{"_id":"597b870d4f1c1b1d6d8b45aa","slug":"181501267725-roorkee-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेंटिस्ट बेटी बन गई एसडीएम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेंटिस्ट बेटी बन गई एसडीएम
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:18 AM IST
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस-2012) की परीक्षा में एक डेंटिस्ट की बेटी डा. अपूर्वा सिंह ने छटी रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया। डा. अपूर्वा का कहना है बचपन से ही उसका सपना एसडीएम बनने का था। आज यह सपना परिजनों के सहयोग और उनकी मेहनत ने साकार हो गया।
आदर्श नगर निवासी डा. अपूर्वा के पिता संजीव कुमार बिजनेसमैन हैं। उनकी सिविल लाइंस में एसी आदि की एजेंसी है। मम्मी डा. आंचल मोंटफोर्ट में शिक्षक हैं। घर में एक छोटा भाई रोहन है। उसने इसी साल बीटेक किया है। इसके अलावा घर में दादा चौधरी विजयपाल सिंह, दादी कमला देवी आदि के साथ-साथ ताऊ-ताई हैं। डा. अपूर्वा ने बताया कि उनकी स्कूलिंग सेंट एंस स्कूल से हुई। 10वीं उन्होंने मोंटफोर्ट से की। जबकि 12वीं दिल्ली से की है। उन्होंने सीमा डेंटल कालेज से बीडीएस किया। डा. अपूर्वा ने बताया कि उनके पापा चाहते थे कि वह डाक्टर बने, लेकिन वह एसडीएम बनना चाहती थी। बचपन से उनका सपना यही था। यह चैलेंज था, लेकिन उन्होंने इस चैलेंज को स्वीकार करते हुए डेंटिस्ट की प्रेक्टिस करने के बजाय पीसीएस की तैयारी की। उन्होंने देहरादून स्थित एक कोचिंग में टीचिंग भी कराई। साथ ही पीसीएस की तैयारी भी की। इसके लिए उन्होंने कहीं कोई कोचिंग नहीं ली। टेस्ट सीरीज करती रही और सेल्फ स्टडी पर जोर दिया। परिवार के लोगों ने भी उनकी तैयारी में सहयोग किया। इसका परिणाम आज सबके सामने है। उनका कहना है किसी को कभी हार नहीं माननी चाहिए। लक्ष्य बनाकर तैयारी करते रहे।
विज्ञापन
रुड़की। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (पीसीएस-2012) की परीक्षा में एक डेंटिस्ट की बेटी डा. अपूर्वा सिंह ने छटी रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया। डा. अपूर्वा का कहना है बचपन से ही उसका सपना एसडीएम बनने का था। आज यह सपना परिजनों के सहयोग और उनकी मेहनत ने साकार हो गया।
आदर्श नगर निवासी डा. अपूर्वा के पिता संजीव कुमार बिजनेसमैन हैं। उनकी सिविल लाइंस में एसी आदि की एजेंसी है। मम्मी डा. आंचल मोंटफोर्ट में शिक्षक हैं। घर में एक छोटा भाई रोहन है। उसने इसी साल बीटेक किया है। इसके अलावा घर में दादा चौधरी विजयपाल सिंह, दादी कमला देवी आदि के साथ-साथ ताऊ-ताई हैं। डा. अपूर्वा ने बताया कि उनकी स्कूलिंग सेंट एंस स्कूल से हुई। 10वीं उन्होंने मोंटफोर्ट से की। जबकि 12वीं दिल्ली से की है। उन्होंने सीमा डेंटल कालेज से बीडीएस किया। डा. अपूर्वा ने बताया कि उनके पापा चाहते थे कि वह डाक्टर बने, लेकिन वह एसडीएम बनना चाहती थी। बचपन से उनका सपना यही था। यह चैलेंज था, लेकिन उन्होंने इस चैलेंज को स्वीकार करते हुए डेंटिस्ट की प्रेक्टिस करने के बजाय पीसीएस की तैयारी की। उन्होंने देहरादून स्थित एक कोचिंग में टीचिंग भी कराई। साथ ही पीसीएस की तैयारी भी की। इसके लिए उन्होंने कहीं कोई कोचिंग नहीं ली। टेस्ट सीरीज करती रही और सेल्फ स्टडी पर जोर दिया। परिवार के लोगों ने भी उनकी तैयारी में सहयोग किया। इसका परिणाम आज सबके सामने है। उनका कहना है किसी को कभी हार नहीं माननी चाहिए। लक्ष्य बनाकर तैयारी करते रहे।
विज्ञापन