके बाद आज तक जनप्रतिनिधियों ने यहां आकर नहीं देखा।
- विपिन कुमार, शास्त्रीनगर