लोक आस्था के महापर्व छठ पर गंगा घाट और तटों पर पूर्वांचल समुदाय के लोगों की जबरदस्त भीड़ उमड़ी। व्रतियों ने विधि-विधान के साथ छठ मैया की पूजा-अर्चना की। दोपहर दो बजे से देर शाम तक गंगा घाट और तटों पर छठ मैया के गीत गूंजते रहे। व्रतियों ने शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, मुनिकीरेती, तपोवन, त्रिवेणीघाट, पूर्णानंद घाट, श्यामपुर, रायवाला, हरिपुरकलां आदि गंगा घाट और तटों पर जबरदस्त सजावट की गई थी। दोपहर करीब तीन बजे से व्रती लोग अपने-अपने परिवार के साथ सिर पर डाला (टोकरी) लेकर गंगा घाट और तटों की ओर रवाना हुए। सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार कर छठ मैया की पूजा करने पहुंचीं। कई श्रद्धालु लेट लेटकर गंगा घाट और तटों तक पहुंचे। घाट पर वेदी बनाकर व्रतियों ने छठ मैया को विभिन्न प्रकार के फल, सब्जी आदि खाद्य सामग्री का भोग लगाया। इस दौरान कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय, पहिले पहिल हम कईनी छठी मईया व्रत तोहर... गीतों से वातावरण गुंजायमान रहा। शाम ढलते ही गंगा में प्रवेश कर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। उसके बाद अपने घरों की ओर रवाना हो गए। गंगा घाट और तटों पर सजी वेदियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। छठ महापर्व को देखने के लिए देश विदेश के पर्यटक और स्थानीय लोग गंगा घाट और तटों की ओर पहुंचे।