{"_id":"63139f73f6042e38836c9ba5","slug":"wounds-of-disaster-not-healed-even-after-two-weeks-rishikesh-news-drn4217517133","type":"story","status":"publish","title_hn":"यमकेश्वर में दो सप्ताह बाद भी नहीं भरे आपदा के जख्म","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यमकेश्वर में दो सप्ताह बाद भी नहीं भरे आपदा के जख्म
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीते 19 अगस्त को यमकेश्वर ब्लॉक क्षेत्र में हुई अतिवृष्टि से कई गांवों में ग्रामीणों का काफी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों की कृषि भूमि, रास्ते और पेयजल योजना आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। पौड़ी प्रशासन ने कई स्थानों पर निरीक्षण कर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और मूलभूत समस्याओं को दुरुस्त करने आश्वासन दिया था। लेकिन आपदा बाद प्रशासन आपदाग्रस्त गांवों को भूल गया।
यमकेश्वर ब्लॉक में वीरकाटल, मंगलिया गांव, डौंर आदि गांवों में अतिवृष्टि से ग्रामीणों के कई नाली कृषि भूमि, आवासीय भवन और गोशालाएं आपदा में जमींदोज हो गए। आपदा से कमल सिंह और उपेंद्र रौथाण के मकान के अंदर मलबा भर गया। बीरकाटल में कई परिवारों के स्नान घर और शौचालय गदेरे में जमींदोज हो गए हैं। कई मकान कटाव के चलते खतरे की जद में हैं।
आनंद सिंह नयाल, उत्तम सिंह नयाल, विक्रम सिंह, सत्येंद्र सिंह, रविन्द्र सिंह रौथाण आदि कई ग्रामीणों की पुश्तैनी काश्तकारी भूमि बाढ़ से जमींदोज हो गई है। इन गांवों तक पहुंचने के सभी रास्ते भी आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, जितेंद्र सिंह नयाल, स्वयंबर सिंह रावत, भगत सिंह पयाल ने बताया कि ग्रामीण परिवारों के कई दोपहिया वाहन भी गांवों में ही फंसे हैं। बताया कि अभी तक पीड़ित परिवारों को न ही आर्थिक सहायता दी गई और न ही रास्ते बनवाए गए। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। मराल, पटना आदि गांव में यही हाल है।
विज्ञापन
विभागीय कर्मचारियों को पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि देने और गांव में मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। यदि अब तक ऐसा नहीं हुआ है तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-प्रमोद कुमार, एसडीएम, बिथ्याणी, यमकेश्वर
विज्ञापन
यमकेश्वर ब्लॉक में वीरकाटल, मंगलिया गांव, डौंर आदि गांवों में अतिवृष्टि से ग्रामीणों के कई नाली कृषि भूमि, आवासीय भवन और गोशालाएं आपदा में जमींदोज हो गए। आपदा से कमल सिंह और उपेंद्र रौथाण के मकान के अंदर मलबा भर गया। बीरकाटल में कई परिवारों के स्नान घर और शौचालय गदेरे में जमींदोज हो गए हैं। कई मकान कटाव के चलते खतरे की जद में हैं।
विज्ञापन
आनंद सिंह नयाल, उत्तम सिंह नयाल, विक्रम सिंह, सत्येंद्र सिंह, रविन्द्र सिंह रौथाण आदि कई ग्रामीणों की पुश्तैनी काश्तकारी भूमि बाढ़ से जमींदोज हो गई है। इन गांवों तक पहुंचने के सभी रास्ते भी आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा, जितेंद्र सिंह नयाल, स्वयंबर सिंह रावत, भगत सिंह पयाल ने बताया कि ग्रामीण परिवारों के कई दोपहिया वाहन भी गांवों में ही फंसे हैं। बताया कि अभी तक पीड़ित परिवारों को न ही आर्थिक सहायता दी गई और न ही रास्ते बनवाए गए। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीण प्राकृतिक स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। मराल, पटना आदि गांव में यही हाल है।
विज्ञापन
विभागीय कर्मचारियों को पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि देने और गांव में मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए हैं। यदि अब तक ऐसा नहीं हुआ है तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
-प्रमोद कुमार, एसडीएम, बिथ्याणी, यमकेश्वर