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..तो बिना ढेला खर्च किए खत्म हो जाएगा त्रिवेणी घाट पर बना टापू
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शहर की हृदयस्थली त्रिवेणीघाट पर गंगा के बीच बना टापू।
- फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। सबकुछ ठीक रहा तो आने वाले दिनों में तीर्थनगरी की हृदयस्थली त्रिणेणीघाट पर बना टापू खत्म हो जाएगा। संभवत गंगा की धारा भी घाट पर बिना रूकावट के बहे। इस काम के लिए कई बार करोड़ों रुपये की डीपीआर भी तैयार हुई और ताजा प्रोजेक्ट नमामि गंगे के तहत भारत सरकार के पास लंबित भी है, लेकिन फिलहाल यह काम बिना ढेला खर्च किए अस्थायी तौर पर पूरा होने जा रहा है।
त्रिवेणीघाट पर 1157.65 लाख की लागत से कुंभ मेला कार्य के तहत आस्थापथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण का काम शुरू हो गया है। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग इस काम को अंजाम दे रहा है। इसके तहत 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुए आस्थापथ के सीसी ब्लाक का निर्माण किया जाना है। बहुत से नए ब्लाक तैयार किए जाने हैं। इसके अलावा जो ब्लाक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उन्हें तोड़कर नए ब्लाक लगाए जाने हैं। जिन स्थानों पर ये ब्लाक लगाए जाने हैं, वहां गंगा का बहाव बहुत तेज है, ऐसे में गंगा का बहाव मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग को लाखों कट्टे रेत-बजरी के चाहिए। जिसकी पूर्ति त्रिवेणीघाट पर बने टापू की रेत और बजरी से की जाएगी। कट्टों में रेत-बजरी भरने का काम शुरू हो चुका है। अब तक एक लाख से अधिक रेत के कट्टे तैयार किए जा चुके हैं। इस काम के लिए इतनी रेत चाहिए कि त्रिवेणीघाट पर बना पूरा टापू खत्म हो जाएगा। सहायक अभियंता सिंचाई विभाग अनुभव नौटियाल की मानें तो इस काम के लिए उन्हें सैकड़ों मीट्रिक टन रेत-बजरी चाहिए संभवत घाट पर बने टापू से इसका पूर्ति हो जाएगी। इसके बाद पूरा टापू साफ हो जाएगा। इस काम के लिए घाट से रेत-बजरी उठाना पहले से प्रोजेक्ट में उल्लेखित किया गया है।
पहले कुंभ कार्यों के तहत अब केंद्र को भेजा प्रोजेक्ट
ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर गंगा सतत रूप से बहती रहे, यह मुद्दा यहा निकाय चुनाव से लेकर विस चुनाव तक हमेशा उठता है। हर कोई गंगा को 12 माह घाट पर लाने का वायदा भी करता है, लेकिन अभी तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है। बहरहाल, सिंचाई विभाग ने कुंभ कार्यों के तहत घाट पर गंगा को लाने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का एक प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था, जिसे अब नमामि गंगे के तहत भारत सरकार की ओर सरका दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत घाट पर 60-60 मीटर लंबाई के दो स्पर और 20 गुणा 500 मीटर का एक चैनल बनना है। जिसे चिंचाई विभाग कुंभ कार्यों के तहत करना चाहता था, लेकिन यह प्रोजेक्ट फिलहाल नमामि गंगे के तहत केंद्र को सरका दिया गया है। इस प्राजेक्ट के तैयार हो जाने से गंगा की धारा स्थायी रूप से 12 महिने घाट पर बहेगी।
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अस्थाई कार्यों के लिए तीन करोड़ का प्रोजेक्ट
ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर अस्थाई कार्यों के निर्माण के लिए तीन करोड़ 25 लाख का एक प्रोजेक्ट कुंभ कार्यों के तहत अलग से भेजा गया है। सहायक अभियंता सिंचाई विभाग अनुभव नौटियाल ने बताया कि इसके तहत घाट पर टाइल्स, सुरक्षा पिल्लर, सुरक्षा जंजीरें, घाट का सौंदर्यीकरण, स्नान गृह, आस्था पथ का सौंदर्यीकरण आदि कार्य किए जाए जाने हैं, ताकि कुंभ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
अन्य लंबित प्रोजेक्ट पाइप लाइन में
1. आस्थापथ में घाटों का निर्माण - लागत 357.22 लाख रुपये
2. त्रिवेणीघाट पर सरस्वती नाले की टेपिंग किए जाने के कारण क्षतिग्रस्त घाट एवं प्लेटफार्म का निर्माण-लागत 99.45 लाख रुपये
3- चंद्रभागा नदी पर विकास कार्यों की योजना- लागत 1261.16 लाख रुपये
4- गंगा की जलधारा को त्रिवेणीघाट पर लाने की योजना - लागत 1253.71 लाख रुपये
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त्रिवेणीघाट पर 1157.65 लाख की लागत से कुंभ मेला कार्य के तहत आस्थापथ के पुनरोद्धार एवं बाढ़ सुरक्षा निर्माण का काम शुरू हो गया है। कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग इस काम को अंजाम दे रहा है। इसके तहत 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त हुए आस्थापथ के सीसी ब्लाक का निर्माण किया जाना है। बहुत से नए ब्लाक तैयार किए जाने हैं। इसके अलावा जो ब्लाक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, उन्हें तोड़कर नए ब्लाक लगाए जाने हैं। जिन स्थानों पर ये ब्लाक लगाए जाने हैं, वहां गंगा का बहाव बहुत तेज है, ऐसे में गंगा का बहाव मोड़ने के लिए सिंचाई विभाग को लाखों कट्टे रेत-बजरी के चाहिए। जिसकी पूर्ति त्रिवेणीघाट पर बने टापू की रेत और बजरी से की जाएगी। कट्टों में रेत-बजरी भरने का काम शुरू हो चुका है। अब तक एक लाख से अधिक रेत के कट्टे तैयार किए जा चुके हैं। इस काम के लिए इतनी रेत चाहिए कि त्रिवेणीघाट पर बना पूरा टापू खत्म हो जाएगा। सहायक अभियंता सिंचाई विभाग अनुभव नौटियाल की मानें तो इस काम के लिए उन्हें सैकड़ों मीट्रिक टन रेत-बजरी चाहिए संभवत घाट पर बने टापू से इसका पूर्ति हो जाएगी। इसके बाद पूरा टापू साफ हो जाएगा। इस काम के लिए घाट से रेत-बजरी उठाना पहले से प्रोजेक्ट में उल्लेखित किया गया है।
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पहले कुंभ कार्यों के तहत अब केंद्र को भेजा प्रोजेक्ट
ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर गंगा सतत रूप से बहती रहे, यह मुद्दा यहा निकाय चुनाव से लेकर विस चुनाव तक हमेशा उठता है। हर कोई गंगा को 12 माह घाट पर लाने का वायदा भी करता है, लेकिन अभी तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है। बहरहाल, सिंचाई विभाग ने कुंभ कार्यों के तहत घाट पर गंगा को लाने के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का एक प्रोजेक्ट बनाकर भेजा था, जिसे अब नमामि गंगे के तहत भारत सरकार की ओर सरका दिया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत घाट पर 60-60 मीटर लंबाई के दो स्पर और 20 गुणा 500 मीटर का एक चैनल बनना है। जिसे चिंचाई विभाग कुंभ कार्यों के तहत करना चाहता था, लेकिन यह प्रोजेक्ट फिलहाल नमामि गंगे के तहत केंद्र को सरका दिया गया है। इस प्राजेक्ट के तैयार हो जाने से गंगा की धारा स्थायी रूप से 12 महिने घाट पर बहेगी।
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अस्थाई कार्यों के लिए तीन करोड़ का प्रोजेक्ट
ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर अस्थाई कार्यों के निर्माण के लिए तीन करोड़ 25 लाख का एक प्रोजेक्ट कुंभ कार्यों के तहत अलग से भेजा गया है। सहायक अभियंता सिंचाई विभाग अनुभव नौटियाल ने बताया कि इसके तहत घाट पर टाइल्स, सुरक्षा पिल्लर, सुरक्षा जंजीरें, घाट का सौंदर्यीकरण, स्नान गृह, आस्था पथ का सौंदर्यीकरण आदि कार्य किए जाए जाने हैं, ताकि कुंभ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।
अन्य लंबित प्रोजेक्ट पाइप लाइन में
1. आस्थापथ में घाटों का निर्माण - लागत 357.22 लाख रुपये
2. त्रिवेणीघाट पर सरस्वती नाले की टेपिंग किए जाने के कारण क्षतिग्रस्त घाट एवं प्लेटफार्म का निर्माण-लागत 99.45 लाख रुपये
3- चंद्रभागा नदी पर विकास कार्यों की योजना- लागत 1261.16 लाख रुपये
4- गंगा की जलधारा को त्रिवेणीघाट पर लाने की योजना - लागत 1253.71 लाख रुपये