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Rishikesh News: आग की चपेट में आए मरीजों के उपचार का नहीं है इंतजाम
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IIएसपीएस राजकीय चिकित्सालय में बर्न यूनिट की नहीं सुविधा, रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
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I आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार की सुविधा एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में नहीं है। यहां बर्न यूनिट की सुविधा नहीं है। आग से झुलसे मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। यहां केवल 10 या 20 प्रतिशत आग से झुलसे मरीजों का ही उपचार होता है।
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Iदशहरा पर्व और दीपावली पर्व पर जगह-जगह आग लगने की घटनाएं होती हैं। पटाखे और आग की लपटों की चपेट में कई बार बच्चे, युवा और बुजुर्ग आ जाते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में रहता है। उप जिला चिकित्सालय में नरेंद्रनगर और यमकेश्वर ब्लॉक के अलावा हरिपुरकलां, रायवाला, श्यामपुर, रानीपोखरी, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम आदि जगहों के लोग उपचार को पहुंचते हैं।
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Iचारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव ऋषिकेश है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आज तक सरकारी अस्पताल में बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं की गई है। औपचारिकता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां महिला और पुरुष वार्ड में दो-दो बर्न बेड तैयार किए गए हैं। इन बेडों में भी केवल 10 से 20 प्रतिशत आग से झुलसे मरीजों का ही उपचार होता है। इससे अधिक झुलसे मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
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Iकेवल निरीक्षण के लिए ही खुलेंगे बर्न यूनिट के द्वार
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Iसरकारी अस्पताल में जब बर्न यूनिट कक्ष की स्थिति जानने का प्रयास किया गया तो नर्सिंग स्टाफ ने बर्न यूनिट को दिखाने से मना कर दिया। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि बर्न यूनिट के द्वार केवल निरीक्षण के लिए ही खुलते हैं, अन्य दिन इसके द्वार बंद रहते हैं।
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Iअस्पताल में बर्न यूनिट को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर से पत्राचार किया जाएगा। प्रयास करेंगे की आग से झुलसे मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही उपचार हो। - डॉ. संजय जैन, सीएमओI
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IIएसपीएस राजकीय चिकित्सालय में बर्न यूनिट की नहीं सुविधा, रेफर कर दिए जाते हैं मरीज
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I आग की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार की सुविधा एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में नहीं है। यहां बर्न यूनिट की सुविधा नहीं है। आग से झुलसे मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। यहां केवल 10 या 20 प्रतिशत आग से झुलसे मरीजों का ही उपचार होता है।
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Iदशहरा पर्व और दीपावली पर्व पर जगह-जगह आग लगने की घटनाएं होती हैं। पटाखे और आग की लपटों की चपेट में कई बार बच्चे, युवा और बुजुर्ग आ जाते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में रहता है। उप जिला चिकित्सालय में नरेंद्रनगर और यमकेश्वर ब्लॉक के अलावा हरिपुरकलां, रायवाला, श्यामपुर, रानीपोखरी, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम आदि जगहों के लोग उपचार को पहुंचते हैं।
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Iचारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव ऋषिकेश है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आज तक सरकारी अस्पताल में बर्न यूनिट की व्यवस्था नहीं की गई है। औपचारिकता के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां महिला और पुरुष वार्ड में दो-दो बर्न बेड तैयार किए गए हैं। इन बेडों में भी केवल 10 से 20 प्रतिशत आग से झुलसे मरीजों का ही उपचार होता है। इससे अधिक झुलसे मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
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Iकेवल निरीक्षण के लिए ही खुलेंगे बर्न यूनिट के द्वार
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Iसरकारी अस्पताल में जब बर्न यूनिट कक्ष की स्थिति जानने का प्रयास किया गया तो नर्सिंग स्टाफ ने बर्न यूनिट को दिखाने से मना कर दिया। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि बर्न यूनिट के द्वार केवल निरीक्षण के लिए ही खुलते हैं, अन्य दिन इसके द्वार बंद रहते हैं।
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Iअस्पताल में बर्न यूनिट को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए शासन स्तर से पत्राचार किया जाएगा। प्रयास करेंगे की आग से झुलसे मरीजों को सरकारी अस्पताल में ही उपचार हो। - डॉ. संजय जैन, सीएमओI