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डेढ साल बाद स्कूलों में दिखेगी बच्चों की चहल-पहल
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राजकीय प्राथमिक विद्यालय तांशीपुर में सफाई करती कर्मचारी।
- फोटो : ROORKEE
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करीब डेढ़ साल के इंतजार के बाद आखिरकार आज प्राथमिक स्कूलों में भी घंटी सुनाई देगी। स्कूल जाने के लिए बच्चों ने बैग भी तैयार कर लिए हैं। आज से शहर के सभी सरकारी स्कूलों में एक से पांचवीं तक की कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। नई एसओपी के तहत बच्चों की कक्षाएं सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक केवल तीन घंटे ही चलेंगी। हालांकि, निजी स्कूल फिलहाल एक से पांचवीं तक के बच्चों को नहीं बुला रहे हैं।
मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते सरकार ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए थे। छात्र घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। कुछ महीने बाद कक्षा छह से ऊपर के छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज तो खुले, लेकिन अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के चलते फिर सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। इसके बाद दो अगस्त को सरकार ने कक्षा नौ से 12वीं तक के और फिर 16 अगस्त से कक्षा छह से नौ तक के स्कूल खोलने के आदेश दिए थे। अब 21 सितंबर यानी आज से कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों के लिए भी एसओपी जारी कर दी गई है। सरकारी स्कूल प्रबंधकों ने तैयारी पूरी कर ली है। कक्षाओं में सैनिटाइजेशन करा दिया गया है। बरसात होने के चलते स्कूल प्रांगण में जो घास और झाड़ियां उग आई थीं, उसे भी साफ करवाया गया। कक्षाओं में सीटों को शारीरिक दूरी के नियम के अनुसार लगाया गया है। कक्षाएं सुबह नौ से बारह बजे तक तीन घंटे चलेंगी।
मामला छोटे बच्चों का होने के चलते एहतियात के तौर पर हर स्कूल में एक टीचर की नियुक्ति प्रबंधक के तौर पर की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों को मास्क पहनाने, एक-दूसरे से दूर रहकर खेलने और शारीरिक दूरी से बैठाने की होगी। साथ ही बच्चों को तीन दिन के अंदर अभिभावकों से सहमति पत्र भी लाना होगा। वहीं, स्कूल खोलने को लेकर प्राइवेट प्रबंधकों की कोई तैयारी नहीं है। निजी स्कूल प्रबंधकों ने एक से पांच तक की कक्षाएं नहीं चलाने का मन बनाया है। यही कारण है कि एक दिन पहले तक अभिभावकों को स्कूल खोलने को लेकर कोई सूचना नहीं दी गई है।
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स्कूल खोलने का सरकार का फैसला सराहनीय है। सरकारी स्कूल के बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं पूरी तरह से नहीं ले पा रहे थे। इससे उनका भारी नुकसान हो रहा था। आज से स्कूल खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्कूलों की साफ-सफाई के साथ ही कमरों को सैनिटाइज कर दिया गया है। हर स्कूल में बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
-राजीव शर्मा, जिला संयुक्त मंत्री, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ
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पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने को लेकर निजी स्कूल प्रबंधक तैयार नहीं हैं। क्योंकि, अभी कक्षा छह से 12 तक की कक्षाओं में ही छात्र संख्या बेहद कम है। ऐसे में स्कूल खोलने से प्रबंधकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। यदि अभिभावक एकमत होकर स्कूल खोलने पर सहमति देंगे तो विचार किया जाएगा।
-माला चौहान, कोऑर्डिनेटर, सीबीएससी, रुड़की जोन
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मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते सरकार ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए थे। छात्र घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे थे। कुछ महीने बाद कक्षा छह से ऊपर के छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज तो खुले, लेकिन अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर के चलते फिर सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने पड़े। इसके बाद दो अगस्त को सरकार ने कक्षा नौ से 12वीं तक के और फिर 16 अगस्त से कक्षा छह से नौ तक के स्कूल खोलने के आदेश दिए थे। अब 21 सितंबर यानी आज से कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों के लिए भी एसओपी जारी कर दी गई है। सरकारी स्कूल प्रबंधकों ने तैयारी पूरी कर ली है। कक्षाओं में सैनिटाइजेशन करा दिया गया है। बरसात होने के चलते स्कूल प्रांगण में जो घास और झाड़ियां उग आई थीं, उसे भी साफ करवाया गया। कक्षाओं में सीटों को शारीरिक दूरी के नियम के अनुसार लगाया गया है। कक्षाएं सुबह नौ से बारह बजे तक तीन घंटे चलेंगी।
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मामला छोटे बच्चों का होने के चलते एहतियात के तौर पर हर स्कूल में एक टीचर की नियुक्ति प्रबंधक के तौर पर की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों को मास्क पहनाने, एक-दूसरे से दूर रहकर खेलने और शारीरिक दूरी से बैठाने की होगी। साथ ही बच्चों को तीन दिन के अंदर अभिभावकों से सहमति पत्र भी लाना होगा। वहीं, स्कूल खोलने को लेकर प्राइवेट प्रबंधकों की कोई तैयारी नहीं है। निजी स्कूल प्रबंधकों ने एक से पांच तक की कक्षाएं नहीं चलाने का मन बनाया है। यही कारण है कि एक दिन पहले तक अभिभावकों को स्कूल खोलने को लेकर कोई सूचना नहीं दी गई है।
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स्कूल खोलने का सरकार का फैसला सराहनीय है। सरकारी स्कूल के बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं पूरी तरह से नहीं ले पा रहे थे। इससे उनका भारी नुकसान हो रहा था। आज से स्कूल खोलने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। स्कूलों की साफ-सफाई के साथ ही कमरों को सैनिटाइज कर दिया गया है। हर स्कूल में बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
-राजीव शर्मा, जिला संयुक्त मंत्री, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संघ
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पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोले जाने को लेकर निजी स्कूल प्रबंधक तैयार नहीं हैं। क्योंकि, अभी कक्षा छह से 12 तक की कक्षाओं में ही छात्र संख्या बेहद कम है। ऐसे में स्कूल खोलने से प्रबंधकों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। यदि अभिभावक एकमत होकर स्कूल खोलने पर सहमति देंगे तो विचार किया जाएगा।
-माला चौहान, कोऑर्डिनेटर, सीबीएससी, रुड़की जोन