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शोपीस बनकर रह गई हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटें
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हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग पर रायवाला और हरिपुरकलां में लगी स्ट्रीट लाइटें शोपीस बनकर रह गई हैं, यह लाइटें महीनों से बंद पड़ी हैं। मगर इन को ठीक कराने की जहमत कोई नही उठा रहा है।
हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग पर लगी स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिसके चलते यहां राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि सड़क के बीचोंबीच मवेशी बैठ जाते हैं और अंधेरा होने के कारण यह राहगीरों को दिखाई नहीं देते हैं। यह मवेशी हादसों को न्योता दे रहे हैं। खास बात यह है कि स्ट्रीट लाइट के विद्युत पोल मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। गुणवत्ता की कमी के चलते कई पोल टूट चुके हैं।
बता दें कि कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से यह स्ट्रीट लाइटें हाईवे विस्तारीकरण के दौरान लगाई गई थी। और इनके रखरखाव का जिम्मा भी उत्तरप्रदेश राज्य सेतु निगम का है। राहगीरों की सुविधा के लिए यह लाइटें लगाई गई थी। मगर इसका लाभ न तो क्षेत्र की जनता को मिल पा रहा है और न ही राहगीरों को। मजे की बात यह है कि स्ट्रीट लाइट लगाने के कुछ महीनों बाद ही यह खराब भी होने लगी। लेकिन खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने वाला कोई नहीं है।
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कई बार तो विभागीय कर्मचारी पहले लाइट को दुरुस्त करने के लिए आए। लेकिन काम चलाऊ व्यवस्था करके निकल गए। जिस केबल को भूमिगत होना चाहिए था उसे हवा में एक पोल से दूसरे पोल में बांध दिया गया, जिसके कारण स्ट्रीट लाइट के लिए लगाए गए विद्युत पोल ही टूट कर जमीन पर गिर गए।
बार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत भी कराया गया, लेकिन विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। आलम यह है कि हरिपुर कला से लेकर नेपाली फार्म तक जगह-जगह स्ट्रीट लाइटें खराब है और हाईवे पर अंधेरा पसरा हुआ है।
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हरिद्वार-देहरादून राजमार्ग पर लगी स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिसके चलते यहां राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि सड़क के बीचोंबीच मवेशी बैठ जाते हैं और अंधेरा होने के कारण यह राहगीरों को दिखाई नहीं देते हैं। यह मवेशी हादसों को न्योता दे रहे हैं। खास बात यह है कि स्ट्रीट लाइट के विद्युत पोल मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं। गुणवत्ता की कमी के चलते कई पोल टूट चुके हैं।
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बता दें कि कार्यदाई संस्था उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम की ओर से यह स्ट्रीट लाइटें हाईवे विस्तारीकरण के दौरान लगाई गई थी। और इनके रखरखाव का जिम्मा भी उत्तरप्रदेश राज्य सेतु निगम का है। राहगीरों की सुविधा के लिए यह लाइटें लगाई गई थी। मगर इसका लाभ न तो क्षेत्र की जनता को मिल पा रहा है और न ही राहगीरों को। मजे की बात यह है कि स्ट्रीट लाइट लगाने के कुछ महीनों बाद ही यह खराब भी होने लगी। लेकिन खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने वाला कोई नहीं है।
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कई बार तो विभागीय कर्मचारी पहले लाइट को दुरुस्त करने के लिए आए। लेकिन काम चलाऊ व्यवस्था करके निकल गए। जिस केबल को भूमिगत होना चाहिए था उसे हवा में एक पोल से दूसरे पोल में बांध दिया गया, जिसके कारण स्ट्रीट लाइट के लिए लगाए गए विद्युत पोल ही टूट कर जमीन पर गिर गए।
बार स्थानीय ग्रामीणों द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत भी कराया गया, लेकिन विभाग के अधिकारियों पर इसका कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है। आलम यह है कि हरिपुर कला से लेकर नेपाली फार्म तक जगह-जगह स्ट्रीट लाइटें खराब है और हाईवे पर अंधेरा पसरा हुआ है।