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बंदे तूने रूप बदल दिया गंगा का...
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कृष्ण कुंज आश्रम में आयोजित ज्ञानोत्सव में अपने विचारों को रखते वक्ता बजरंग मुनि
- फोटो : RISHIKESH
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बजरंग मुनि शोध संस्थान की ओर से ज्ञानोत्सव के नौवें दिन हिमालय दिवस की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों और कवियों ने विभिन्न रचनाओं से तंज कस खूब तालियां बटोरीं।
मायाकुंड स्थित कृष्ण कुंज आश्रम में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ युवा कवि नरेंद्र रयाल ने सरस्वती वंदना गाकर किया। कार्यक्रम में आलम मुसाफिर ने बंदे तूने रूप बदल दिया गंगा का... कविता सुनाकर गंगा की दशा व्यक्त की। पर्यावरणविद् विनोद जुगलान विप्र ने इस धरा पर वन न होंगे, तो जीवन हमारा नष्ट होगा... के माध्यम से हिमालय संरक्षण की चेतना जगाई। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने तंज कसते हुए कहा कि शेर का शिकार कर मानव शेरावाली से सुख समृद्धि की कामना करता है। वहीं वरिष्ठ कवयित्री अरुणा वशिष्ठ ने बाबा मैं तेरे आंगन की कली हूं... सुनाकर बचपन की याद दिलाई।
कार्यक्रम में डॉ. विक्रम अलंकार, डॉ. ऊषा कटारिया, पुष्पा ध्यानी, अशोक क्रेजी, प्रबोध उनियाल, महेश चिटकारिया, दीपक दरगन, उपेंद्र मिश्रा ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् आचार्य पंकज और श्री कृष्ण कुंज आश्रम के पीठाधीश्वर कृष्णाचार्य ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका मुनिकीरेती के अध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने कवियों को सम्मानित किया।
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इस अवसर पर अधिवक्ता रमाबल्लभ भट्ट, पिंकी कंडवाल, हरिचरण सिंह, अभिषेक शर्मा, मदन आर्य, रोशनी राणा, बीना जोशी, सरोज कुकरेती, नरेंद्र मैठाणी, कुसुम जोशी, शोभा बड़थ्वाल, मीना गौड़, माया देवी, आशा राठौर, नैना, आचार्य मुरारी पाठक, राजीव थपलियाल आदि मौजूद रहे।
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मायाकुंड स्थित कृष्ण कुंज आश्रम में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ युवा कवि नरेंद्र रयाल ने सरस्वती वंदना गाकर किया। कार्यक्रम में आलम मुसाफिर ने बंदे तूने रूप बदल दिया गंगा का... कविता सुनाकर गंगा की दशा व्यक्त की। पर्यावरणविद् विनोद जुगलान विप्र ने इस धरा पर वन न होंगे, तो जीवन हमारा नष्ट होगा... के माध्यम से हिमालय संरक्षण की चेतना जगाई। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य दिग्विजय सिंह तोमर ने तंज कसते हुए कहा कि शेर का शिकार कर मानव शेरावाली से सुख समृद्धि की कामना करता है। वहीं वरिष्ठ कवयित्री अरुणा वशिष्ठ ने बाबा मैं तेरे आंगन की कली हूं... सुनाकर बचपन की याद दिलाई।
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कार्यक्रम में डॉ. विक्रम अलंकार, डॉ. ऊषा कटारिया, पुष्पा ध्यानी, अशोक क्रेजी, प्रबोध उनियाल, महेश चिटकारिया, दीपक दरगन, उपेंद्र मिश्रा ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् आचार्य पंकज और श्री कृष्ण कुंज आश्रम के पीठाधीश्वर कृष्णाचार्य ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगर पालिका मुनिकीरेती के अध्यक्ष रोशन रतूड़ी ने कवियों को सम्मानित किया।
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इस अवसर पर अधिवक्ता रमाबल्लभ भट्ट, पिंकी कंडवाल, हरिचरण सिंह, अभिषेक शर्मा, मदन आर्य, रोशनी राणा, बीना जोशी, सरोज कुकरेती, नरेंद्र मैठाणी, कुसुम जोशी, शोभा बड़थ्वाल, मीना गौड़, माया देवी, आशा राठौर, नैना, आचार्य मुरारी पाठक, राजीव थपलियाल आदि मौजूद रहे।