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पर्यटन पर पूरे साल रहा कोरोना का साया, अब ओमीक्रान की दहशत

Fri, 24 Dec 2021 01:30 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 24 Dec 2021 01:30 AM IST
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The shadow of Corona remained on tourism for the whole year, now Omicron
ऋषिकेश। कोरानाकाल में तीर्थनगरी में पर्यटन और राफ्टिंग का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विदेशी पर्यटकों पर निर्भर इन क्षेत्रों के व्यापारी और राफ्ट व्यवसायी मंदी की मार झेल रहे हैं। पूरे साल अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद होने से इन क्षेत्रों में विदेशी मेहमानों की चहलकदमी बंद हैं।
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लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती और तपोवन का पूरा व्यापार विदेशी पर्यटकों पर ही निर्भर है। कोरोना संक्रमण के चलते अप्रैल 2020 में विदेशी मेहमान धीरे-धीरे अपने देश लौट गए। अप्रैल से लेकर जुलाई तक करीब चार महीने क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। अप्रैल 2021 तक करीब नौ महीने तक इन क्षेत्रों में पर्यटकों की चहलकदमी न के बराबर रही। राफ्टिंग और कैंपिंग की गतिविधियां शुरू नहीं होने से सैलानियों ने इन भी क्षेत्रों से दूरी बनाई। 23 सितंबर 2021 में जैसे ही प्रदेश सरकार से राफ्टिंग को हरी झंडी मिली, वैसे ही यहां पर्यटकों की गतिविधियां शुरू हो गई। नवंबर करीब तीन महीने तक क्षेत्र में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब आदि प्रांतों के पर्यटकों की आवाजाही रही। दिसंबर महीने में देश, विदेश में नए वैरिएंट के आने से फिर पर्यटकों की संख्या में गिरावट शुरू हो गई है। लेकिन बीते डेढ़ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद होने से क्षेत्र में विदेशी मेहमानों की संख्या नहीं बढ़ी। इससे स्थानीय व्यापारियो का कारोबार चौपट हो गया है।
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इंसेट
अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में छाया रहा सन्नाटा
ऋषिकेश। एक से सात मार्च तक परमार्थ निकेतन आश्रम में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव आयोजित होता है। स्थानीय व्यापारी इस महोत्सव का बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस महोत्सव में करीब 150 से अधिक देश और 1500 से अधिक विदेशी साधक प्रतिभाग करते हैं। जिससे स्थानीय व्यापारियों के कारोबार में तीन से चार गुना बढ़ोतरी हो जाती है। कोरोनाकाल के चलते अंतरराष्ट्रीय सेवाएं बंद रही। जिसके कारण इस वर्ष सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव ऑनलाइन हुआ।
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कैफों से गायब हुए वाद्य यंत्रों की धुन
ऋषिकेश। स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती, तपोवन और लक्ष्मणझूला में गंगा किनारे सजे कैफों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। कोरोनाकाल से पहले इन कैफों में डिजरी डू, बांसुरी, तबला, मंजीरा, गिटार की गूंज सुनाई देती थी। लेकिन कोरोनाकाल में विदेशी पयर्टकों के न पहुंचने से इन वाद्य यंत्रों की धुन गायब हो गई है।

योग और ध्यान केंद्र पड़े हैं बंद
ऋषिकेश। स्वर्गाश्रम, लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती, तपोवन में तीन से अधिक योगकेंद्र, स्पा सेंटर, पंचकर्मा संचालित हैं। विदेशी मेहमानों की आवाजाही नहीं होने से बीते डेढ वर्षों से ये भी बंद पड़े हुए हैं। जो लोग इन क्षेत्रों में किराए पर केंद्र संचालित कर रहे थे, कुछ लोग इसे बंद कर अपने गांव की ओर लौट गए हैं।
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