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दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल मिशन के माध्यम से पहुंचाई जाएं सेवाएं
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ऋषिकेश। वैभव शिखर सम्मेलन के श्रृंखलाबद्ध वर्चुअल सत्र में विशेषज्ञों ने ई-स्वास्थ्य के विकास पर जोर दिया। विशेषज्ञ चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा दौर में ग्रामीण भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल हेल्थ मिशन के माध्यम से सेवाएं प्रदान करने की आवश्यकता है।
वैभव शिखर सम्मेलन का 2 अक्तूबर गांधी जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था। महीनेभर तक चलने वाले इस वर्चुअल सम्मेलन में देश के साथ साथ अप्रवासी भारतीय विशेषज्ञों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के सहयोग से अकादमिक और अनुसंधान संस्थान के सहयोग के लिए सिस्टम विकसित करने पर वृहद व्याख्यानमाला आयोजित की जा रही है।
वैभव सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए एम्स निदेशक व सीईओ प्रो रवि कांत ने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न विषयों से जुड़े चिकित्सा विज्ञानियों द्वारा की जा रही चर्चा से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए मेडिकल सेवा की दृष्टि से लाभकारी साबित होगा। समिट में संस्थान के टेलीमेडिसिन विभाग की प्रमुख प्रो. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग का शब्दश: पालन सुनिश्चित करने के लिए एम्स द्वारा संचालित की गई टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ उत्तराखंड के मरीजों के अलावा समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को भी पहुंचा है। एम्स की ओर से इस सत्र का संचालन कर रहे फेमिली मेडिसिन विभाग के डा. योगेश बहुरूपी ने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए उत्तराखंड में विशेष योजना क्रियान्वित की जाएगी।
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सम्मेलन में सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डॉ. योगेश बहुरूपी, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. राजकुमार केएस, और डॉ. अजीत सिंह भदौरिया के अलावा इंग्लैंड से डॉ. तोरल गथानी. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया से डॉ. बसंत पवार, डॉ. साबू थॉमस, डॉ. हरीश ईश्वरैया, एसजीपीजीआई लखनऊ से प्रो. एसके मिश्रा, सी-डैक मोहाली से डॉ. एसपी सूद, सीएमसी लुधियाना से डॉ. ध्रुव घोष, मनाली से डॉ. फिलिप अलेक्जेंडर आदि ने प्रतिभाग किया।
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वैभव शिखर सम्मेलन का 2 अक्तूबर गांधी जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था। महीनेभर तक चलने वाले इस वर्चुअल सम्मेलन में देश के साथ साथ अप्रवासी भारतीय विशेषज्ञों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के सहयोग से अकादमिक और अनुसंधान संस्थान के सहयोग के लिए सिस्टम विकसित करने पर वृहद व्याख्यानमाला आयोजित की जा रही है।
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वैभव सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए एम्स निदेशक व सीईओ प्रो रवि कांत ने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न विषयों से जुड़े चिकित्सा विज्ञानियों द्वारा की जा रही चर्चा से जो निष्कर्ष निकलेगा, वह उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए मेडिकल सेवा की दृष्टि से लाभकारी साबित होगा। समिट में संस्थान के टेलीमेडिसिन विभाग की प्रमुख प्रो. वर्तिका सक्सेना ने बताया कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग का शब्दश: पालन सुनिश्चित करने के लिए एम्स द्वारा संचालित की गई टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ उत्तराखंड के मरीजों के अलावा समीपवर्ती राज्यों के मरीजों को भी पहुंचा है। एम्स की ओर से इस सत्र का संचालन कर रहे फेमिली मेडिसिन विभाग के डा. योगेश बहुरूपी ने कहा कि टेलीमेडिसिन के माध्यम से प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए उत्तराखंड में विशेष योजना क्रियान्वित की जाएगी।
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सम्मेलन में सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना, डॉ. योगेश बहुरूपी, डॉ. रवि गुप्ता, डॉ. राजकुमार केएस, और डॉ. अजीत सिंह भदौरिया के अलावा इंग्लैंड से डॉ. तोरल गथानी. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया से डॉ. बसंत पवार, डॉ. साबू थॉमस, डॉ. हरीश ईश्वरैया, एसजीपीजीआई लखनऊ से प्रो. एसके मिश्रा, सी-डैक मोहाली से डॉ. एसपी सूद, सीएमसी लुधियाना से डॉ. ध्रुव घोष, मनाली से डॉ. फिलिप अलेक्जेंडर आदि ने प्रतिभाग किया।