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श्री राम ने सिखाया राष्ट्र व समाज के प्रति भूमिका : मुरलीधर
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर 15 मई से 17 जून तक आयोजित मासिक श्री रामकथा का आयोजन किया गया। कथावाचक मुरलीधर ने भक्तों को कथा का रसपान कराया। कथा में राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। कथावाचक मुरलीधर महाराज ने कथा के प्रथम दिवस पर कहा कि श्रीराम ने अपने जीवन से हमें सिखाया कि धर्म व कर्तव्य क्या है और परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए। श्रीराम ने जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर प्रेम, त्याग और संयम का परिचय देते हुए आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण किया।
महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती, पीठाधीश्वर गुरुशरणानंद महाराज, स्वामी चिदानंद सरस्वती और आचार्य बालकृष्ण ने संयुक्तरूप से कथा का उद्घाटन किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीरामकथा, आख्यान नहीं, बल्कि जीवन का अमृत है। प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, करुणा, कर्तव्य और समर्पण का आदर्श है। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस स्वामी ने कहा कि परिवार जीवन की पहली पाठशाला है, जहां बच्चे न केवल बोलना और चलना सीखते हैं, बल्कि संस्कारों की शिक्षा भी प्राप्त करते हैं। केवट जयंती पर स्वामी ने कहा केवट वह अद्भुत भक्त हैं जिसने प्रभु श्रीराम से कुछ मांगा नहीं, बल्कि स्वयं प्रभु को ही मांग लिया। उसने सेवा को साधना, समर्पण को भक्ति और प्रेम को परम धर्म बना दिया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति बहुत गौरवशाली है और हम उस पावन संस्कृति के अनुगामी है।
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ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के गंगा तट पर 15 मई से 17 जून तक आयोजित मासिक श्री रामकथा का आयोजन किया गया। कथावाचक मुरलीधर ने भक्तों को कथा का रसपान कराया। कथा में राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। कथावाचक मुरलीधर महाराज ने कथा के प्रथम दिवस पर कहा कि श्रीराम ने अपने जीवन से हमें सिखाया कि धर्म व कर्तव्य क्या है और परिवार, समाज व राष्ट्र के प्रति हमारी भूमिका क्या होनी चाहिए। श्रीराम ने जीवन के प्रत्येक पड़ाव पर प्रेम, त्याग और संयम का परिचय देते हुए आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण किया।
महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती, पीठाधीश्वर गुरुशरणानंद महाराज, स्वामी चिदानंद सरस्वती और आचार्य बालकृष्ण ने संयुक्तरूप से कथा का उद्घाटन किया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि श्रीरामकथा, आख्यान नहीं, बल्कि जीवन का अमृत है। प्रभु श्रीराम का जीवन त्याग, करुणा, कर्तव्य और समर्पण का आदर्श है। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस स्वामी ने कहा कि परिवार जीवन की पहली पाठशाला है, जहां बच्चे न केवल बोलना और चलना सीखते हैं, बल्कि संस्कारों की शिक्षा भी प्राप्त करते हैं। केवट जयंती पर स्वामी ने कहा केवट वह अद्भुत भक्त हैं जिसने प्रभु श्रीराम से कुछ मांगा नहीं, बल्कि स्वयं प्रभु को ही मांग लिया। उसने सेवा को साधना, समर्पण को भक्ति और प्रेम को परम धर्म बना दिया। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति बहुत गौरवशाली है और हम उस पावन संस्कृति के अनुगामी है।
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