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जैविक खेती के लिए परम्परागत कृषि विकास योजना
Updated Wed, 09 May 2018 10:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की।
कृषि विकास विभाग की ओर से जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना संचालित होने वाली है। जिले में चार सौ कलस्टर भूमि पर योजना की शुरूआत की जाएगी। इसके लिए विभाग ने किसानों का चिह्नीकरण शुरू कर दिया है।
सरकार की ओर से परंपरागत कृषि विकास योजना लागू के तहत जैविक खेती को बढ़ा दिया जाएगा। योजना को जिले के दो विकास खंडों लंढौरा और बहादराबाद में 200-200 कलस्टर भूमि पर शुरू किया जाएगा। प्रत्येक क्लस्टर में बीस बीघा भूमि रखी गई है। यदि कोई जैविक खेती करना चाहता है, तो वह न्याय पंचायत और विकास खंड स्तर पर आवेदन कर सकता है। इस योजना के धरातल पर उतरने से किसानों का जैविक खेती की ओर रुझान बढ़ेगा। जैविक खेती मनुष्य के लिए स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ ही भूमि के मित्र कीटों के लिए भी लाभदायक है। मुख्य कृषि विकास अधिकारी विकेश यादव ने बताया कि इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा जैविक उत्पादकों को बढ़ावा देना हैं।
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कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो जैविक खेती से उत्पादन पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन दो-तीन साल बाद रासायनिक उर्वरक से होने वाली खेती की बराबर ही पैदावार हो जाएगी।
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जानकारों की मानें तो रासायनिक उर्वरक के बजाए जैविक खेती के उत्पाद के मूल्य में दोगुना अंतर है। जैविक उत्पाद की बाजार में मांग भी अधिक है।