{"_id":"5da778458ebc3e014c4b70b5","slug":"sword-of-cancellation-hanging-on-blood-bank-rishikesh-news-drn3230862182","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्लड बैंक पर लटकी निरस्तीकरण की तलवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्लड बैंक पर लटकी निरस्तीकरण की तलवार
विज्ञापन
राजकीय चिकित्सालय का ब्लड बैंक।
- फोटो : RISHIKESH
राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में संचालित ब्लड बैंक पर निरस्तीकरण की तलवार लटकती नजर आ रही है। ब्लड बैंक में नियमित पैथोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। यहां जिस पैथोलॉजिस्ट की ड्यूटी है, उन्हें राजकीय चिकित्सालय हरिद्वार ब्लड बैंक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ऐसे में पैथोलॉजिस्ट सप्ताह में तीन दिन राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश और तीन दिन राजकीय चिकित्सालय हरिद्वार बैठते हैं। नियमानुसार ब्लड बैंक चलाने के लिए पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति नियमित तौर पर होनी चाहिए।
इस मामले में राज्य ड्रग कंट्रोलर ने संज्ञान लिया है। ड्रग कंट्रोलर की मानें तो ब्लड बैंक में यदि नियमित रूप से पैथोलॉजिस्ट नहीं है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। ऐसे में एक बार फिर मरीजों के लिए समस्या पैदा हो जाएगी। देहरादून रोड स्थित राजकीय चिकित्सालय में वर्ष 2012 में ब्लड बैंक संचालित हुआ था। दो साल के सफल संचालन के बाद वर्ष 2014 में यहां पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण इसे बंद कर दिया गया। करीब 14 माह बाद यहां पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय की रक्तकोष अधिकारी के पद पर नियुक्त की गई और ब्लड बैंक का पुन: संचालन शुरू हो गया। नियमानुसार बिना रक्तकोष अधिकारी के रक्त नहीं दिया जा सकता है। इसके अलावा रक्तकोष के सभी कार्यों में पैैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
इसलिए बनी समस्या
दरअसल हरिद्वार के राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. रजत सैनी को मई 2019 में किन्हीं कारणों से सस्पेंड कर दिया गया। तभी से ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय हरिद्वार में सप्ताह में तीन दिन सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में न ही हरिद्वार राजकीय चिकित्सालय में नियमानुसार ब्लड बैंक संचालित हो पा रहा है और न ही ऋषिकेश में ब्लड बैंक का सही मायने में संचालन हो रहा है।
विज्ञापन
पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति जरूरी
ब्लड बैंक संचालित करने के लिए केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर एवं राज्य ड्रग कंट्रोलर कार्यालय से लाइसेंस जारी किया जाता है। इनके मानकों के अनुसार ब्लड बैंक में एक पैैथोलॉजिस्ट, एक टेक्नीशियन और एक स्टाफ नर्स का होना आवश्यक है। बिना पूर्णकालिक पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन नहीं किया जा सकता है।
कोट्स
एक दो दिनों में ड्रग इंस्पेक्टर ब्लड बैंक का निरीक्षण करेंगे। यदि सप्ताह में तीन दिन बिना पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन किया जा रहा है, तो ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
- ताजवर नेगी, ड्रग कंट्रोलर उत्तराखंड
मामला संज्ञान में है। तीन दिन हरिद्वार में तैनाती के निर्देश डीजी ऑफिस से जारी किए गए हैं। सप्ताह में तीन दिन पैैथोलॉजिस्ट के न रहने से दिक्कतें तो आती हैं, नियमित रूप से तैनाती के लिए डीजी ऑफिस से पत्राचार किया जाएगा।
- डॉ. एसके गुप्ता, सीएमओ देहरादून
विज्ञापन
इस मामले में राज्य ड्रग कंट्रोलर ने संज्ञान लिया है। ड्रग कंट्रोलर की मानें तो ब्लड बैंक में यदि नियमित रूप से पैथोलॉजिस्ट नहीं है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। ऐसे में एक बार फिर मरीजों के लिए समस्या पैदा हो जाएगी। देहरादून रोड स्थित राजकीय चिकित्सालय में वर्ष 2012 में ब्लड बैंक संचालित हुआ था। दो साल के सफल संचालन के बाद वर्ष 2014 में यहां पैथोलॉजिस्ट न होने के कारण इसे बंद कर दिया गया। करीब 14 माह बाद यहां पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय की रक्तकोष अधिकारी के पद पर नियुक्त की गई और ब्लड बैंक का पुन: संचालन शुरू हो गया। नियमानुसार बिना रक्तकोष अधिकारी के रक्त नहीं दिया जा सकता है। इसके अलावा रक्तकोष के सभी कार्यों में पैैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
विज्ञापन
इसलिए बनी समस्या
दरअसल हरिद्वार के राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. रजत सैनी को मई 2019 में किन्हीं कारणों से सस्पेंड कर दिया गया। तभी से ऋषिकेश राजकीय चिकित्सालय के ब्लड बैंक में तैनात पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार पांडेय हरिद्वार में सप्ताह में तीन दिन सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में न ही हरिद्वार राजकीय चिकित्सालय में नियमानुसार ब्लड बैंक संचालित हो पा रहा है और न ही ऋषिकेश में ब्लड बैंक का सही मायने में संचालन हो रहा है।
विज्ञापन
पैथोलॉजिस्ट की नियुक्ति जरूरी
ब्लड बैंक संचालित करने के लिए केंद्रीय ड्रग कंट्रोलर एवं राज्य ड्रग कंट्रोलर कार्यालय से लाइसेंस जारी किया जाता है। इनके मानकों के अनुसार ब्लड बैंक में एक पैैथोलॉजिस्ट, एक टेक्नीशियन और एक स्टाफ नर्स का होना आवश्यक है। बिना पूर्णकालिक पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन नहीं किया जा सकता है।
कोट्स
एक दो दिनों में ड्रग इंस्पेक्टर ब्लड बैंक का निरीक्षण करेंगे। यदि सप्ताह में तीन दिन बिना पैथोलॉजिस्ट के ब्लड बैंक का संचालन किया जा रहा है, तो ब्लड बैंक का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
- ताजवर नेगी, ड्रग कंट्रोलर उत्तराखंड
मामला संज्ञान में है। तीन दिन हरिद्वार में तैनाती के निर्देश डीजी ऑफिस से जारी किए गए हैं। सप्ताह में तीन दिन पैैथोलॉजिस्ट के न रहने से दिक्कतें तो आती हैं, नियमित रूप से तैनाती के लिए डीजी ऑफिस से पत्राचार किया जाएगा।
- डॉ. एसके गुप्ता, सीएमओ देहरादून