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Rishikesh News: सरकारी अस्पताल में टीबी की दवा का संकट, भटक रहे मरीज

Sun, 17 Sep 2023 12:12 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 17 Sep 2023 12:12 AM IST
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The central and state governments are spending crores of
दो हफ्ते से दवा का संकट, मरीज मेडिकल स्टोरों से दवा खरीदने को मजबूर
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एमडीआर के मरीजों को तक नहीं मिल रही दवा



केंद्र और प्रदेश सरकार ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) बीमारी को दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था प्रणाली के चलते टीबी के मरीजों को दवा तक नहीं मिल पा रही है। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय परिसर में संचालित टीबी केंद्र में बीते दो सप्ताह से दवा नहीं है। मरीजों को निजी मेडिकल केंद्रों में जाकर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।

केंद्र सरकार ने 2027 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। प्रदेश सरकार भी टीबी को जड़ से मिटाने के लिए जन जागरूकता अभियान चला रही है। लेकिन सरकारी अस्पताल में दो सप्ताह से मरीज दवा के लिए भटक रहे हैं। एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) के मरीजों को लिवोफ़्लॉक्सासिन, लिजोलिड, वेटाकुली आदि दवाइयों के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। टीबी केंद्र में दवाइयां लेने पहुंचे वीरेंद्र ने बताया कि उनकी बेटी को टीबी है। लेकिन केंद्र में दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। उन्हें निजी मेडिकल स्टोरों पर जाकर महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
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सुनीता ने बताया कि उसने मेडिकल स्टोर से पांच दिन की दवाइयां करीब 750 रुपये में खरीदी हैं। आदेश कंडवाल ने बताया कि वह बीते पांच महीने से टीबी का उपचार करवा रहे हैं। लेकिन केंद्र में कभी पूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं होती हैं। साहिल ने बताया कि उनका टीबी से बचाव के लिए करीब 18 महीने का कोर्स है। निजी मेडिकल स्टोर से एक महीने की दवाइयां करीब तीन हजार रुपये में खरीदी है। इसके अलावा टीबी मरीज आदेश कंडवाल, पंकज गुप्ता और शिल्पा की भी यही परेशानी बनी है।
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एमडीआर चरण का क्या मतलब है

एमडीआर (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) टेस्ट से पता चलता है कि किस मरीज को कौन सी दवा ठीक करेगी। मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस होने के बाद रोगी को शरीर के हिसाब से दवा दी जा सकेगी। एमडीआर टेस्ट के बाद चिकित्सकों को पता चल जाता है कि रोगी को कौन सी दवा ठीक करेगी। सरकारी अस्पताल के टीवी केंद्र में इस समय करीब 250 मरीजों का इलाज चल रहा है।





छह महीने से रिक्त है चिकित्सक का पद



चिकित्सालय में संचालित टीबी केंद्र में बीते छह महीने से चिकित्सक का पद रिक्त है। छह महीने पहले अभियान बहुगुणा की यहां पर अस्थायी तैनाती थी। अभियान बहुगुणा के पीजी कोर्स के लिए जाने के बाद यह पद रिक्त है।






दो सप्ताह से टीबी केंद्र में मरीजों के लिए दवाइयां उपलब्ध नहीं थी, लेकिन अब व्यवस्था हो गई है। दवाइयों की कमी और चिकित्सक की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया है। - कुंदन लाल नौटियाल, फार्मासिस्ट टीबी केंद्र
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