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आस्था के पथ पर भारतीयता के विविध रंग
Updated Wed, 01 Aug 2018 11:24 PM IST
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मुनीश रियाल
रुड़की। कांवड़ यात्रा महज धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही संस्कृति, आध्यात्म एवं पौराणिकता के रंगों में रंगी भी दिख रही है।
इन दिनों दिल्ली हाईवे पर कांवड़िए तरह-तरह के रंगों में रंगी कांवड़ के साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं। दिल्ली- हरिद्वार हाईवे पर शांतरशाह के पास इंडिया गेट वाली कांवड़ दिखी। कांवड़िए इस कांवड़ के साथ भारतमाता की जय, वंदेमातरम जैसे जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। पूछने पर कांवड़ियों ने बताया कि वह यूपी के गाजियाबाद जिले से आए हैं। कांवड़ जल भरकर लौट रहे हैं। थोड़ी दूर जाकर एक कार में शिव और पार्वती बैठे दिखे। पूछने पर हरियाणा के सोनीपत जिले ज्ञाननगर निवासी कृष्ण सक्सेना ने बताया कि पांच साल से हर साल शिव- पार्वती की मूर्ति को लेकर हरिद्वार आते हैं, और जल भरकर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि सोनीपत में उसकी ट्रेवल्स एजेंसी है। काम अच्छा चल रहा है। अच्छा काम चलने को वह भोले का आशीर्वाद मानते हैं। एक किलोमीटर आगे सड़क के बीचों- बीच भारतवर्ष के नक्शे वाली कांवड़ दिखी। कांवड़िए लक्ष्मण ने बताया कि वह दिल्ली के जहांगीरपुरी से 20 युवाओं के साथ आए हैं। भारत के नक्शे वाली कांवड़ लेकर दिल्ली लौट रहे हैं। उन्होंने बताया यह कांवड़ उन्होंने 40 हजार रुपये में खरीदी है। तीन माह पहले ही आर्डर दिया था। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति की पहचान है।
कांधे पर गंगाजल की 101 कैन लादकर हरियाणा के जींद निवासी राकेश अपनी यात्रा पैदल पूरी कर रहे हैं। राकेश ने बताया कि वह तीन साल से 101 कैन जल हरकी पैड़ी से लेकर जाकर अपने शिवालय में चढ़ा रहे हैं।
इनसेट
तिरंगा बेचकर पैसा कमा रहे युवा
जहां कांवड़िए जल लेकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। वहीं स्थानीय युवा भी कुछ चंद रुपये पाने की लालसा में हाईवे पर झंडे बेचकर लाभ कमा रहे हैं। इमलीखेड़ा के शिवम ने बताया कि छोटा झंडा 40 रुपये और बड़ा झंडा 50 रुपये में बिकता है। वे पूरे दिन झंडे की दुकान लगाते हैं। एक दिन का 200 रुपये मिल जाते हैं।
रुड़की। कांवड़ यात्रा महज धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही संस्कृति, आध्यात्म एवं पौराणिकता के रंगों में रंगी भी दिख रही है।
इन दिनों दिल्ली हाईवे पर कांवड़िए तरह-तरह के रंगों में रंगी कांवड़ के साथ आगे बढ़ते दिख रहे हैं। दिल्ली- हरिद्वार हाईवे पर शांतरशाह के पास इंडिया गेट वाली कांवड़ दिखी। कांवड़िए इस कांवड़ के साथ भारतमाता की जय, वंदेमातरम जैसे जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे। पूछने पर कांवड़ियों ने बताया कि वह यूपी के गाजियाबाद जिले से आए हैं। कांवड़ जल भरकर लौट रहे हैं। थोड़ी दूर जाकर एक कार में शिव और पार्वती बैठे दिखे। पूछने पर हरियाणा के सोनीपत जिले ज्ञाननगर निवासी कृष्ण सक्सेना ने बताया कि पांच साल से हर साल शिव- पार्वती की मूर्ति को लेकर हरिद्वार आते हैं, और जल भरकर ले जाते हैं। उन्होंने बताया कि सोनीपत में उसकी ट्रेवल्स एजेंसी है। काम अच्छा चल रहा है। अच्छा काम चलने को वह भोले का आशीर्वाद मानते हैं। एक किलोमीटर आगे सड़क के बीचों- बीच भारतवर्ष के नक्शे वाली कांवड़ दिखी। कांवड़िए लक्ष्मण ने बताया कि वह दिल्ली के जहांगीरपुरी से 20 युवाओं के साथ आए हैं। भारत के नक्शे वाली कांवड़ लेकर दिल्ली लौट रहे हैं। उन्होंने बताया यह कांवड़ उन्होंने 40 हजार रुपये में खरीदी है। तीन माह पहले ही आर्डर दिया था। उन्होंने कहा कि यह संस्कृति की पहचान है।
कांधे पर गंगाजल की 101 कैन लादकर हरियाणा के जींद निवासी राकेश अपनी यात्रा पैदल पूरी कर रहे हैं। राकेश ने बताया कि वह तीन साल से 101 कैन जल हरकी पैड़ी से लेकर जाकर अपने शिवालय में चढ़ा रहे हैं।
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तिरंगा बेचकर पैसा कमा रहे युवा
जहां कांवड़िए जल लेकर अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। वहीं स्थानीय युवा भी कुछ चंद रुपये पाने की लालसा में हाईवे पर झंडे बेचकर लाभ कमा रहे हैं। इमलीखेड़ा के शिवम ने बताया कि छोटा झंडा 40 रुपये और बड़ा झंडा 50 रुपये में बिकता है। वे पूरे दिन झंडे की दुकान लगाते हैं। एक दिन का 200 रुपये मिल जाते हैं।
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