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यमकेश्वर ब्लॉक की समस्याओं को प्रत्याशियों ने अपने एजेंडे में नहीं किया शामिल

Sun, 06 Feb 2022 10:21 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 06 Feb 2022 10:21 PM IST
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The candidates did not include the problems of Yamkeshwar block in their agenda.
विधानसभा चुनाव में यमकेश्वर विधानसभा के लोग आज भी यातायात, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। मतदाताओं को कहना है कि यह यमकेश्वर ब्लॉक को दुर्भाग्य है कि किसी भी दल के प्रत्याशियों ने ग्रामीणों की समस्याओं को अपने एजेंडे में शामिल नहीं किया है।
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लक्ष्मणझूला में अस्पताल की नींव आजादी के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में शुरू हुई थी। करीब सात दशक बाद भी यह राजकीय एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र ही है। जबकि लक्ष्मणझूला देश में ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध तीर्थस्थान के रूप में विख्यात है। लक्ष्मणझूला आज ग्राम पंचायत से अपग्रेड होकर नगर पंचायत हो गई है। लेकिन अस्पताल का आज भी उच्चीकरण नही हो सका। लाखों की जनसंख्या को आज भी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए हरिद्वार ऋषिकेश भटकना पड़ता है। लगातार चार पंचवर्षीय एक दल के प्रत्याशी के जीतने के बाबजूद भी आज अस्पताल की स्थिति जस की तस है। आज भी यह किसी के ऐजेंडे में नहीं है। यह जनता का दुर्भाग्य है।
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सत्यपालसिंह राणा, ग्राम रत्तापानी मराल
यमकेश्वर अंतर्गत हेंवल घाटी में बड़ी आपदा आई, जिससे हेंवल में आई भयंकर बाढ़ से हेंवल घाटी की हरित बैल्ट कही जाने वाली बैरागढ, मोहनचट्टी, जोग्याणा, घट्टूगाड, रत्तापानी, फूलचट्टी व पस्तोड़ा की हजारों नाली कृषि भूमि के साथ-साथ ग्रामीणों के कई मकान व गौशालाएं जमींदोज हो गई। इन गांवों के आवासीय क्षेत्र के तमाम तटबंध बाढ़ की भेंट चढ गए। तब से लेकर आज तक इन क्षेत्रों के ग्रामीण तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं। कई बार प्रस्ताव बनाकर सांसद व विधायकों को दे चुके हैं, पर कोई सुनने वाला नहीं है। जिससे वर्षा सीजन में लोग जानमाल की सुरक्षा से भयभीत रहते हैं। आज भी किसी प्रत्याशी के ऐजेंडे में यह मुद्दा नही है।
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कलम सिह राणा, ग्राम घट्टूगाड
ऋषिकेश से हमारे गांव की दूरी मात्र 20 किमी है। पूर्व में विधायकों की लापरवाही से विधायक निधि से हमें 80 किमी की दूरी से मागथा बूंगा, मुसराली रोड काटी गई। जबकि यह रोड मोहनचट्टी- सिलोगी मोटर मार्ग से 3 किमी की दूरी पर है। इसमें पड़ने वाले गांव कुमार्था, मुसराली,, बीरकाटल, मंगल्यागांव, बूंगाव, डौंर आदि गांव सड़क से बंचित हैं। जो सड़क बनी है वह भी बरसात में बंद हो जाती है। ग्रामीण अपने पैसे से सड़क की सफाई कराते हैं। किसी भी प्रत्याशी के ऐजेंडे में कहीं पर भी इस समस्या का जिक्र तक नही है। जो सोच का विषय है।

स्वयबंर सिह रावत, ग्राम मुसराली
बीन नदी पुल नहीं बनने से डांडामडल की करीब 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीण वर्षा सीजन में कालापानी जैसा जीवन जीने को आज भी मजबूर हैं। प्रसव के समय इस क्षेत्र की महिलाओं, मामूली बीमारी, चोट आदि लगने पर ग्रामीणों का जीवन संकट में पड़ जाता है। जबकि किमसार गांव ऋषिकेश से मात्र 25 किमी की दूरी पर है। काली सड़क व बीन नदी पर पुल न होने की बजह से ग्रामीण परेशान हैं। जबकि यहां के ग्रामीणों ने चार पंचवर्षीय तक एक दल के प्रत्याशी के पक्ष में वोट किया है। ये समस्याएं आज भी वैसी ही हैं। हम परिवर्तन चाहते हैं।
सौरभ कंडवाल किमसार
मनोज राणा
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