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Rishikesh News: जानलेवा हमले के दोषी को सात साल की कड़ी सजा
Sun, 22 Mar 2026 12:45 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:45 AM IST
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धारदार हथियार से हमला कर जान से मारने के प्रयास करने के आरोपी को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमन्निदर की अदालत ने दोष सिद्ध करार देते हुए सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पर 10 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न भुगतने पर 4 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
लाजपत राय मार्ग निवासी तनुज पुंडीर ने 23 सितंबर 2019 को कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। तनुज ने पुलिस को बताया था कि उसके पिता की लाजपत राय मार्ग पुराना टिहरी बस अड्डा पर बैग की दुकान है और हमारी दुकान के बगल में पवन कुमार अवैध रूप से जूतों का खोखा लगाया था, जिसके अतिक्रमण के चलते नगर निगम ने हटा दिया था। लेकिन पवन ने पुन: हमारी दुकान के बगल में खोखा लगाया।
तनुज ने पुलिस को बताया कि पवन को टोका गया तो उसने धारदार हथियार से मेरे पिता की गर्दन, बाएं हाथ व सिर आदि पर चोट पहुंचाई। पवन जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गया। तनुज की शिकायत पर पुलिस ने पवन के खिलाफ हत्या के प्रयास व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर 28 सितंबर 2019 को गिरफ्तार किया।
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बाद में 22 नवंबर को पवन को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। 20 नवंबर 2020 को पुलिस ने मामले में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। बीते 6 मार्च को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमन्निदर की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पवन को दोष सिद्ध करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास व 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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लाजपत राय मार्ग निवासी तनुज पुंडीर ने 23 सितंबर 2019 को कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। तनुज ने पुलिस को बताया था कि उसके पिता की लाजपत राय मार्ग पुराना टिहरी बस अड्डा पर बैग की दुकान है और हमारी दुकान के बगल में पवन कुमार अवैध रूप से जूतों का खोखा लगाया था, जिसके अतिक्रमण के चलते नगर निगम ने हटा दिया था। लेकिन पवन ने पुन: हमारी दुकान के बगल में खोखा लगाया।
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तनुज ने पुलिस को बताया कि पवन को टोका गया तो उसने धारदार हथियार से मेरे पिता की गर्दन, बाएं हाथ व सिर आदि पर चोट पहुंचाई। पवन जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गया। तनुज की शिकायत पर पुलिस ने पवन के खिलाफ हत्या के प्रयास व जान से मारने की धमकी देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर 28 सितंबर 2019 को गिरफ्तार किया।
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बाद में 22 नवंबर को पवन को जमानत पर रिहा कर दिया गया था। 20 नवंबर 2020 को पुलिस ने मामले में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। बीते 6 मार्च को दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश कंवर अमन्निदर की अदालत ने फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी पवन को दोष सिद्ध करार देते हुए 7 साल के सश्रम कारावास व 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है।